राजस्थान हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने फेसलेस असेसमेंट व्यवस्था में धारा 148 के तहत नोटिस जारी करने के लिए सक्षम अधिकारी को लेकर उपजे एक विवाद में अहम फैसला सुनाया है। चीफ जस्टिस के.आर. श्रीराम और जस्टिस रवि चिरानिया की पीठ ने बीकानेर निवासी अविनाश मोदी
मामले में रोचक पहलू यह है कि कोर्ट का यह निर्णय ज्यूरिसडिक्शनल असेसिंग ऑफिसर (JAO) और फेसलेस असेसिंग ऑफिसर (FAO) के बीच अधिकार क्षेत्र के विवाद को सुलझाता है। याचिकाकर्ता के वकील सक्षम पांडे ने तर्क दिया कि आयकर अधिनियम की धारा 148A(d) और धारा 148 के तहत जारी नोटिस JAO द्वारा जारी किया गया था, FAO द्वारा नहीं, जो कि नई व्यवस्था के अनुसार अवैध है।

बॉम्बे हाईकोर्ट के हेक्सावेयर केस का सहारा
डिवीजन बेंच ने अपने फैसले में बॉम्बे हाईकोर्ट के हेक्सावेयर टेक्नोलॉजीज लिमिटेड बनाम असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ इनकम टैक्स के जजमेंट का हवाला दिया। राजस्थान हाईकोर्ट ने इससे पहले श्री सीमेंट लिमिटेड और शारदा देवी छाजेड़ के मामलों में भी इसी तर्ज पर फैसला दिया था।
गुजरात हाईकोर्ट से मतभेद का रोचक पहलू
राजस्थान हाईकोर्ट ने अपने फैसले में गुजरात हाईकोर्ट के तलाती एंड तलाती एलएलपी बनाम ऑफिस ऑफ असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ इनकम टैक्स के फैसले से स्पष्ट असहमति जताई। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि गुजरात हाईकोर्ट के मामले के तथ्य “पूर्णतः भिन्न” थे। गुजरात के मामले में धारा 148 की व्याख्या 2 लागू थी, जो सर्च एंड सीजर केसेज से संबंधित है, जबकि अविनाश मोदी का मामला सामान्य रीअसेसमेंट का था।
कोर्ट ने टिप्पणी की कि गुजरात हाईकोर्ट को बॉम्बे हाईकोर्ट के अभिन अनिलकुमार शाह बनाम इनकम टैक्स ऑफिसर के मामले की जानकारी नहीं थी। इस मामले में CBDT के 31 मार्च 2021 और 6 सितंबर 2021 के आदेशों पर विचार किया गया था, जिनमें इंटरनेशनल टैक्सेशन चार्जेज और सेंट्रल चार्जेज के लिए अपवाद बनाए गए थे। बॉम्बे हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया था कि ये आदेश केवल असेसमेंट प्रक्रिया के लिए अपवाद करते हैं, न कि रीअसेसमेंट नोटिस के लिए।
तेलंगाना हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का संदर्भ
तेलंगाना हाईकोर्ट में वेंकटरमण रेड्डी पटलूला बनाम डिप्टी कमिश्नर ऑफ इनकम टैक्स के इसी तरह के मामले में आयकर विभाग द्वारा दायर विशेष अनुमति याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने गत 16 जुलाई को खारिज कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा था: “हमें हाईकोर्ट द्वारा पारित आदेश में हस्तक्षेप का कोई उचित कारण नजर नहीं आता।”
CBDT फेसलेस स्कीम में ऑटोमेटेड एलोकेशन
कोर्ट ने 29 मार्च 2022 की नोटिफिकेशन को इस मामले का आधार बनाया, जो फेसलेस असेसमेंट स्कीम को नियंत्रित करती है। इस योजना के अनुसार “ऑटोमेटेड एलोकेशन” अनिवार्य है, यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग का उपयोग करके मामलों का एलोकेशन होना चाहिए। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह योजना क्लॉज 2(1)(b) में परिभाषित “रैंडमाइज्ड एलोकेशन ऑफ केसेस बाई यूजिंग सूटेबल टेक्नोलॉजिकल टूल्स” को अनिवार्य बनाती है।
संदर्भ केस में अलग फैसला आए, तो विभाग को भी छूट
कोर्ट ने आयकर विभाग के अधिवक्ता के.के. बिस्सा के अनुरोध पर एक शर्त भी रखी है कि यदि भविष्य में सुप्रीम कोर्ट हेक्सावेयर टेक्नोलॉजीज, शारदा देवी छाजेड़ या श्री सीमेंट के मामलों में कोई अलग फैसला देता है, तो आयकर विभाग को भी धारा 148 के तहत नोटिस को पुनर्जीवित करने की छूट होगी।
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