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शहर में विकास कार्यों का दोहरा रवैया साफ नजर आ रहा है। आगरा रोड स्थित ईकोलॉजिकल जोन में जहां बसावट पूरी तरह प्रतिबंधित है, वहां सैकड़ों अवैध कॉलोनियां खड़ी हो गई हैं। नेताओं की सिफारिश पर जिम्मेदार विभागों ने न केवल इन्हें सड़क और सीवरेज की सुविधा दी
वहीं दूसरी ओर, गोनेर रोड क्षेत्र की कॉलोनियां पूरी तरह बस जाने के बाद भी आज तक सीवरेज, ड्रेनेज और पक्की सड़कों जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रही हैं। यही नहीं गोनेर रोड को पहले 300 फीट, उसके बाद मास्टर प्लान के मुताबिक 200 फीट किया जाना था। मौके पर 60 फीट रोड पर बड़े-बड़े निर्माण शुरू हो गए, जबकि इस रोड की बिल्डिंग लाइन तक तय नहीं हो पाई। रिंग रोड का टोल बचाने के लिए भारी वाहन इसी मार्ग से गुजरते हैं।
गोनेर रोड; बारिश के दौरान घरों में घुस जाता है गंदा पानी
गोनेर रोड पर करीब 500 कॉलोनियों में 60 से 70 हजार लोग रहते हैं। इनमें लक्ष्मी नगर, जगन्नाथपुरी, रामनगर, भगवान विहार, गुरु कॉलोनी, गणेश विहार, केशव विहार, शंकर विहार, सोहन नगर, भंवर विहार, बाल विहार, सरस्वती कॉलोनी, बालनगर, खंडेलवाल नगर, प्रेम नगर, जगदंबा कॉलोनी, राज आंगन, विराट नगर, विष्णु विहार, झिड़ा की ढाणी, खातियों की ढाणी, मचो की ढाणी, नई खोटी, करोल की ढाणी, नीमवाल की ढाणी और किशन कॉलोनी शामिल हैं। इन इलाकों में सीवरेज और ड्रेनेज व्यवस्था नहीं होने से बारिश के दौरान पानी भर जाता है। गंदा पानी घरों के बाहर जमा होकर मच्छरों और संक्रमणजनित बीमारियों का कारण बन रहा है।
600 करोड़ रुपए की डीपीआर ठंडे बस्ते में
स्थानीय समितियां और निवासी कई वर्षों से जनप्रतिनिधियों से गुहार लगा रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। वर्ष 2022 में जयपुर विकास प्राधिकरण ने इस क्षेत्र के विकास के लिए करीब 600 करोड़ रुपए की डीपीआर (विस्तृत परियोजना रिपोर्ट) तैयार की थी, मगर यह प्रस्ताव अब तक ठंडे बस्ते में पड़ा है। जानकारी के अनुसार, फंड की स्वीकृति और विभागीय समन्वय की कमी के कारण परियोजना की प्रक्रिया अधर में लटकी हुई है। वहीं, कई बार फील्ड सर्वे और मीटिंग के बावजूद काम आगे नहीं बढ़ पाया।
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