राजस्थान में तेज बारिश के कारण पिछले दिनों कई जिलों में बाढ़ के हालात हो गए। इन इलाकों में एसडीआरएफ की टीमों ने मदद पहुंचाने का काम कर रही है। एसडीआरएफ के अनुसार, इस साल टीमों ने 347 रेस्क्यू ऑपरेशन कर 856 से अधिक लोगों की जान बचाई है। 135 से अधिक पश
मानसून एक्टिव होने के साथ ही चंबल और उसकी सहायक नदियों में पानी का स्तर बढ़ा है। इससे आस-पास के गांव और ढाणियां पानी की चपेट में आई हैं। इसे देखते हुए जल्द टीमों को मौके पर भेजने और रेस्क्यू शुरू करने के लिए जयपुर में एसडीआरएफ ने एक अस्थाई कंट्रोल रूम भी बना रखा है। इस कंट्रोल रूम में 24 घंटे एसडीआरएफ की टीम मौजूद रहती हैं। जयपुर सिटी और जयपुर ग्रामीण में दो-दो टीमें एक्टिव हैं। हर परेशानी की स्थिति में टीमें रेस्पोंड कर रेस्क्यू ऑपरेशन को पूरा कर रही है।

जयपुर सिटी और जयपुर ग्रामीण में दो-दो टीमें एक्टिव हैं।
एसडीआरएफ के कमांडेंट राजेन्द्र सिसोदिया ने बताया- 57 टीमें राजस्थान के अलग-अलग जिलों में एक्टिव होकर काम कर रही है। इस बार मानसून समय पहले पहले आया। औसत बारिश से अधिक वर्षा हो रही है। अधिकांश स्थानों पर जल भराव हुआ है। इस साल चंबल नदीं भी उफान पर है। कोटा, सवाई माधोपुर, करौली, भरतपुर में भारी जल भराव की स्थिति रही।
21 जून से 25 जुलाई तक हमारी टीम ने 178 रेस्क्यू ऑपरेशन किए। इसमें 856 लोगों को जीवित बचाया। वहीं, 127 डैड बॉडी को पानी से बाहर निकाला। 116 से अधिक जीवों को बचाया गया है।

रबर बोट और लाइव जैकेट की मदद से हो रहे ऑपरेशन
एसडीआरएफ की हर टीम के पास एक रबर बोटऔर चार 10 लाइव जैकेट है। इस का उपयोग कर के टीमें लोगों की जान बचा रही हैं। कई बार डेड बॉडी पानी के नीचे फंस जाती है। इसे निकालने के लिए विशेष ट्रेनिंग लिए गोताखोरों की टीम है। जो कुछ पल में ही डैड बॉडी को बाहर निकाल देती है। सरकार को बताया गया है। हर टीम के पास अगर दो रबर बोट हो जाए तो लोगों को जल्दी से जल्दी रेस्क्यू किया जा सकेगा।
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