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जयपुर में टोल प्लाजा पर पूर्व मंत्री राजेंद्र गुढ़ा ने जलवा दिखा दिया। टोल का बैरियर उठाया और 8-10 गाड़ियां बिना टोल निकाल दी। कोटा में ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर ने एक स्कूली बच्चे को अपने मोबाइल नंबर दिए और टीचर की क्लास लगा दी। उदयपुर में पुलिस ने चाकूबाजी करने वाले बदमाशों का वो हाल किया कि कुत्ते भौंकने लगे। राजस्थान की राजनीति और ब्यूरोक्रेसी की ऐसी ही खरी-खरी बातें पढ़िए, आज के एपिसोड में…

1. स्टूडेंट के सामने टीचर की लगी क्लास

कोटा के ईदलपुरा गांव में मनमौजी मास्टरजी की बात मंत्रीजी तक पहुंच ही गई। स्कूल का टाइम 7.30 बजे का। मास्टरजी आ रहे हैं 8 बजे। आए तो आए, नहीं आए तो नहीं आए। रोज-रोज की बात हो गई। बच्चे परेशान।

हालत ये स्कूल से मलबा, ईंट-पत्थर भी उठा-उठाकर घर ले जाने के आरोप लग गए। पूरा गांव मास्टरजी से परेशान। बच्चों को क्या ही सिखाएंगे, क्या ही पढ़ाएंगे।

अब गांव में बिजली वाले मंत्रीजी की चौपाल लगी। गांव वालों के साथ स्कूल के बच्चे भी पहुंच गए। पंक्ति में आगे जाकर बैठ गए। मंत्रीजी के सामने बच्चों का हौसला बढ़ा। शिकायत हो गई।

मास्टरजी को मंत्रीजी ने कटघरे में खड़ा किया। मास्टरजी ने बच्चे को ही गवाह बनाने की कोशिश की। बच्चा मुकर गया। मास्टरजी फंस गए। मंत्रीजी ने बच्चे से कहा- मास्टरजी समय पर नहीं आएं तो मुझे सीधे फोन करके बताना।

बच्चा भी चतुर। जेब से तुरंत मोबाइल निकाल लिया। मंत्रीजी ने नंबर लिखवाया। पास बैठे अफसर ने मोबाइल में नंबर सेव किया। मंत्रीजी ने मास्टरजी को तड़ी (डांट-फटकार) लगाई- अब कल बच्चे की पिटाई मत कर देना। ठहाका गूंज उठा।

कोटा के ईदलपुरा गांव में जनसुनवाई के दौरान ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर के सामने टीचर की स्टूडेंट ने पोल खोल दी।

कोटा के ईदलपुरा गांव में जनसुनवाई के दौरान ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर के सामने टीचर की स्टूडेंट ने पोल खोल दी।

2. पूर्व मंत्रीजी ने बिना टोल निकाल दीं गाड़ियां

लाल डायरी वाले पूर्व मंत्रीजी का एक वीडियो खूब घूम रहा है। ये जहां जाते हैं, वहां कुछ न कुछ अलग वाकया हो ही जाता है। जयपुर से कार में सीकर के लिए निकले थे। चौमूं के टाटियावास टोल पर जाम में फंस गए। आगे-पीछे गाड़ियों का रेला।

धीरे-धीरे गाड़ियां पास हो रही थीं। पूर्व मंत्रीजी करें भी तो क्या? कार को हेलिकॉप्टर तो बना नहीं सकते। चुपचाप बैठे रहे। कुछ देर में एंबुलेंस के सायरन की आवाज सुनी। एंबुलेंस पता नहीं आ रही थी या जा रही थी।

टोल वाले एंबुलेंस को अलग से निकालने की व्यवस्था करते, इससे पहले ही पूर्व मंत्री कार से निकले और टोल बैरियर उठाकर गाड़ियां निकालने लगे।

अपने आगे वाली सारी गाड़ियां बिना टोल के पूर्व मंत्री ने निकाल दी। उनकी गाड़ी भी जाम से बाहर आ गई। पूर्व मंत्री की चतुराई भरी ‘समाजसेवा’ के वो लोग कायल हो गए, जो बिना टोल दिए निकल पड़े थे।

चौमूं (जयपुर) के टाटियावास टोल पर पूर्व मंत्री राजेंद्र गुढ़ा बैरियर को उठाकर कार निकालते हुए।

चौमूं (जयपुर) के टाटियावास टोल पर पूर्व मंत्री राजेंद्र गुढ़ा बैरियर को उठाकर कार निकालते हुए।

3. बदमाशों को सिर मूंडकर परेड निकाली तो भौंके कुत्ते

वे झीलों के शहर में सड़क पर घूम-घूमकर चना मसाला बेचते थे। घूमते-घूमते उन्हें अचानक महसूस हुआ कि इलाके में उनकी दहशत नहीं है। वे दो थे।

उन्होंने माना कि चना मसाला बेचकर इलाके में उनकी दहशत कायम नहीं हो सकती। उन्हें चाकूबाजी करने का आइडिया आया। जैसे ही आइडिया आया। उन्होंने इसे अप्लाई कर दिया।

एक युवक पर दिनदहाड़े चाकू से ताबड़तोड़ हमला कर दिया। हमले के बाद दोनों को इत्मीनान हुआ कि अब इलाके में उनका इकबाल बुलंद हो जाएगा। लोग डरकर उनका चना खरीदने टूट पड़ेंगे।

लेकिन ऐसा नहीं हुआ। उल्टे पुलिस उनके पीछे लग गई। पुलिस ने उन्हें दबोच लिया। फिर गुंडागर्दी का सिर मूंड दिया गया। अपराध की टांग तोड़ दी गई। दोनों को 2 किलोमीटर पैदल चलाया।

चना बेचने वालों को गंजा और लंगड़ाकर चलते देख कुत्ते भी नहीं पहचान पाए। जिस गली से पुलिस ने निकाला उसी में कुत्तों ने भौंक-भौंक कर मोहल्ला जुटा लिया।

उदयपुर में युवक पर चाकू से हमला करने वाले आरोपियों को पुलिस ने मौका तस्दीक कराई। इस दौरान दोनों बदमाश लंगड़ाकर चलते देखे गए।

उदयपुर में युवक पर चाकू से हमला करने वाले आरोपियों को पुलिस ने मौका तस्दीक कराई। इस दौरान दोनों बदमाश लंगड़ाकर चलते देखे गए।

4. चलते-चलते…

शिक्षा मंत्रीजी ग्रामीण सेवा शिविर में पहुंच गए थे। सरकारी कार्यक्रम का समय सुबह 9.30 बजे थे। मंत्रीजी 10 बजे पहुंच गए थे। उस वक्त कुर्सियां खाली थीं। सरकारी कार्यक्रमों में 1 घंटे की देरी तो ईमानदारी की होती है। मंत्रीजी आधे घंटे पहले पहुंचकर बेइमानी की।

इससे पहले मंत्रीजी स्कूल में पहुंच गए थे। स्कूल में गणित के मास्टरजी क्लास में मोबाइल चलाते दिखे थे। मंत्रीजी ने सारे टीचर्स का फोन झपट लिया था। मास्टर साब पर पढ़ाई के अलावा 70 कामों का लोड रहता है।

कब कौनसे नए काम का फरमान ऊपर से आ जाए, कोई भरोसा नहीं। इसलिए फोन चेक करते रहते हैं। फोन चेक करना भी बड़ा गुनाह नहीं।

मंत्रीजी परेशान। कहां जाएं? जहां जाकर कार्रवाई करते हैं वहीं से कोई तर्क निकल आता है। अबकी बार व्यवस्थाएं चेक करने कोटा के दशहरा मेला में पहुंच गए। निगाहें चौकस और चौकन्नी। कोई खामी मिले और समझो लगी आयोजकों की क्लास।

मंत्रीजी ने चाट चखी। चाट का स्वाद लाजवाब। मंत्रीजी ने चना चखा। चना चटपटा। मंत्रीजी नाव वाला झूला झूले। मौज आ गई। मेले से मंत्रीजी बिना शिकायत लौटे।

कोटा के दशहरा मेला में झूला झूलते शिक्षा मंत्री मदन दिलावर।

कोटा के दशहरा मेला में झूला झूलते शिक्षा मंत्री मदन दिलावर।

वीडियो देखने के लिए ऊपर फोटो पर क्लिक करें। अब कल मुलाकात होगी…



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