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उदयपुर जिले के खेरवाड़ा सीएचसी में केएमसी युनिट इस तरह तैयार किया गया है।

उदयपुर जिले के खेरवाड़ा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में कंगारू मदर केयर (केएमसी) लाउंज स्थापित किया गया है। यह यूनिट मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को नई दिशा देने वाली एक अभिनव पहल के रूप में परिणाम देगी। आकांक्षी ब्लॉक खेरवाड़ा में इस तरह की

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उदयपुर के सीएचसी खेरवाड़ा में स्थापित की कंगारू मदर केयर लाउंज की तस्वीर।

उदयपुर के सीएचसी खेरवाड़ा में स्थापित की कंगारू मदर केयर लाउंज की तस्वीर।

जिला कलेक्टर नमित मेहता ने बताया कि खेरवाड़ा आकांक्षी ब्लॉक होने के कारण स्वास्थ्य एवं पोषण संबंधी सूचकों में सुधार के लिए यह पहल अत्यंत महत्वपूर्ण है। जिला प्रशासन के निर्देशन में केएमसी. लाउंज के मॉडल विकास की पहल अप्रैल 2025 में की गई, जो अगस्त 2025 तक एक इनोवेटिव मॉडल के रूप में स्थापित हे चुका है।

उन्होंने बताया- इसके पश्चात जिला परिषद एवं सीएमएचओ द्वारा इसे उदयपुर जिला के हर सीएचसी और पीएचसी में स्थापित करने का आदेश जारी किया गया। मेहता ने कहा कि केएमसी लाउंज खेरवाड़ा सीएचसी में बनकर तैयार होना उदयपुर जिले के लिए गर्व की बात है।

उदयपुर के सीएचसी खेरवाड़ा की पूर्व की तस्वीर।

उदयपुर के सीएचसी खेरवाड़ा की पूर्व की तस्वीर।

जिला परिषद की मुख्य कार्यकारी अधिकारी रिया डाबी ने बताया कि इससे नवजात एवं मातृ स्वास्थ्य कार्यक्रम को और मज़बूती मिलेगी। इसके साथ ही एएनसी अवधि में ही उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था की पहचान कर उन्हें सही देखभाल प्रदान करने की व्यवस्था की जाएगी। इस प्रकार यह पहल आकांक्षी ब्लॉक के मानकों के अनुरूप स्वास्थ्य सेवाओं को मज़बूत बनाने में अहम योगदान देगी।

डाबी ने कहा कि केएमसी यूनिट खेरवाड़ा सीएचसी को राजस्थान ही नहीं, बल्कि देशभर में एक मॉडल हेल्थ फैसिलिटी के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

जानिए केएमसी लाउंज को

  • कंगारू मदर केयर यूनिट जीरो सप्रेशन पॉलिसी पर आधारित है, जिसके अंतर्गत मां और शिशु को अलग न रखकर निरंतर साथ रखने की व्यवस्था की गई है।
  • बताते है कि इस दृष्टिकोण से न केवल शिशु के जीवन को सुरक्षित बनाता है बल्कि प्रसवोत्तर अवधि में माताओं को भी बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करता है।
  • इस लाउंज में कमजोर वजन अथवा समय से पूर्व जन्मे शिशुओं (1800 से 2500 ग्राम तक) को उनकी माताओं के साथ त्वचा से त्वचा संपर्क (स्किन टू स्किन कॉन्टेक्ट) में रखा जाता है। इससे शिशु का तापमान नियंत्रित रहता है और हाइपोथर्मिया से बचाव होता है।
  • इसमें शिशु का वजन तेज़ी से बढ़ता है और स्तनपान की अवधि लंबी होती है। मां और शिशु के बीच गहरा भावनात्मक जुड़ाव विकसित होता है। माताओं का अस्पताल में ठहराव बढ़ता है, जिससे जटिलताओं की पहचान और उपचार की संभावना बेहतर होती है।
उदयपुर के सीएचसी खेरवाड़ा में स्थापित की कंगारू मदर केयर लाउंज के बाहर की तस्वीर।

उदयपुर के सीएचसी खेरवाड़ा में स्थापित की कंगारू मदर केयर लाउंज के बाहर की तस्वीर।

केएमसी के संभावित प्रभाव ये बता रहे है

  • प्रसव के बाद कमजोर शिशुओं की निरंतर ट्रैकिंग और देखभाल संभव होगी।
  • 1800 से 2500 ग्राम तक के स्थिर नवजात अब खेरवाड़ा सीएचसी पर ही उपचार पा सकेंगे, जिससे दूरस्थ रेफ़रल की आवश्यकता कम होगी।
  • केवल अत्यधिक कम वजन (1800 ग्राम से कम) या बीमार शिशुओं को ही जिला स्तरीय एसएनसीयू में भेजना होगा।
  • इससे जिला अस्पतालों पर भार कम होगा और रेफ़रल घटने से बेड ऑक्युपेंसी दर कम होगी और गंभीर शिशुओं पर अधिक ध्यान दिया जा सकेगा।
  • माताएं प्रसव के बाद अधिक समय तक अस्पताल में रहेंगी, जिससे एक्सक्लूसिव ब्रेस्टफीडिंग और शिशु के वजन की निरंतर निगरानी सुनिश्चित होगी। इसके अलावा यूनिट डॉक्टरों और नर्सों को बेहतर कार्य वातावरण उपलब्ध कराएगी और उनके गर्व की भावना को बढ़ाएगी।
  • साथ ही सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर लोगों का विश्वास मज़बूत होगा और उन्हें वीआईपी जैसी देखभाल का अनुभव मिलेगा।
उदयपुर के सीएचसी खेरवाड़ा में केएमसी युनिट को लेकर जानकारी लेती उदयपुर जिला परिषद सीईओ रिया डाबी।

उदयपुर के सीएचसी खेरवाड़ा में केएमसी युनिट को लेकर जानकारी लेती उदयपुर जिला परिषद सीईओ रिया डाबी।

कलक्टर ने दिल्ली में दिया था प्रस्तुतीकरण आकांक्षी ब्लॉक में की गई इस पहल की जिला कलक्टर नमित मेहता ने पूर्व में 17वें सिविल सेवा दिवस पर विज्ञान भवन, नई दिल्ली में प्रस्तुति दी थी। इस पर उसे देश भर से आए अधिकारियों तथा विषय विशेषज्ञों ने सराहा था।



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