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एसएमएस हॉस्पिटल में परिवार को रोहन की बॉडी सौंपने के साथ अंगदान का सर्टिफिकेट भी दिया गया।

जयपुर में एक्सीडेंट के कारण ब्रेनडेड युवक मौत से पहले 3 लोगों को नई जिंदगियां दे गया। सवाई मानसिंह हॉस्पिटल (SMS) के डॉक्टर्स की समझाइश के बाद परिवार ने युवक की किडनी-लिवर डोनेट कर दी।

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हालांकि, उन्होंने उसका हार्ट डोनेट करने से इनकार कर दिया। कॉलेज स्टूडेंट रोहन शर्मा (18) जयपुर के चौमूं का रहने वाला था। एसएमएस हॉस्पिटल में रविवार (31 अगस्त) सुबह ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया हुई।

ट्रेलर ने मारी थी बाइक को टक्कर

जानकारी के अनुसार चौमूं की गगोरियो की ढाणी निवासी रोहन शर्मा (19) का 24 अगस्त को एक्सीडेंट हुआ था। वो अपने भाई के साथ बाइक पर घर लौट रहा था।

राजावास पुलिया के पास ट्रेलर ने बाइक को टक्कर मार दी। गंभीर घायल रोहन को एसएमएस के ट्रोमा सेंटर में एडमिट कराया गया था। यहां 27 अगस्त की रात को उसका ब्रेनडेड हो गया था।

31 अगस्त की सुबह डॉक्टर्स की टीम ने रोहन के अंग निकालने की प्रोसेस कंप्लीट की।

31 अगस्त की सुबह डॉक्टर्स की टीम ने रोहन के अंग निकालने की प्रोसेस कंप्लीट की।

दोनों किडनी और लिवर किया दान

नोडल ऑफिसर डॉ. मनीष अग्रवाल ने बताया कि लंबी समझाइश के बाद परिवार किडनी-लिवर के डोनेशन पर सहमत हुआ। परिजनों ने हार्ट का दान करने से मना कर दिया था।

इस एसएमएस के प्रिंसिपल डॉ. दीपक माहेश्वरी, हॉस्पिटल अधीक्षक डॉ. सुशील भाटी, ऑप्टिमाइजेशन प्रभारी डॉ. चित्रा सिंह, कोऑर्डिनेटर प्रभारी रामप्रसाद मीणा शामिल रहे।

ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया रविवार सुबह पूरी हुई। इसके बाद रोहन की बॉडी परिवार को सौंपी दी गई।

अब पढ़िए – अंगदान और डोनेशन प्रोसेस जुड़े कुछ अहम सवालों के जवाब

सवाल- ऑर्गन डोनेशन क्या है?

जवाब- जब हमारे शरीर का कोई अंग खराब हो जाता है और वो काम करना बंद कर देता है, तब उस अंग की जगह किसी दूसरे व्यक्ति का स्वस्थ अंग लगाया जाता है। इसे ऑर्गन ट्रांसप्लांट कहते हैं। अगर कोई व्यक्ति अपने शरीर का अंग किसी जरूरतमंद को देता है तो उसे अंगदान (ऑर्गन डोनेशन) कहते हैं।

सवाल- भारत में ऑर्गन ट्रांसप्लांट की जरूरत और उपलब्धता के बीच कितना बड़ा अंतर है?

जवाब- भारत में जिन मरीजों को ऑर्गन ट्रांसप्लांट की जरूरत होती है और जितने ट्रांसप्लांट असल में किए जाते हैं, उनके बीच बहुत बड़ा फर्क है। इसे जर्नल ऑफ द एसोसिएशन ऑफ फिजिशियन्स ऑफ इंडिया (JAPI) के इस आंकड़े से समझिए-

सवाल- ऑर्गन और टिश्यू डोनेशन में क्या अंतर है?

जवाब- ऑर्गन यानी शरीर का बड़ा और पूरा अंग, जिसके सही तरीके से काम करने पर हमारी जिंदगी टिकी होती है। जैसे दिल, फेफड़े, किडनी, लिवर। इनमें खराबी आ जाए तो इंसान की जान खतरे में पड़ सकती है और इन्हें बदलने के लिए ऑर्गन ट्रांसप्लांट की जरूरत पड़ती है। टिश्यू यानी ऊतक, जो किसी अंग का छोटा-सा हिस्सा या परत होते हैं। ये कई कोशिकाओं से मिलकर बने होते हैं और शरीर को खास काम करने में मदद करते हैं। जैसेकि-

कॉर्निया: आंख का पारदर्शी हिस्सा, जो रोशनी अंदर जाने देता है।

स्किन: त्वचा, जो शरीर को ढकती और बचाती है।

हार्ट वॉल्व: दिल के अंदर का हिस्सा, जो खून के फ्लो को कंट्रोल करता है।

सवाल- कौन-कौन से अंग और टिश्यू दान किए जा सकते हैं?

जवाब- अंगदान सिर्फ दिल या किडनी देने तक सीमित नहीं है। जब कोई व्यक्ति अंगदान करता है तो उसके शरीर से कई अंग और ऊतक ऐसे निकल सकते हैं, जो जरूरतमंद मरीजों की जान बचा सकते हैं या उनकी जिंदगी को बेहतर बना सकते हैं।

सवाल- क्या अंगदान (Organ Donation) केवल मौत के बाद ही किया जा सकता है?

जवाब- अंगदान सिर्फ मौत के बाद ही नहीं, बल्कि जिंदा रहते भी किया जा सकता है। हालांकि जीवित व्यक्ति सभी अंग नहीं दे सकता है। वह सिर्फ कुछ अंग या उनका हिस्सा ही दान कर सकता है। अंगदान के दो तरीके होते हैं।

फोटो/वीडियो- मनोज सैनी, चौमूं



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