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प्रदेश की जेलों की वास्तविक स्थिति को जानने के लिए हाईकोर्ट ने जिला एवं सत्र न्यायाधीश को जिले की जेलों का निरीक्षण करने का आदेश दिया हैं। जस्टिस एसपी शर्मा की खंडपीठ ने यह आदेश स्वप्रेरणा से दर्ज याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया।
दरअसल, सुनवाई के दौरान न्यायमित्र प्रतीक कासलीवाल ने अदालत को बताया कि मामले में सरकार ने पिछली सुनवाई पर पालना रिपोर्ट पेश करने के लिए समय मांगा था। लेकिन इसके बावजूद सरकार ने अभी तक रिपोर्ट पेश नहीं की।
ऐसे में जिला न्यायाधीशों से स्थानीय जेलों की रिपोर्ट मांगनी चाहिए। जिससे कोर्ट के सामने वास्तविक स्थिति आ सके।
अदालत ने 45 बिंदुओं पर दिशा-निर्देश जारी किए थे इस मामले में हाईकोर्ट ने स्वप्रेरित प्रसंज्ञान लेते हुए जेल में कैदियों के कल्याण और वहां की व्यवस्थाओं को लेकर 45 बिंदुओं पर दिशा निर्देश जारी किए थे। समय-समय पर अदालत इन बिंदुओं पर सरकार से पालना रिपोर्ट मांगती हैं।
पिछली सुनवाई पर हाईकोर्ट ने सरकार से जेलों में वीसी की सुविधा सहित अन्य बिंदुओं पर स्पष्ट रिपोर्ट मांगी थी। लेकिन सरकार ने इस बारे में कोई रिपोर्ट पेश नहीं की। अदालत ने पिछली सुनवाई पर नाराजगी जताते हुए कहा था कि अगर ठोस रिपोर्ट पेश नहीं की जाती है तो संबंधित विभागों के सचिवों को तलब किया जाएगा।
लेकिन सोमवार को सुनवाई के दौरान भी सरकार की ओर से रिपोर्ट पेश नहीं की गई। इस पर अदालत ने सरकार से पूछा है कि वह बताए कि उसकी ओर से समय-समय पर दिए गए अदालती आदेशों की पालना में क्या कार्रवाई की गई।
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