जयपुर के सांगानेर तहसील के प्रहलादपुरा गांव में एक ऐसा खेत है जहां से गुलाब की खुशबू दूर-दूर तक फैल रही है। यह इलाका इंडस्ट्रियल एरिया में आता है। यहां की मिट्टी, हवा-पानी फसलों के लिए उपयुक्त नहीं हैं।
कई फसलें खराब होने के बाद भी गांव के किसान राधेश्याम शर्मा (47) ने हार नहीं मानी और एक बीघा खेत में गुलाब की खेती कर सफल हुए।
अब इनके खेत में खिले गुलाब लोगों को इतने आकर्षक करते हैं कि यहां से गुजरने वाले लोग अपनी गाड़ियां रोककर फूलों के बीच फोटो खिंचवाते हैं। राधेश्याम के हौसले और नवाचार से यह संभव हुआ है।
म्हारे देस के खेती में इस बार बात जयपुर के किसान राधेश्याम शर्मा की…

अपने खेत में फूल तोड़ते हुए किसान राधेश्याम शर्मा।
किसान राधेश्याम शर्मा ने बताया- मेरे पिता जगदीश चमन (70) एक बीघा खेत में परंपरागत खेती करते थे। मैं जब 8वीं क्लास में था तब से खेती में पिता का हाथ बंटाने लगा।
किसान के रूप में कभी पिता को खेती से लाभ नहीं मिला। घर का काम चल जाता था बस। यहां पानी की समस्या थी। जो पानी था वह भी फ्लोराइड की अधिक मात्रा के कारण खेती के उपयुक्त नहीं था।
ऐसे में खेती से मुनाफे की बात सोचना बेमानी था। परिवार के भरण-पोषण के लिए 1999 में मैंने सीतापुरा स्थित वैभव जेम्स में प्राइवेट नौकरी करना शुरू किया।
जहां 4000 रुपए मासिक सैलरी मिलती थी। 2005 तक नौकरी भी की और पिता के साथ खेतीबाड़ी में भी साथ देता रहा। नवंबर 2005 में नौकरी छोड़कर मैं पूरी तरह परिवार के साथ खेती बाड़ी में ही जुट गया। इस दौरान ग्रेजुएशन भी किया।

टमाटर की फसल खराब हुई, गेहूं बोने की सलाह दी
राधेश्याम ने बताया- 2023 में एक साथी किसान ने टमाटर की खेती करने की सलाह दी। उसी साल टमाटर के 6000 पौधे मंगाकर खेत में लगाए।
इसके बुआई और दवाई सहित तमाम सार-संभाल में करीब 50 हजार का खर्चा आया। लेकिन बारिश और बीमारी के कारण सारी पौध खराब हो गई और लागत भी नहीं निकल पाई।
इसके बाद परिवार वालों ने गेहूं बोने की सलाह दी। मगर कम कमाई देने वाली फसल के बजाय कुछ अलग करने का फैसला किया।
मेरा खेत रीको इंडस्ट्रीयल एरिया में है। यहां हमेशा खेती की संभावना कम मानी जाती है। मिट्टी की उर्वरता और हवा की गुणवत्ता पर लगातार प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।

इसके बाद मैं यू-ट्यूब पर खेती के नवाचार के बारे में वीडियो देखने लगा। एक वीडियो गुलाब की खेती को लेकर देखा। इसमें बताया था कि कम जमीन पर गुलाब उगाकर किसान अच्छी कमाई कर रहे हैं। इसके बाद गुलाब की खेती के बारे में सर्च करना शुरू कर दिया।
गुलाब के बारे में कई जगह से जानकारी लेने के बाद अजमेर के पुष्कर में हमारा संपर्क हुआ। बात बन गई। करीब 15 रुपए प्रति पौधे की दर से 2500 पौधे पुष्कर से खरीद लिए।
एक बीघा में गुलाब के पौधे लगाए। यह शुरुआत आसान नहीं रही। पहली बार जब पौधे लगाए तो कुछ ही सप्ताह में दीमक ने सभी पौधे खराब कर दिए। मैं काफी हताश हुआ, लेकिन हार नहीं मानी।

राधेश्याम ने ऑनलाइन गुलाब की खेती के बारे में जानकारी ली। इसके बाद खुद से अलग-अलग प्रयोग कर अपनी फसल को संभाला।
दोबारा पौधे मंगवाए, सावधानी बरती
राधेश्याम ने बताया- मैंने दोबारा पौधे मंगवाए। इस बार पूरी सावधानी से रोपाई की। पौध लगाए तब इस बाद का ध्यान रखा कि पौधों में 2 फीट का गैप रहे।
साथ ही गैलरी में 5 फीट की दूरी रखी। यह पौध मैंने पत्नी मंजू और बेटों विजय-कान्हा के सहयोग से मिलकर तैयार की थी। करीब 15 दिन मिट्टी खोदने से लेकर पौध लगाने में समय लगाया। जिससे पौधे खरीदे थे उससे करीब दो महीने तक लगातार संपर्क में रहा। आखिर इस बार मेहनत रंग लाई। सभी पौधे लग गए।

रोजाना 50 किलो तक फूलों का प्रोडक्शन
राधेश्याम ने बताया- फिलहाल पौधों की हाइट कम है। लेकिन रोजाना 40-50 किलो तक फूल तोड़ लेते हैं। इन्हें मंडी में बेचता हूं। इससे गेहूं के मुकाबले कई गुना ज्यादा कमाई हो रही है।
गुलाब की खेती में शुरुआत में मेहनत जरूर लगती है, लेकिन उसके बाद देखरेख करना मुश्किल नहीं है। गर्मियों में सात-आठ दिन में एक बार सिंचाई करनी होती है।
9 महीने पहले ही गुलाब की खेती शुरू की है। इसमें अच्छा रिटर्न मिल रहा है। अभी गुलाब की मार्केट कीमत 50 से 200 रुपए प्रति किलो है।
कई बार डिमांड कम रहने पर इससे नीचे रेट पर भी फूल बेचने पड़ते हैं। लेकिन अन्य खेती की तुलना में गुलाब की खेती सरल और मुनाफा देने वाली है।
रोजाना औसत कमाई 2000 रुपए की हो जाती है। अभी तो गुलाब के फूल और पत्तियां बेच रहे हैं। भविष्य में गुलकंद और गुलाब जल का प्लांट लगाने की योजना है।

किसान को गुलाब की अच्छी क्वालिटी मिली रही है। कीमत भी अच्छी मिल रही है।
किसानों को सलाह-खुद प्रोसेसिंग भी करें
किसान राधेश्याम ने बताया- किसान को खेती करने के साथ-साथ प्रोसेसिंग के क्षेत्र में भी जाना चाहिए। इससे उसकी कमाई कई गुना बढ़ जाएगी। सरकार को भी इसके लिए कदम उठाना चाहिए।
किसानों को स्किल्ड करने के लिए प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराना चाहिए। किसान उपज के साथ खुद के प्रोडक्ट बनाए और उन्हें बेचने के लिए उसे मार्केट भी उपलब्ध होना चाहिए।

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सिर्फ एक बीघा जमीन पर झालावाड़ के किसान ने कमाई का ऐसा मॉडल विकसित किया, जिसने उसे अलग पहचान दिलाई, सम्मान दिलाया। ये हैं झालावाड़ शहर से करीब 30 किलोमीटर दूर बकानी कस्बे के भंवरलाल कुशवाह (59), जिन्होंने पशुपालन आधारित जैविक खेती आधुनिक तरीके से की। (पढ़ें पूरी खबर)
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