स्वायत्त शासन विभाग (डीएलबी) ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ 30 कर्मचारियों का प्रमोशन कर एईएन से एक्सईन बना दिया। सुप्रीम कोर्ट ने फैसला दिया था कि 2005 के बाद डिस्टेंस एजुकेशन से ली गई कोई भी टेक्निकल डिग्री प्रमोशन में मान्य नहीं होगी।
इन कर्मचारियों जल्दी प्रमोशन के लिए डिस्टेंस एजुकेशन से ही बीटेक/बीई की डिग्री ली थी। डिग्री के बाद भी अनुभव कम पड़ा तो विभाग ने एक और नियम विरुद्ध काम किया।
डिप्लोमाधारी कर्मचारियों का सर्विस का एक तिहाई अनुभव भी डिग्री के अनुभव में जोड़ दिया। मामले में 2 और गड़बड़ियां सामने आईं। कई कर्मचारियों ने डिग्री पहले कर ली थी और बाद में विभाग से इसकी अनुमति मांगी।
इसी तरह उदयपुर की जेआरएन राजस्थान विद्यापीठ (डीम्ड) यूनिवर्सिटी से डिग्री लेने वाले कई लोगों के 2 अलग-अलग सेमेस्टर के एग्जाम एक ही साथ हुए बताए गए हैं।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद पंचायतीराज विभाग ने प्रमोशन लेने वाले अधिकारियों को वापस उसी कैटेगरी में डाल दिया था, लेकिन स्वायत्त शासन विभाग ने अभी तक ऐसा कोई कदम नहीं उठाया है।
पढ़िए पूरी रिपोर्ट…

सुप्रीम कोर्ट के फैसले की कॉपी, जिसमें डिस्टेंस एजुकेशन से टेक्निकल डिग्री को अमान्य माना था।
सूचना के अधिकार में मिली जानकारी से खुलासा
सूचना के अधिकार के तहत एडवोकेट यादवेंद्र सिंह जादौन ने सहायक अभियंताओं (AEN) की पदोन्नति तथा स्नातक की डिग्री की डिटेल लेने के लिए याचिका लगाई थी।
याचिका में डिस्टेंस एजुकेशन से डिग्री लेने के बाद प्रमोशन लेने वाले कर्मचारियों की डिटेल मांगी गई थी। विभाग ने याचिका के सवालों का जवाब देने में कई साल लगा दिए।
सबसे पहले साल 2020 में आरटीआई लगाकर 2019 में हुई कर्मचारियों की पदोन्नति की जानकारी मांगी थी। विभाग ने पर्सनल सूचनाएं देने से मना कर दिया।
इसके बाद भी कई और अलग-अलग आरटीआई लगाकर प्रमोशन पाने वाले कर्मचारियों की डिटेल मांगी गई। साल 2024 में 30 कर्मचारियों की लिस्ट के साथ उनकी डिग्री और प्रमोशन को लेकर आरटीआई लगाई गई थी।
विभाग ने आरटीआई का जवाब दिया तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए।
पहले डिग्री ली फिर विभाग से परमिशन
आरटीआई में मिले दस्तावेजों की पड़ताल में सामने आया कि कई इंजीनियर्स ने डिस्टेंस एजुकेशन से बीटेक/बीई की डिग्री पहले ही कर ली थी। इसके बाद उन्होंने विभाग से डिग्री के लिए परमिशन मांगी।

ये बंशीधर पुरोहित के दस्तावेज हैं। उन्होंने एग्जाम 2014 में दिया, जबकि विभाग से डिग्री की अनुमति 2016 में मांगी।
ज्यादातर की डिग्री लुधियाना व उदयपुर के इंस्टीट्यूट से
आरटीआई के जवाब में पता चला कि ज्यादातर कर्मचारियों ने 2011 से लेकर 2015 के बीच में पंजाब के लुधियाना के द इंस्टीटयूशन ऑफ सिविल इंजीनियर्स (इंडिया) व उदयपुर की जेआरएन राजस्थान विद्यापीठ (डीम्ड) यूनिवर्सिटी से डिस्टेंस एजुकेशन में डिग्री ली थी।
इनमें से ज्यादातर अब अधिशासी अभियंता (एक्सईन) से लेकर मुख्य अभियंता के पदों पर कार्यरत हैं। 15 कर्मचारियों ने लुधियाना और 7 कर्मचारियों ने उदयपुर के इंस्टीट्यूट से डिग्री ली थी।
एक ने कर्नाटक स्टेट ओपन यूनिवर्सिटी से डिग्री ली थी। बाकी 7 कर्मचारियों के आरटीआई में दस्तावेज नहीं उपलब्ध कराए गए।
लुधियाना से डिग्री : द इंस्टीटयूशन ऑफ सिविल इंजीनियर्स (इंडिया) से कमलेश जैमन ने 2016 में, राधाकिशन जाट ने 2015 में, पूर्णिमा यादव ने 2016 में, सुबोध माथुर ने 2016 में, बंशीधर पुरोहित ने 2016 में, सुभाषचंद बंसल ने 2013 में, ओमप्रकाश साहू ने 2012 में डिस्टेंस एजुकेशन से बीटेक की डिग्री ली थी।
इसी तरह सुनील व्यास ने 2014 में, राजेंद्र स्वामी ने 2010, करमचंद अरोड़ा ने 2012 में, रामप्रसाद मीणा ने 2012 में, सूर्यप्रकाश संचेती ने 2014 में, पवन कुमार बंसल 2013 में, अखैराम ने 2014 में, रविंद्र जैन ने 2012 में बीटेक की डिग्री ली थी। तब ये सभी डिप्लोमाधारी सहायक अभियंता के पद पर कार्यरत थे।
उदयपुर से डिग्री : उदयपुर की जेआरएन राजस्थान विद्यापीठ (डीम्ड) यूनिवर्सिटी से रमेश कुमार शर्मा ने 2012 में ली डिग्री ली थी। जिसके आधार पर वे एक्सईएन बन गए थे। फिर एडिशनल चीफ इंजीनियर के पद से रिटायर हुए थे।
रिटायर होने के बाद भी सरकार ने एक साल का एक्सटेंशन भी दिया था। इसी तरह जेआरएन राजस्थान विद्यापीठ (डीम्ड) यूनिवर्सिटी से महेंद्र सिंह ने 2013, नरेंद्र गुप्ता, मनोज शर्मा, महेश शर्मा ने 2014, दुर्गाप्रसाद ने 2015 और महेंद्र कुमार समधानी ने 2016 में इंजीनियरिंग की डिग्री प्राप्त की।
कर्नाटक स्टेट ओपन यूनिवर्सिटी : आलोक श्रीवास्तव ने कर्नाटक स्टेट ओपन यूनिवर्सिटी से 2014 में डिग्री ली थी।
एक ही डेट में अलग-अलग सेमेस्टर किए पास
कई मामले तो ऐसे सामने आए है, जिनमें इंजीनियर्स ने एक ही डेट में अलग-अलग सेमेस्टर पास कर लिए गए। उदाहरण के लिए महेंद्र सिंह ने तीसरा और चौथा सेमेस्टर अप्रैल 2011 में क्लियर किया। इस तरह नरेंद्र कुमार का भी डॉक्यूमेंट है।

एक कर्मचारी नरेंद्र कुमार गुप्ता की मार्कशीट में सातवें और आठवें सेमेस्टर की एक ही तारीख है- 17 अक्टूबर 2014
15 के बजाय 5 साल में प्रमोशन के लिए ली थी डिस्टेंस से डिग्री
सहायक अभियंता से अधिशासी अभियंता के पद पर पदोन्नति के लिए डिप्लोमाधारी को 15 साल और डिग्रीधारी को केवल 5 साल के अनुभव की ही जरूरत होती है। ऐसे में जल्दी प्रमोशन लेने के लिए कर्मचारी डिप्लोमा से नौकरी लगने के बाद डिग्री लेने के प्रयास में जुट जाते हैं।
- डिप्लोमा से नौकरी लगने के बाद पहले कनिष्ठ अभियंता का पद मिलता है।
- कनिष्ठ अभियंता के पद पर कम से कम 10 साल के अनुभव के बाद सहायक अभियंता के पद पर पदोन्नति मिलती है।
- अगर डिप्लोमा है तो सहायक अभियंता से अधिशासी अभियंता के पद पर पहुंचने के लिए 15 साल का अनुभव चाहिए होता है। वहीं अगर डिग्री कर लेते हैं तो उन्हें 15 साल की जगह पर केवल 5 साल के अनुभव पर ही पदोन्नति मिल जाती है।

इधर, पांच साल का अनुभव न होने पर भी प्रमोशन
आरटीआई में दिए जवाब से पता चला है कि 2019 में स्वायत्त शासन विभाग की प्रमोशन को लेकर एक मीटिंग हुई। मीटिंग में डिप्लोमाधारी के लिए 15 साल व डिग्रीधारी के लिए 5 साल का अनुभव प्रमोशन का आधार माना गया।
वहीं, मीटिंग में डिप्लोमाधारी सहायक अभियंताओं के सर्विस के एक तिहाई भाग को भी डिग्री के अनुभव के रूप में जोड़े जाने का निर्णय लिया गया, जबकि ऐसा कोई नियम नहीं है।
डिप्लाेमा के एक तिहाई अनुभव को आसान शब्दों में इस तरह समझ सकते हैं कि… एक डिप्लाेमाधारी कर्मचारी 3 साल से काम कर रहा है तो उसका एक तिहाई यानी 1 साल का कार्य अनुभव जोड़ा जाएगा।
इस तरह डिप्लोमा का अनुभव जोड़कर कई कर्मचारियों को पांच साल के अनुभव से पहले ही प्रमोट कर दिया गया।
जैसे…
- सूर्यप्रकाश संचेती 2012–13 से पहले जेईएन थे। अगस्त 2014 में डिग्री करने के बाद एईएन के पद पर आए। इसके बाद डिस्टेंस एजुकेशन की डिग्री के आधार पर 3 साल 7 महीने के अनुभव के आधार पर 2018–19 में एक्सईएन बन गए थे।
- इसी तरह सुनील व्यास 2012–13 से पहले जेईएन कनिष्ठ अभियंता थे। प्रमोशन लेकर एईएन बन गए। फिर डिस्टेंस एजुकेशन की डिग्री से महज 4 साल के अनुभव के आधार पर एक्सईएन बन गए।
- सुभाषचंद बंसल 2009–10 में एईएन बने थे। सितम्बर 2013 में डिग्री करने के बाद 4 साल 6 महीने में प्रमोशन लेकर एक्सईएन बन गए।
- करमचंद अरोड़ा 2009–10 में एईएन बने थे। सितम्बर 2013 में डिस्टेंस एजुकेशन से डिग्री ली। साल 2018-19 में डिप्लोमा का एक तिहाई और डिग्री का अनुभव जोड़कर 5 साल और 1 महीने का अनुभव मान लिया और प्रमोशन दे दिया।
- महेंद्र सिंह 2010–11 में जेईएन से एईएन के पद पर प्रमोट हुए थे। अप्रैल 2013 में डिग्री ली। डिग्री लेने के 4 साल 11 महीने बाद एक्सईएन के पद पर प्रमोशन।
- पुरुषोतम कुमार जैन 2010–11 में कनिष्ठ अभियंता से सहायक अभियंता के पद पर प्रमोट हुए। सितम्बर 2014 में डिग्री ली। डिग्री के 3 साल 6 महीने बाद प्रमोशन।
- रविंद्र कुमार जैन 2012–13 में एएईएन बने थे। फरवरी 2013 में डिग्री ली। डिप्लोमा और डिग्री का अनुभव जोड़कर 5 साल 4 महीने का एक्सपीरियंस मानकर प्रमोशन दे दिया।
- ओमप्रकाश साहू 2012–13 में एएईएन बने थे। फरवरी 2013 में डिस्टेंस एजुकेशन से डिग्री ली। डिग्री के बाद भी पांच साल का अनुभव नहीं हुआ तो डिप्लोमा के 11 महीने का एक्सपीरियंस भी जोड़ दिया। इस तरह कुल अनुभव 5 साल और 4 महीने मानकर प्रमोशन दे दिया गया।
- पवन कुमार बंसल 2012–13 में एईएन बने थे। सितंबर 2013 में डिग्री ली थी। डिग्री के बाद भी 4 साल 6 महीने का ही अनुभव हो रहा था। ऐसे में डिप्लोमा का अनुभव भी जोड़कर 5 साल का एक्सपीरियंस मानकर प्रमोशन दे दिया।

लिस्ट में शामिल कर्मचारियों में अरुणेश कुमार शर्मा के अलावा अन्य सभी के प्रमोशन में नियमों की अवहेलना की गई थी।
डिस्टेंस से पढ़ने के लिए विभाग ने दी थी अनुमति
आरटीआई के जवाब से ये भी पता चलता है कि इन कर्मचारियों ने डिस्टेंस एजुकेशन से बीटेक/बीई की डिग्री करने के लिए स्वायत्त शासन विभाग से अनुमति मांगी थी। विभाग ने कुछ शर्तों के साथ अनुमति दी थी…
- विभाग ने कहा कि परीक्षा के अलावा कोई अवकाश स्वीकृत नहीं होगा। परीक्षा की तैयारी के लिए कोई अवकाश नहीं मिलेगा। अध्ययन का समय कार्यालय के पश्चात का ही होगा।
- अध्ययन के दौरान उपस्थिति कम होने पर सरकार व विभाग की कोई जिम्मेदारी नहीं होगी। प्रशासनिक कारणों से अध्ययन स्वीकृति बिना किसी पूर्व सूचना के समाप्त हो सकती है।
- दिलचस्प है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले और अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद के अनुसार किसी भी विश्वविद्यालय व डीम्ड विश्वविद्यालय से डिस्टेंस एजुकेशन के माध्यम से बीटेक/बीई की डिग्री को अमान्य माना है।

डिस्टेंस एजुकेशन के लिए अनुमति मांगी गई थी। विभाग की ओर से अनुमति जारी भी कर दी गई थी।
इधर, पंचायतीराज विभाग ने 6 जेईईन का प्रमोशन रोका
30 मई 2013 में पंचायतीराज विभाग के 6 कनिष्ठ अभियंताओं ने डिस्टेंस एजुकेशन से डिग्री लेकर वरिष्ठता सूची में नाम जुड़वा लिया था। लेकिन अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद के 7 जनवरी 2015 के लेटर जारी किया।
लेटर में लिखा था कि किसी भी विश्वविद्यालय व डीम्ड विश्वविद्यालय से दूरस्थ शिक्षा के माध्यम से बीटेक/बीई की डिग्री को अखिल अमान्य माना जाएगा।
लेटर मिलने के बाद 20 जुलाई 2015 के आदेश में एईईन के पद के लिए वरिष्ठता सूची से भवानीशंकर, खातूराम नीनामा, इंद्राज मीणा, कमलेश कुमार मीणा, रोबिन चौहान एवं ऊषा व्यास सहित 6 कर्मचारियों का प्रमोशन रोक दिया गया था।

सुप्रीम कोर्ट ने फैसले में डिस्टेंस एजुकेशन से ली गई टेक्निकल डिग्री को अमान्य मानते हुए यूनिवर्सिटी को फीस वापस करने काे कहा। साथ ही 2001-2005 के बाद भी सभी डिग्रियों को अमान्य माना।
सुप्रीम कोर्ट का डिस्टेंस की टेक्निकल डिग्री पर हुआ था फैसला
सुप्रीम कोर्ट के पास उड़ीसा लिफ्ट इरीगेशन कॉर्पोरेशन बनाम रविशंकर पात्रों सहित करीब 40 से ज्यादा लोगों के मामले में डिस्टेंस एजुकेशन से टेक्निकल एजुकेशन की डिग्री को लेकर याचिका लगी थी।
उड़ीसा हाईकोर्ट ने इन टेक्निकल डिग्रियों को सही माना तथा रविशंकर पात्रों को पदोन्नति के लिए सही माना। वहीं पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने करतार सिंह बनाम पंजाब राज्य की पीआईएल में डिस्टेंस एजुकेशन से टेक्निकल एजुकेशन की डिग्रियों पर सवाल उठाया।
इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने 40 याचिकाओं पर सुनवाई की। कोर्ट ने फैसले में कहा- जिन छात्रों ने डिस्टेंस एजुकेशन में तकनीकी शिक्षा से जो डिग्री ली है, उन्हें तत्काल रद्द किया जाता है। ऐसे कर्मचारियों और लोगों के प्रमोशन व अन्य लाभ को वापस लेने का आदेश दिया है।
एक एग्जाम कराने का भी आदेश
आदेश में कहा कि 2001 से 2005 के बीच यूजीसी ने इन डीम्ड यूनिवर्सिटी को कोर्स चलाने की अनुमति दी थी। ऐसे में वर्ष 2001 और 2005 के बीच में डिस्टेंस से टेक्निकल डिग्री लेने वाले लोगों के लिए एक परीक्षा कराई जाएगी।
जिसे पास करने वाले लोगों की डिग्री मान्य होंगी। वहीं, 2005 के बाद की जारी की गई डिस्टेंस की टेक्निकल डिग्री मान्य नहीं होंगी। अगर इन डिग्रियों के आधार पर किसी ने कोई प्रमोशन व अन्य लाभ लिए हैं तो वे तुरंत प्रभाव से वापस ले लिए जाएंगे।

डिग्री कैसे जारी हो रही, पता नहीं
भास्कर ने पक्ष जानने के लिए जेआरएन यूनिवर्सिटी के पीएस केके शर्मा से बात की। उनका कहना था डिग्री कैसे जारी हो रही है, मुझे कुछ पता नहीं है। आप रजिस्ट्रार तरूण से बात कीजिए।
इसके बाद रजिस्ट्रार तरुण श्रीमाली से बात की। उनका कहना था- 2017 के बाद से हमने ऐसी कोई डिग्री जारी नहीं की है। जिन डिग्री की बात कर रहे हैं, आप उन्हें मेल करा दीजिए या फिर यूनिवर्सिटी आ जाएं।
फोन पर पूरा मामला समझाना मुश्किल है। डिस्टेंस एजुकेशन को जो देखते हैं, उनसे बात कर सकते हैं।

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