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कोटा शहरवासियों को आवारा पशुओं से निजात दिलाने के लिए पूर्व सरकार के समय स्थापित की गई देवनारायण आवासीय योजना अब अस्तित्व संकट से जूझ रही है। योजना की बदहाल व्यवस्था को लेकर पशुपालकों ने कड़ी नाराजगी जताई है।
संभागीय अध्यक्ष महेश गुर्जर ने बताया कि प्रशासन और नेताओं ने कॉलोनी बनवाने का वादा तो किया था, मगर यहां न तो पानी की पर्याप्त सुविधा है और न ही बिजली, स्कूल, सफाई या पशुओं के लिए चारे की व्यवस्था।
पशुपालकों का कहना है कि जब वे शहर में आते हैं तो प्रशासन चालान काट देता है और जब योजना में रहते हैं तो वहां सुविधाओं के अभाव में परेशान रहते हैं। सबसे गंभीर समस्या पानी की है, वहीं गोबर का भुगतान भी 21 महीने से अटका हुआ है। बायोगैस प्लांट और स्कूल का विस्तार भी ठप पड़ा है। सुरक्षा दीवार टूट चुकी है और कॉलोनी के अंदर लाइट व्यवस्था भी अधूरी है।
पशुपालकों का कहना है कि अगर जल्द समस्याएं हल नहीं हुईं तो KDA की अनदेखी के कारण कोटा का स्मार्ट सिटी सपना टूटकर “मवेशी शहर” बन जाएगा।
पशुपालकों की मुख्य समस्याएं
पानी की गंभीर समस्या – 4 ब्लॉकों में से सिर्फ 2 ब्लॉकों को भी पर्याप्त पानी नहीं। गोबर प्लांट से भुगतान 21 महीने से लंबित। बायोगैस से घरेलू गैस सुविधा नहीं मिल रही। स्कूल विस्तार नहीं होने से बच्चों की पढ़ाई 7वीं के बाद बंद। सुरक्षा दीवार जर्जर, लाइट पोल अधूरे। भूसा गोदाम निर्माण का वादा अधूरा।
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