![]()
कोटा के अभेडा बायोलॉजिकल पार्क में लगातार वन्यजीवों की कमी खलती जा रही है। मादा शेरनी सुहासिनी बायोलॉजिकल पार्क में पहले से ही एकाकी जीवन जी रही है। वही टाइगर नाहर की मौत के बाद टाइग्रेस महक भी अब एकाकी जीवन की रही है। बायोलॉजिकल पार्क में नए मेहमान
डीएफओ (वन्य जीव विभाग) कोटा अनुराग भटनागर ने बताया कि जबतक नाहर साथ था तब तक दोनों की बॉडी लैंग्वेज अलग ही दिखती थी। नाहर की मौत के बाद से महक अवसाद में दिखती है। हमें मेल फीमेल दोनों चाहिए। हम लगातार लेटर लिख रहे है। नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क में बाघ के नन्हे शावक (नर-मादा) है। उन्हें मैच्योर होने में 6 से 8 महीने ओर लग जाएंगे। जैसे दोनों मैच्योर होंगे उन्हें कोटा लाया जा सकेगा।
बायोलॉजिकल पार्क में बब्बर शेर की भी जरूरत है। राजस्थान के किसी भी बायोलॉजिकल पार्क में बब्बर शेर नहीं जिसे कोटा शिफ्ट किया जा सकें। हमें गुजरात से ही प्रयास करना होगा। उसके लिए भी हम लगातार लेटर लिख रहे है। अकेले रहने से शेरनी सुहासिनी भी बॉडी लैंग्वेज से अवसाद में दिखती है।
Discover more from Kuchaman City Directory
Subscribe to get the latest posts sent to your email.
Comments