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जयपुर के भवानी सिंह रोड स्थित वेद पणिग्रह में सावन के अंतिम सोमवार पर रुद्राभिषेक साधना का आयोजन हुआ। मेडिटेशन एक्सपर्ट निर्मला सेवानी की अगुवाई में हुई इस विशेष साधना में बड़ी संख्या में साधकों ने भाग लिया। आयोजन में पारंपरिक जल, दूध, मधु और पुष्पों
निर्मला सेवानी ने बताया कि यह सिर्फ पूजा नहीं बल्कि शिव ऊर्जा की ओर बढ़ने का एक साधन है। उन्होंने कहा कि श्रावण मास शिव को समर्पित होता है और इस दौरान वे अपने भक्तों की हर मनोकामना पूर्ण करने वाले स्वरूप में माने जाते हैं। साधना स्थल को धूप, दीप, ध्वनि और गंध से इस तरह सजाया गया था कि वहां पहुंचते ही साधकों को भीतर की शांति और ऊर्जा का अनुभव हो।
आत्मिक स्थिरता की ओर ले जाने वाली साधना
निर्मला सेवानी ने बताया- इस तरह की साधनाएं महामारी के बाद मानसिक और आत्मिक स्थिरता देने में मददगार साबित हो रही हैं। रुद्राभिषेक के दौरान ध्यान की गहराई और मंत्रों की ध्वनि ने साधकों को उनके भीतर के चक्रों से जोड़ने का काम किया। उन्होंने बताया कि जब व्यक्ति अपने भ्रम, अहंकार और नकारात्मकता को छोड़ता है, तब ही वह शिवत्व की ओर बढ़ता है। यह आयोजन परंपरा से आगे बढ़कर जीवन को साधना में ढालने और भगवान से जुड़ने का एक जरिया बना। जहां भक्त और भगवान के बीच कोई दूरी नहीं रह जाती।
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