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कोटा संभाग के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल, एमबीएस हॉस्पिटल में न्यूरोसर्जरी विभाग की टीम ने एक जटिल और दुर्लभ ऑपरेशन सफलतापूर्वक कर चिकित्सा इतिहास में नई उपलब्धि दर्ज की है।
मरीज 74 वर्षीय चतुरभुज पुत्र गोपाल, निवासी बडोद, जिला कोटा, पिछले दो महीनों से तेज सिरदर्द और उलझी हुई बातों से परेशान थे। प्रारंभिक उपचार बडोद अस्पताल में हुआ, लेकिन लाभ न मिलने पर उन्हें एमबीएस हॉस्पिटल रेफर किया गया। यहाँ विभागाध्यक्ष डॉ. एस. एन. गौतम और उनकी टीम ने मरीज की विस्तृत जांच की। एमआरआई और सीटी एंजियोग्राफी में मस्तिष्क की बेसिलर आर्टरी के टॉप में एन्यूरिज्म पाया गया।
इसके बाद 8 सितंबर को डीएसए (डिजिटल सब्स्ट्रैक्शन एंजियोग्राफी) की गई, जिससे एन्यूरिज्म की संरचना स्पष्ट हुई। विशेषज्ञों ने मरीज का एंडोवास्कुलर कॉइलिंग द्वारा इलाज करने का निर्णय लिया। जांघ की धमनी से यह प्रक्रिया पूरी की गई, जिसमें किसी प्रकार का चीरा नहीं लगाया गया। यह तकनीक हाड़ौती क्षेत्र में पहली बार अपनाई गई और पूरी तरह सफल रही।
इस जटिल शल्यक्रिया में डॉ. गौतम के साथ डॉ. दिलीप महेश्वरी, डॉ. भारत भूषण, डॉ. धरमराज मीणा, डॉ. बनेश जैन, डॉ. राजेश एवं डॉ. आशीष मोर शामिल रहे। वहीं एनेस्थीसिया टीम का नेतृत्व डॉ. अर्चना त्रिपाठी और डॉ. शिलपी जैन ने किया। ऑपरेशन के बाद मरीज को न्यूरोसर्जरी आईसीयू में रखा गया और एक यूनिट रक्त चढ़ाया गया। वर्तमान में उनकी स्थिति स्थिर है।
मरीज और परिजनों ने चिकित्सकों एवं अस्पताल प्रशासन का आभार व्यक्त किया। उल्लेखनीय है कि यह पूरा उपचार निशुल्क किया गया। इस सफलता ने साबित किया है कि कोटा एमबीएस अस्पताल अब अत्याधुनिक और जीवनरक्षक सुविधाओं से सुसज्जित है, जिससे मरीजों को बड़े महानगरों का रुख करने की आवश्यकता नहीं रही।
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