राजनीति में चरित्र पर लगे दाग मुश्किल से धुलते हैं। कई के ‘क्लीन चिट’ के बाद भी नहीं धुल पाते। बाड़मेर वाले पूर्व विधायकजी की कांग्रेस में वापसी हुई। इस खुशी में किसी ने शहरभर में उनके ‘कांड’ वाले पोस्टर लगा दिए। टोंक में डिप्टी सीएम साहब को रोडवेज बस के कंडक्टर ने नहीं पहचाना। गुस्ताखी का ज्ञान हुआ तो पैर पकड़ लिए। पूर्व मुख्य सचिव महोदय की जमीन चुनाव में खिसकी थी, अब दबा ली गई है। राजस्थान की राजनीति और ब्यूरोक्रेसी की ऐसी ही खरी-खरी बातें पढ़िए, आज के एपिसोड में…
1. ‘वीडियो’ वाले नेताजी की वापसी के बाद पोस्टरबाजी
बाड़मेर वाले पूर्व विधायकजी 2 साल पहले भावना में बह गए थे। कमरे में छुपे कैमरे नहीं देख पाए। नतीजा यह रहा कि 33 मिनट के वीडियो ने उनसे पार्टी का पटका छीन लिया।
मामले में क्लीनचिट मिली तो बड़ी मुरादों के बाद पार्टी में वापसी हुई। रातों-रात उनके ‘कांड’ वाले पोस्टर बाड़मेर की गली-गली में चस्पा हो गए।
पोस्टर पर जिला कांग्रेस कमेटी बाड़मेर-बालोतरा-जैसलमेर लिखा था। अब आपसी खींचतान मची है। नेताजी का कहना है कि क्लीनचिट के बाद भी क्यों टॉर्चर कर रहे हो भाई।
अब कुछ दाग ऐसे हैं, जो क्लीनचिट से भी नहीं धुलते। बाकी कुछ दिन पहले विधानसभा में लगे 2 खास कैमरों को लेकर विपक्ष ने आवाज बुलंद की थी। सावधानी ही बचाव है।

बाड़मेर शहर में जगह-जगह कांग्रेस नेता मेवाराम जैन के कथित ‘वीडियो कांड’ वाले पोस्टर लगा दिए गए। इन पर जिला कांग्रेस कमेटी लिखा था। पोस्टरों को उतार दिया गया।
2. डिप्टी सीएम साहब बस में चढ़े, कंडक्टर पहचान नहीं पाया
राजनीति में चाल और चरित्र के साथ चेहरा भी मायने रखता है। डिप्टी सीएम साहब ट्रांसपोर्ट मिनिस्टर हैं। इसी नाते टोंक के रोडवेज डिपो में घुसे थे।
व्यवस्थाएं देखी। टॉयलेट चेक किए। अधिकारियों-कर्मचारियों की क्लास ली। डिपो में कचरा देखा तो खुद झाड़ू उठाकर सफाई कर डाली।
इसके बाद एक रोडवेज बस में चढ़ गए। डिप्टी सीएम के साथ भीड़ चढ़ी। कंडक्टर टिकट काट रहा था। साहब ने सीधे सवाल किया- कितनी सवारियां हैं?
कंडक्टर नेताजी का मुंह ताकने लगा। उसे पता ही नहीं कि सामने खड़े महाशय सूबे के उप मुख्यमंत्री तो हैं ही, ट्रांसपोर्ट मंत्री भी हैं।
इससे पहले कि वो साहब का टिकट काट देता, किसी ने याद दिलाया-डिप्टी सीएम साहब हैं। फिर क्या था, कंडक्टर ने तुरंत पैर पकड़कर नौकरी बचाई।

टोंक में रोडवेज बस के कंडक्टर ने डिप्टी सीएम प्रेमचंद बैरवा को नहीं पहचाना। जब उन्हें बताया कि उप मुख्यमंत्री महोदय हैं तो पैर छू लिए।
3. पूर्व मुख्य सचिव की जमीन पर कब्जा, छुड़ा नहीं पा रहे
पूर्व मुख्य सचिव निरंजन आर्य की जमीन पर कब्जा हो गया। जयपुर में भरी सभा में साहब ने दर्दभरी कहानी सुना दी। बोले- मेरे गांव में मेरे दादाजी की जमीन थी।
कुछ लोगों ने 100-50 रुपए में ली थी। फिर कब्जा कर लिया। 40 साल से जमीन पर कब्जा है। मैं 5 जिलों में कलेक्टर रहा। मुख्य सचिव रहा। लेकिन जमीन नहीं छुड़ा पाया।
सालभर से कोशिश कर रहा हूं। जमीन से कब्जा नहीं हट पाया। इन्हीं साहब को पूर्व मुखिया से नजदीकी का इनाम मिला था। सोजत से विधानसभा का टिकट मिला था।
साहब वहां 30 हजार वोटों से हारे थे। सोशल मीडिया पर एक वोटर ने लिखा- अफसर रहते आपने जनता के काम नहीं किए थे। अब साहब ने खुद ही जवाब दे दिया-मैं तो खुद के काम भी नहीं करा पाया।

जयपुर में पूर्व मुख्य सचिव निरंजन आर्य ने अपनी पीड़ा सुनाई। कहा कि 40 साल से जमीन पर कब्जा है। 5 जिलों का कलेक्टर और सीएस रहने के बावजूद कब्जा नहीं छुड़ा पा रहा हूं।
4. चलते-चलते..
भरतपुर में पूर्व सरपंच साहब ठगी करते पकड़े गए। ट्रक वालों से उगाही कर रहे थे। खुद को सेल टैक्स अफसर बता रहे थे। ट्रक वालों ने घेर लिया। वीडियो बनाने लगे तो हवाइयां उड़ने लगी।
ट्रक वाले हावी हुए तो एकाध दोस्त पुलिस वालों को फोन मिलाया। फिर सच्चाई बयां कर दी। बोला- पूर्व सरपंच हूं। इन साहब की माताजी मौजूदा सरपंच हैं। बेटा जी पार्ट-टाइम जॉब पर निकले थे।
बात सेवर थाना तक पहुंची तो 151 में पकड़कर जज के सामने पेश कर दिया। वहां से जमानत पर छूट गए। ट्रक वालों ने ‘ठगा’ सा महसूस किया।
पुलिस का रवैया समझ से परे। जरूर साहब के सिर पर किसी का हाथ है। गुस्से में ट्रक वाले सेवर थाने पहुंचे और ठगी की FIR दर्ज करा डाली।

भरतपुर में ट्रक वालों से ठगी करने वाले को ड्राइवरों ने दबोच लिया। वीडियो बनाने लगे। आरोपी युवक बोला कि वह पूर्व सरपंच है। आरोपी के खिलाफ ट्रक वालों ने FIR दर्ज कराई है।
वीडियो देखने के लिए ऊपर फोटो पर क्लिक करें। अब मंगलवार को मुलाकात होगी…
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