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कोटा उत्तर से विधायक और पूर्व मंत्री शांति धारीवाल ने कोचिंग के लिए लाए जा रहे बिल को लेकर विधानसभा में सरकार को जमकर घेरा। धारीवाल ने प्रवर समिति की ओर से किए गए संशोधन को लीपापोती कर बिल के मूल विषय को ही दूर कर दिए जाने की बात रखी।
धारीवाल ने कहा कि मुख्य रूप से यह बिल इसलिए लाया गया था कि कोचिंग इंस्टीट्यूट में पढ़ने वाले छात्र आत्महत्या कर रहे हैं, उस पर रोक लगे। इसका कोई प्रभावी प्रावधान इस बिल में नहीं था, इसलिए इसे प्रवर समिति को भेजा गया था। प्रवर समिति ने जो संशोधन किए हैं, यह संशोधन तो बिना प्रवर समिति के ही सदन में हो सकते थे।
ऐसे प्रावधान लाएं जिससे सुसाइड रुकें
उन्होंने कहा कि 50 की जगह 100 छात्र कर दिए और जुर्माने की राशि, 2 लाख की जगह 50 हजार और 5 लाख की जगह 2 लाख कर दी। क्या इसलिए यह बिल भेजा था? यह तो कोरी लीपापोती का काम है। उन्होंने कहा कि छात्रों की संख्या घटा-बढ़ा दी, जुर्माने की राशि कम कर दी। इससे आत्महत्या रुक जाएगी क्या? सदन की यह मंशा थी कि इस बिल से ऐसे प्रावधान किए जाएं, जिससे आत्महत्याओं पर रोक लग सके।
काउंसलिंग होने चाहिए कि बच्चा प्रेशर झेल पाएगा या नहीं
धारीवाल ने बयान जारी कर कहा कि मूल बात यह है कि एडमिशन से पहले ही छात्रों की काउंसलिंग होनी चाहिए कि वह बच्चा जिस कोर्स में एडमिशन ले रहा है उसका प्रेशर झेल भी पाएगा या नहीं, अफसोस है कि ऐसा कोई प्रावधान इस बिल में नहीं हैं। सुप्रीम कोर्ट की जो गाइडलाइन थी उस पर तो विचार तक नहीं किया। आप तो इस बिल के जरिए केवल कोचिंग संस्थानों पर अपना कंट्रोल करना चाहते हैं।
काउंसलर और साइक्लॉजिस्ट सपोर्ट के लिए धारा 14 में प्रावधान किया है जिसमें जिला समिति को अधिकृत किया है। यह जिला समिति क्या करेगी? कुछ नहीं करेगी। समिति का चेयरमैन जिला मजिस्ट्रेट है, उसको अपने काम से ही फुरसत नहीं हैं। कोटा में एक कलेक्टर आया था, वो कोचिंग सेंटर वालों को और छात्रों को भाषण देकर चला जाता था, लेकिन हर महीने आत्महत्या होती रहीं।
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