राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने कहा- दुनिया का ऐसा कोई विषय नहीं है, जिसका प्रथम लिखित प्रमाण भारतीय ग्रंथों में उपलब्ध नहीं हो। भारतीय ज्ञान संपदा सर्वाधिक समृद्ध और विपुल है। जरूरत है खुद को समर्थ और सक्षम बनाते हुए इस संपदा का सदुपयोग करने की।
राज्यपाल ने कहा- भारतीय वेदों में प्रत्येक विषय अंकित है। हजारों साल पहले अगस्त्य ऋषि ने बिजली उत्पादन के बारे में उल्लेख कर दिया था। महर्षि भारद्वाज ने विमान शास्त्र पुस्तक में विमान निर्माण का वर्णन किया।
इसी पुस्तक से प्रेरित होकर महाराष्ट्र के एक इंजीनियर ने 1895 में विमान बनाया और उसे उड़ाकर भी दिखाया था, लेकिन तत्कालीन अंग्रेज सरकार ने उसे ध्वस्त कर ऐसी गतिविधियों पर प्रतिबंध लगा दिया था। ऋग्वेद में खगोल शास्त्र का वर्णन मिलता है। आर्यभट्ट महान खगोल शास्त्री हुए।
उन्होंने कहा- भास्कराचार्य ने 1150 ई में बता दिया था कि पृथ्वी सूर्य के चारों ओर चक्कर लगाती है। इतना ही नहीं उन्होंने परिक्रमा में लगने वाले समय का सटीक आकलन तक कर दिया था।
राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े गुरुवार को उदयपुर में मोहनलाल सुखाड़िया यूनिवर्सिटी के बप्पा रावल सभागार में आयोजित स्मृति व्याख्यान-2025 में अपने संबोधन में ये बातें कही।

हमारे ग्रंथों का लाभ विदेशियों ने उठाया राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने कहा- भारत 1000 सालों तक आत्मसम्मान और स्वतंत्रता के लिए लड़ता रहा। इसलिए इन ग्रंथों में वर्णित तथ्यों पर शोध कार्य प्रभावित हुए। इसी का लाभ उठाकर विदेशी विद्वानों ने हमारी ही ज्ञान संपदा का उपयोग कर बहुत आविष्कार किए।
राज्यपाल बागड़े ने कहा- भारत वास्तुकला, साहित्य से लेकर हर क्षेत्र में समृद्ध रहा है। पाश्चात्य विद्वान मैक्समूलर ने स्वयं लिखा है कि भारत में दो पुस्तकों रामायण और महाभारत का व्यापक प्रभाव है और यह प्रभाव कोई 500-700 सालों का नहीं हजारों हजार सालों का है।
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राज्यपाल बोले-खिलजी ने नालंदा यूनिवर्सिटी को जला दिया था:उसे हरामखोर कहें तो गलत नहीं होगा; किताबें जलाईं, हमारा दिमाग नहीं

राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने नालंदा विश्वविद्यालय को जलाने वाले तुर्क आक्रांता मोहम्मद बख्तियार खिलजी पर टिप्पणी की है। राज्यपाल ने कहा- उसे हम हरामखोर (मोहम्मद बख्तियार खिलजी) कहें तो गलत हरकत नहीं होगी। (पढ़ें पूरी खबर)
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