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राजस्थान क्राइम फाइल पार्ट-1 में आपने पढ़ा कि 11 नवंबर, 2018 की रात 8 बजे सिरोही स्थित शांतिनगर के संघ कार्यालय में साधु अवधेशानन्द की लाश मिली थी। साथ ही इसी घटना में जिला प्रचारक उत्तमगिरी बुरी तरह घायल था।

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अवधेनानन्द के सिर, चेहरे, गर्दन, कान, हाथ, सीने पर 30 से 40 गहरे घाव थे। घटना की एफआईआर 12 नवंबर, 2018 को दर्ज हुई। पुलिस को तफ्तीश में सामने आया कि रंजिश के कारण उत्तमगिरी ने अवधेशानन्द को मारा है।

उत्तमगिरी ने अवधेशानन्द को साजिश के तहत हत्या के लिए ही संघ कार्यालय में बुलाया था। पुलिस ने उत्तमगिरी को गिरफ्तार कर लिया, लेकिन उत्तमगिरी खुद को निर्दोष बता रहा था।

अब पुलिस को पता करना था कि आखिर दोनों के बीच रंजिश किस बात को लेकर थी और हत्या में क्या केवल उत्तमगिरी ही शामिल था?

अब पढ़िए आगे की कहानी…

अवधेशानन्द के सिर, चेहरे, गर्दन, कान, हाथ, सीने सहित कई अंगों पर 30 से 40 गहरे घाव थे।

अवधेशानन्द के सिर, चेहरे, गर्दन, कान, हाथ, सीने सहित कई अंगों पर 30 से 40 गहरे घाव थे।

पुलिस मृतक अवधेशानन्द और आरोपी उत्तमगिरी के बीच रंजिश की परतें खोलने में जुटी हुई थी। पुलिस ने वापस घटना के दिन को स्कैन किया।

जांच के दौरान पूछताछ में पता चला कि घटना के दिन अवधेशानन्द ने अपने मिलने वालों को बताया था कि 11 नवंबर, 2018 को उन्हें सिरोही के शांतिनगर स्थित संघ कार्यालय जाना है। तब वागाराम उनके साथ था।

वागाराम ने बताया कि वह अवधेशानन्द के साथ संघ कार्यालय गया था। उत्तमगिरी वहां पहले से ही मौजूद था। कुछ देर बाद ही अवधेशानन्द और उत्तमगिरी के बीच झगड़ा शुरू हो गया।

उत्तमगिरी ने अवधेशानन्द को मारना शुरू कर दिया। वागाराम ने छुड़वाने की प्रयास किया, लेकिन दोनों के बीच मारपीट बढ़ती जा रही थी। वह दोनों का झगड़ा खत्म कराने के लिए बाहर से लोगों को बुलाने भी गए, लेकिन लोग आने को तैयार नहीं थे।

वागाराम से पूछताछ में विवाद की पुष्टि हो गई थी। इसके बाद विवाद की जड़ तक पहुंचने के लिए पुलिस ने अवधेशानन्द और उत्तमगिरी के दर्जनों नजदीकी लोगों से पूछताछ की।

पूछताछ में दो बातों का जिक्र आया ‘शाखा’ और ‘रामकथा’। अब पुलिस के सामने रंजिश की परतें खुलती जा रही थीं।

पुलिस को उत्तमगिरी पर शक था, जबकि वह खुद को निर्दोष बता रहा था।

पुलिस को उत्तमगिरी पर शक था, जबकि वह खुद को निर्दोष बता रहा था।

ये था दोनों की रंजिश का कारण

पुलिस जांच में पता चला कि सिरोही में 23 अक्टूबर से 30 अक्टूबर, 2018 के बीच रामकथा चल रही थी। कथा की पूरी व्यवस्था अवधेशानन्द ही कर रहे थे। राम कथा का वाचन करने वाली ‘दीदीमां’ से 25 अक्टूबर को उत्तमगिरी को भी मिलना था।

उत्तमगिरी को मिलवाने की व्यवस्था अवधेशानन्द को ही करनी थी। व्यस्तता के कारण अवधेशानन्द यह व्यवस्था नहीं करवा पाए। इससे उत्तमगिरी नाराज चल रहा था।

वॉट्सऐप चैट में भी उत्तमगिरी ने इसे लेकर नाराजगी जताई थी। अवधेशानन्द ने वह मैसेज भी नजदीकी कुछ साथियों को दिखाए, जिसमें उन्हें धमकी दी गई थीं। अवधेशानन्द ने वॉट्सऐप चैट में भी कुछ नजदीकियों को कहा था कि उनकी जान को खतरा है।

2018 में ही अवधेशानन्द ने शाखा लगानी शुरू की। पुलिस को यह भी पता चला कि शाखा लगाने को लेकर भी कुछ लोगों की नाराजगी थी।

4 नवंबर, 2018 को शाखा लगाने को लेकर भी आपत्ति की गई। अवधेशानन्द को संघ कार्यालय बुलाया गया। अनहोनी की आशंका के चलते वे नहीं गए। वाॅट्सऐप पर मैसेज भी चलाए गए कि अवधेशानन्द जो शाखा चला रहे हैं, वे संघ की आधिकारिक शाखा नहीं है।

पुलिस की पूछताछ में सामने आया कि साधु अवधेशानन्द और उत्तमगिरी के बीच झगड़ा हो गया था। दोनों के बीच विवाद के 2 कारण थे। -इमेज AI जनरेटेड

पुलिस की पूछताछ में सामने आया कि साधु अवधेशानन्द और उत्तमगिरी के बीच झगड़ा हो गया था। दोनों के बीच विवाद के 2 कारण थे। -इमेज AI जनरेटेड

बाएं हाथ में रखे चाकू ने भी खोल दी पोल

अवधेशानन्द के चचेरे भाई सर्वेश शर्मा ने पुलिस को बताया कि उत्तमगिरी के बुलाने पर संघ कार्यालय में वागाराम ही मोटरसाइकिल पर अवधेशानन्द को लाया था। मारपीट से घबराकर वागाराम मौके से भाग गया।

सर्वेश ने पुलिस को एक अहम जानकारी दी कि अवधेशानन्द खाना खाने से लेकर लिखने तक सभी काम दाहिने हाथ से ही करते थे। वहीं फोटो में अवधेशानन्द के शव के बाएं हाथ में चाकू रखा दिखाई दे रहा था।

पुलिस ने कई पुराने फोटो देखे। उन फोटो से तय हो गया कि अवधेशानन्द राइट हैंड ही इस्तेमाल करते थे। मतलब साफ था कि अवधेशानन्द की हत्या के बाद जानबूझकर चाकू को उनके हाथ में रखा गया, जिससे पुलिस जांच को गुमराह किया जा सके।

11 नवंबर 2018 को घटना वाली रात मर्डर की सूचना पर पुलिस सिरोही में संघ कार्यालय में पहुंची।

11 नवंबर 2018 को घटना वाली रात मर्डर की सूचना पर पुलिस सिरोही में संघ कार्यालय में पहुंची।

झगड़े के दौरान बाहर से संघ कार्यालय में कोई नहीं आया

आरोपी उत्तमगिरी ने कहा था कि उसने अवधेशानन्द के साथ मारपीट नहीं की। घटना के समय बाहर से लोग आए थे, जिन्होंने मृतक के साथ मारपीट की थी।

आरोपी ने कहा था कि 4-5 लोगों ने मिलकर मेरे और अवधेशानन्द के साथ मारपीट की थी। इसी मारपीट में वह घायल हो गया और अवधेशानन्द की मौत हो गई।

पुलिस की तफ्तीश और पड़ोसियों से पूछताछ में आरोपी उत्तमगिरी की यह बात गलत साबित हुई कि संघ कार्यालय में अवधेशानन्द को मारने के लिए कोई बाहर से लोग आए थे।

उत्तमगिरी के शरीर पर घावों को लेकर भी डॉक्टरों की रिपोर्ट ने पुलिस को चौंका दिया। रिपोर्ट के अनुसार, शरीर पर कुछ घाव ऐसे थे, जिन्हें देखकर लग रहा था कि झगड़े के दौरान लगे हों।

वहीं कुछ घाव देखकर पता चल रहा था कि ये घाव खुद आरोपी पर अपने शरीर पर बना सकता है। पुलिस ने माना कि आरोपी ने खुद शरीर पर घाव बनाए ताकि पुलिस को गुमराह किया जा सके।

अवधेशानन्द की हत्या की रात पूरे सिरोही में सनसनी फैल गई थी। अवधेशानन्द की हत्या के बाद लोगों में नाराजगी भी थी।

अवधेशानन्द की हत्या की रात पूरे सिरोही में सनसनी फैल गई थी। अवधेशानन्द की हत्या के बाद लोगों में नाराजगी भी थी।

कोर्ट ने आरोपी को सुनाई उम्रकैद

हाल ही जून में कोर्ट ने इस मामले में उत्तमगिरी को उम्रकैद सुनाई। कोर्ट ने माना कि घटनास्थल पर मौजूद परिस्थितियों से निष्कर्ष निकलता है कि अभियुक्त उत्तमगिरी ने ही अवधेशानन्द की हत्या की है।

संघ कार्यालय में घटना के दौरान बाहर से कोई नहीं आया, जो दोनों के आपसी झगड़े में शामिल हुआ हो। अभियुक्त उत्तमगिरी और मृतक अवधेशानन्द की घटना से पहले फोन पर बातचीत हुई।

उत्तमगिरी और अवधेशानन्द के बीच संघ की शाखा लगाने, रामकथा चलने के समय आपसी विवाद होना प्रमाणित होता है। अभियुक्त ने निर्मम हत्या की है और नरमी का रुख नहीं अपनाया जा सकता।

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