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जवाहर कला केन्द्र की ओर से आयोजित मधुरम महोत्सव की सोमवार को सुरीली शुरुआत हुई।

जवाहर कला केन्द्र की ओर से आयोजित मधुरम महोत्सव की सोमवार को सुरीली शुरुआत हुई। जयपुर घराने की गायिका विदुषी सानिया पाटनकर ने विभिन्न रागों में मधुर गायन से श्रोताओं का मन मोहा। सानिया की प्रस्तुति ने कला प्रेमियों को जयपुर घराने की गायिकी के सौंदर्य

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विदुषी सानिया पाटनकर जयपुर घराने की प्रसिद्ध गायिका पद्मश्री अश्विनी भिडे देशपांडे की शिष्या हैं।

विदुषी सानिया पाटनकर जयपुर घराने की प्रसिद्ध गायिका पद्मश्री अश्विनी भिडे देशपांडे की शिष्या हैं।

विदुषी सानिया पाटनकर जयपुर घराने की प्रसिद्ध गायिका पद्मश्री अश्विनी भिडे देशपांडे की शिष्या हैं। वर्षा ऋतु को ध्यान में रखते हुए सानिया पाटनकर ने राग मेघ को अपनी प्रस्तुति का आधार बनाया। उन्होंने झपताल मध्यलय में निबद्ध बंदिश ‘गरजे घटा’ के जरिए बरसते बादलों की क्रीड़ा का वर्णन किया। राग सूहा कानडा में द्रुत एकताल में बंदिश ‘झूम झूम’ गाकर उन्होंने श्रोताओं को झूमने पर मजबूर कर दिया। इसके पश्चात उन्होंने श्रीकृष्ण चरित्र आधारित रचना पेश की। इसी के साथ भारत रत्न लता मंगेशकर और भारत रत्न पं. भीमसेन जोशी द्वारा गाए गए भजन ‘बाजे मुरलिया बाजे’ की मनोरम प्रस्तुति दी। अंत में संत सूरदास के भजन ‘हे गोविंद हे गोपाल’ को गाकर उन्होंने माहौल को कृष्णमय बना दिया। तबले पर डॉ. हरिओम हरि और हारमोनियम पर राजेंद्र बनर्जी ने संगत की। सानिया पाटनकर ने बताया किजयपुर घराना की गायिकी की शुरुआत उस्ताद अल्लादिया खां ने की, जिसमें आकार युक्त लगाव, लय और सुर का मेल और जोड का प्रयोजन होता है।

भारत रत्न लता मंगेशकर और भारत रत्न पं. भीमसेन जोशी द्वारा गाए गए भजन 'बाजे मुरलिया बाजे' की मनोरम प्रस्तुति दी।

भारत रत्न लता मंगेशकर और भारत रत्न पं. भीमसेन जोशी द्वारा गाए गए भजन ‘बाजे मुरलिया बाजे’ की मनोरम प्रस्तुति दी।

गौरतलब है कि केन्द्र में 4 अगस्त से जारी पारम्परिक लोक नृत्य कार्यशाला का समापन समारोह 19 अगस्त को आयोजित किया जाएगा। कार्यशाला में 40 से अधिक प्रतिभागी पं. राजेन्द्र राव के निर्देशन में लोकनृत्य के गुर सीख रहे है। समापन के अवसर पर घूमर, चिरमी, चरी नृत्य, सावन के गीतों और राधा कृष्ण के प्रसंगों को सामूहिक प्रस्तुति में नृत्य प्रस्तुति में दर्शाया जाएगा। 20 अगस्त को गीता शोध संस्थान एवं रासलीला अकादमी, वृन्दावन के कलाकार नृत्य नाटिका ‘भ्रमर’ पेश करेंगे। इसका लेखन छैल बिहारी उपाध्याय ‘छैल’ ने जबकि परिकल्पना व निर्देशन प्रो. दिनेश खन्ना ने किया है। राधा, कृष्ण व गोपियों के वेश में तैयार कलाकार संगीत और रंगमंच के रंग में रंगी प्रस्तुति में भगवान श्रीकृष्ण की लीला को मंच पर साकार करेंगे। सभी प्रस्तुतियां रंगायन सभागार में शाम 6:30 बजे होगी।



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