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प्रतिबंध के बावजूद अजमेर शहर में चाइनीज मांझा बेरोकटोक बिक रहा है। ड्यूटी से घर लौट रहे रेलवे के सीनियर सेक्शन इंजीनियर कैलाशचंद शर्मा सोनीजी की नसियां के पास कटी पतंग के मांझे की चपेट में आ गए। चाइनीज मांझे से बाइक पर सवार शर्मा के गले पर करीब 6 सें
राहगीरों ने उन्हें लहुलूहान और अचेत हालत में जेएलएन अस्पताल पहुंचाया। चिकित्सकों ने बताया कि माझे का कट लगने से शर्मा के गले से काफी खून निकल गया। हालांकि स्थिति फिलहाल खतरे से बाहर बताई जा रही है। करीब उनके 15 टांके लगाएं गए।
मालूम हो कि चाइनीज मांझा को ‘किलर मांझा’ भी कहा जाता है। इसके कारण होने वाली दुर्घटनाओं और पर्यावरणीय नुकसान को देखते हुए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने 2017 से इसकी खरीद, बिक्री और भंडारण पर देशव्यापी प्रतिबंध लगा दिया। यह प्रतिबंध पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 और पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 के तहत लागू किया गया है। यह मांझा न केवल मानव जीवन को खतरे में डालता है, बल्कि पक्षियों की मृत्यु और पर्यावरणीय क्षति का कारण भी बनता है
खरीद, बिकी, भंडारण पर सजा-जुर्माना
चाइनीज मांझा बेचना अवैध है। उल्लंघन पर कड़ी कार्रवाई होती है। पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 की धारा 15 के तहत दोषी को 5 साल तक की सजा व 1 लाख रुपए तक का जुर्माना हो सकता है। भादसं की धारा 188 के तहत 6 माह जेल या जुर्माना व पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 के तहत 50 हजार तक का जुर्माना व 5 साल की सजा हो सकती है।
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