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झालावाड़ में शनिवार को पिपलोदी हादसे को लेकर न्याय पंचायत का आयोजन किया गया।
बांसवाड़-डूंगरपुर सांसद राजकुमार रोत ने पिपलोदी हादसे को लेकर राज्य सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा- अगर सरकार ने समय पर उचित न्याय दिया होता, तो न्याय पंचायत की जरूरत ही नहीं पड़ती। झालावाड़ के राधा रमण परिसर में शनिवार को पिपलोदी हादसे को लेकर न्
सांसद रोत ने कहा कि पीड़ित परिवारों के लिए रखी गई मांगों में प्रति परिवार एक करोड़ रुपए का मुआवजा, घायलों को 50-50 लाख रुपए की सहायता, पीड़ित परिवारों को जमीन और नौकरी शामिल है। सांसद ने आरोप लगाया कि जिला प्रशासन को इन मांगों से अवगत कराया गया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई। इस कारण न्याय पंचायत का आयोजन करना पड़ा।
3 अगस्त को झालावाड़ में आयोजन के दौरान सरकार ने असमाजिक तत्वों को भेजकर पत्थर और चप्पल फेंकने का प्रयास कराया। उस दिन हमारी मांगों को जिला प्रशासन को अवगत कराया, लेकिन कोई ध्यान नही दिया। हम सरकार से भीख नहीं मांगेंगे, सरकार आर्थिक सहायता के मामले में पूरी तरह झूठ बोल रही है। इस लड़ाई को छोड़ेंगे नहीं दिल्ली तक लड़ेंगे।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा प्रदेश के हर कोने में घूमते हैं, लेकिन वह झालावाड़ की घटना के इतने दिन के बावजूद भी नहीं आए। सरकार मांगों को लेकर मुंह बंद करके बैठी हुई है, जबकि मुआवजा राशि देने में भी भेदभाव किया है। हवाई जहाज में जो व्यक्ति मरते हैं उनको एक करोड़ और यह गरीबों को लाखों रुपए की राशि भी समय पर नहीं मिल पा रही है।
उदयपुर में हिन्दू-मुस्लिम वाली घटना में करोड़ों रुपए सहायता दी और सरकारी नौकरियां दी। सरकार आज करोड़पतियों के तीन-तीन चार-चार करोड़ रुपए माफ कर रही है, जबकि झालावाड़ में कुछ नहीं कर रही है। ऐसे में तय होता है कि जाति धर्म और व्यक्ति देखकर सरकार सहायता दे रही है सरकार न्याय नहीं कर रही बल्कि देश धर्म की राजनीतिक कर रही है।
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