बीकानेर से करीब साठ किलोमीटर दूर स्थित पूनरासर गांव में हनुमान मंदिर में 30 अगस्त को मेला भरेगा। बड़ी संख्या में पदयात्री मंदिर के लिए रवाना हो रहे हैं। बीकानेर से नौरंगदेसर तक जहां सड़क मार्ग पर पैदल चलेंगे, वहीं इसके बाद खेतों से होते हुए कच्चे मार्ग
बड़ी संख्या में लोग नौरंगदेसर तक ही सेवा लगाते हैं, वहीं कुछ बड़ी सेवाएं कच्चे मार्ग पर भी है। ऐसे में यात्रियों को घर से रवाना होने के बाद से पूनरासर पहुंचने तक जगह-जगह सुविधाएं दी जा रही है। नौरंगदेसर से रामरतन प्याऊ, कन्हैयालाल प्याऊ होते हुए कुंडिया गांव पहुंचते हैं।

पूनरासर मंदिर।
वहां से खेजड़ी होते हुए भक्तों को पूनरासर पहुंचना है। कुछ लोग जहां बुधवार को रवाना हो गए थे, वहीं बड़ी संख्या में लोग गुरुवार को ऋषि पंचमी को रवाना हुए हैं। करीब चालीस घंटे के पैदल सफर में यात्री महज तीन-चार घंटे ही नींद लेते हैं।
पैर के फालों के इलाज के लिए शिविर
न सिर्फ स्वयंसेवी संगठन बल्कि सरकार की ओर से भी जगह-जगह शिविर लगाए जा रहे हैं। आयुर्वेद विभाग और चिकित्सा विभाग ने अपने अपने क्षेत्र के पीएचसी को अस्पताल में ही रहने के निर्देश दिए हैं।
रास्ते में पदयात्रियों को ठंडे पानी से लेकर ड्राईफ्रूट्स तक उपलब्ध कराए जा रहे हैं। जगह-जगह चाय-कॉफी की सुविधा दी जा रही है। इसके अलावा शाम होते ही जगह-जगह भंडारे शुरू हो गए हैं। जहां रातभर भोजन की सेवा दी जा रही है। इसके अलावा बड़े, पकौड़े और अन्य नमकीन उपलब्ध कराई जा रही है। पूरे रास्ते में खरीदकर खाने की एक भी दुकान नहीं है, बल्कि फी सेवा जगह-जगह उपलब्ध है।
हल्दीराम प्याऊ से रास्ता बंद
भारी वाहनों और चार पहिया वाहनों को हल्दीराम प्याऊ के पास ही रोका जा रहा है। यहां से सिर्फ सेवाओं की परमिशन लेने वाले वाहनों को ही परमिशन दी जा रही है। बस, ट्रक सहित अन्य वाहनों को जयपुर-जोधपुर बाइपास को पार करके नापासर से गुंसाईसर जाना पड़ रहा है।
इन वाहनों को तीस किलोमीटर तक लंबा सफर करना पड़ रहा है। सेरुणा के आगे से इनको हाईवे पर आने का रास्ता दिया जा रहा है।
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