रामलीला मंचन के दौरान सीता स्वयंवर का आयोजन किया गया
भीलवाड़ा के आजाद चौक में पिछले 80 साल से लगातार रामलीला का मंचन किया जा रहा है। बड़ी संख्या में यहां महिलाएं पुरुष और बच्चे रामलीला का मंचन देखने के लिए आते हैं। प्रभु राम के सिद्धांतों को जीवन में अपनाने की प्रेरणा लेते हैं।
इस आयोजन की सबसे खास बात यह है कि इसमें पुरुष पात्रों का किरदार पुरुष और महिला पात्रों का किरदार महिलाएं निभाती हैं। जिन्हें देखने के लिए भीलवाड़ा शहर ही नहीं आसपास से भी बड़ी संख्या में लोग आजाद चौक पहुंचते हैं और रामलीला मंचन का आनंद लेते हैं।

बड़ी संख्या में दर्शक रामलीला देखने पहुंचे हैं
कलाकारों द्वारा निशुल्क मंचन किया जाता है
आयोजन समिति की अध्यक्ष मंजू पोखरना ने बताया कि भीलवाड़ा में पिछले 80 साल से लगातार रामलीला का मंचन किया जा रहा है। यहां जितने भी कैरेक्टर रामलीला में रोल प्ले करते हैं वो सभी निशुल्क भाव से मंचन करते हैं। इसके लिए करीब एक से डेढ़ महीने पहले से तैयारी शुरू हो जाती है।डायलॉग डिलीवरी चाल/ढाल और वेशभूषा सबके लिए ट्रेनिंग ली जाती है।
तीन पीढ़ियां एक साथ रोल प्ले करती हैं
इस आयोजन में कई ऐसे पात्र हैं जो पीढ़ियों से इसे सफल बनाने के लिए अपनी निशुल्क सेवाएं दे रहे हैं। दादा- परदादा, बेटा और पोता और उससे पहले भी उनकी कई पीढ़ियां रामलीला के पात्रों को स्टेज पर जीवंत कर चुकी है।वर्तमान में भी यहां तीन पीढ़ियां एक साथ रामलीला के अलग-अलग पात्रों का मंचन करती हैं।

अलग अलग पात्रों द्वार मंचन किया जा है
यहां आकर अलग एहसास
रामलीला देखने आई ईशा बताती है कि गरबा और डांडिया से यहां एक अलग ही अलग और अनूठा माहौल है। भगवान राम के संवादों को लाइव देखना, उन्हें सुनकर जीवन में उतरना एक अलग ही अनुभव है। हम लोग कितने ही सोशलाइज हो जाएं। कितनी ही सोशल मीडिया की दुनिया में खो जाए लेकिन यहां आकर एक अलग एहसास हुआ है ।
रामलीला से मिली कई शिक्षाएं
अपने पेरेंट्स के साथ रामलीला देखने आई 7 साल की बच्ची नितेशी का कहना है कि रामलीला देखना उसे काफी पसंद है। उसने टीवी पर रामलीला देखी तो लाइव देखने की भी इच्छा हुई।रामलीला से उसे कई अच्छी शिक्षाएं मिली है और वो इन शिक्षाओं को अपने जीवन में ग्रहण भी करेगी ।

देवर्षि नारद ओर भगवान विष्णु संवाद के दौरान
प्रभु राम के चरित्र से बच्चे सीख लें
ऐसे ही अपने बच्चों को लेकर रामलीला देखने पहुंचे पेरेंट्स रोहित बताते हैं कि कोविड के दौर में जब टीवी पर फिर से रामायण शुरू हुई थी तो बच्चों ने उनके किरदारों को टेलीविजन स्क्रीन पर देखा था। आज इन्हीं किरदारों को लाइव देखना एक अलग एहसास है, हमारा धर्म संस्कृति और प्रभु राम के आदर्श बच्चों में किस प्रकार डेवलप हो। प्रभु राम का चरित्र और उनके जीवन से बच्चे प्रेरणा ले इसी उद्देश्य के साथ इन्हें यहां पर रामलीला दिखाने के लिए रोजाना लेकर आता हूं और बच्चे भी रामलीला का आनंद उत्साह से लेते हैं।
दूर दूर से देखने दर्शक आते हैं
भीलवाड़ा में नवरात्रि के साथ ही रामलीला का मंचन शुरू हो जाता है जो दशहरे और दिवाली के बीच तक जारी रहता है। इस दौरान कई प्रसंगों से दर्शकों को अवगत कराया जाता है जिनमें सीता स्वयंवर, रावण द्वारा सीता का हरण, राम रावण युद्ध ओ राम और लक्ष्मण के संवाद शामिल हैं। इन सभी का जीवंत प्रदर्शन मंच पर किया जाता है और बड़ी संख्या में दर्शन उत्साह से इन्हें देखने के लिए पहुंचते हैं।

देर रात तक दर्शक उत्साह से रामलीला देखते हैं
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