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‘कचहरी’ के नाम से जनता के मन-मानस में बरसों से न्याय का मंदिर रहा हाईकोर्ट अब हाईटेक राह पर बढ़ चुका है। डिजिटलाइजेशन, टेक्नोलॉजी, एप, वेबसाइट, वीसी से सुनवाई आदि के इस्तेमाल से पूरा फोकस है कि न्याय शीघ्र और सुगम हो। राजस्थान हाईकोर्ट केसेज के निस्त
फरियादी, वकील, पक्षकार को बिना चक्कर काटे सुनवाई की तारीख, ऑर्डर कॉपी आदि ऑनलाइन उपलब्ध हैं। कॉज लिस्ट लाइव है ताकि सुनवाई का रियल टाइम पता लगे। तारीखें अब ज्यादा लंबी नहीं चलतीं। इसकी सूचना एसएमएस से मिल जाती हैं। सम्मन तामील में गड़बड़ियां रोकने को नियत स्थल पर रियल टाइम फोटो, जियो टैगिंग का सिस्टम बन गया है। मानवीय आधार पर भी ध्यान दिया गया है। ऑर्डर कॉपी भी शीघ्र ही वेबसाइट पर अपलोड हो रही हैं। किसी भी निर्णय की डिजिटल कॉपी और हिंदी में आदेश की कॉपी कुछ क्लिक्स पर उपलब्ध हैं।
इन 12 तरीकों ने बदली तारीख पर तारीख वाली छवि
1. सम्मन तामील की जियो टैगिंग
हाईकोर्ट एवं लोअर कोर्ट के सम्मन इत्यादि की तामीलों के लिए जाने वाले कर्मचारी के मोबाइल में एप ‘’त्वरित’’ होता है। जीपीएस के जरिए नियत जगह पहुंचना पता चलता है। उन्हें वहां सम्मन तामील या चस्पां करते की फोटो को जियो टैगिंग, टाइम के साथ ‘’त्वरित’’ एप द्वारा अपलोड करना होता है।
2. पेपरलेस ई मॉड्यूल
हाईकोर्ट को पेपरलेस बनाने के लिए डीएमएस (डॉक्यूमेंट मैनेजमेंट सिस्टम) सॉफ्टवेयर डवपल किया गया है। इसमें न्यायाधीश को स्क्रीन पर केस से जुड़े दस्तावेज दिखते हैं। वकील भी पैरवी में दस्तावेजों के लिए टैब या मोबाइल काम लेते हैं। संपूर्ण कार्यवाही बिना किसी कागज के ई मोड पर होती है।
3. रोजाना 60 हजार तक एसएमएस
कोर्ट में दायर होने वाले केस एवं सुनवाई की तारीख आदि सूचना के लिए संबंधित पक्षकार एवं वकील को एसएमएस जाते हैं। हाईकोर्ट से रोजाना तकरीबन 50 से 60 हजार एसएमएस भेजे जाते हैं। लोअर कोर्ट्स में भी एसएमएस काम लिए जाते हैं।
4. हाईकोर्ट-जिला कोर्ट वीसी कनेक्ट
हाईकोर्ट सभी निचले कोर्ट से वीसी द्वारा कनेक्ट हैं। इससे हाईकोर्ट द्वारा जिला न्यायालयों की पेंडेंसी इत्यादि की मॉनिटरिंग की जाती है। इससे मामलों के निस्तारण में टारगेट तय करते हुए जल्द से जल्द न्याय निर्णय सुनिश्चित किया जा सकता है।
5. ई फाइलिंग सेंटर से हो रही केस की ई फाइलिंग
केस की ई फाइलिंग को सबके लिए संभव करने के लिए हाईकोर्ट व डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में सेंट्रलाइज्ड ई फाइलिंग सेंटर खोले गए हैं। इनसे केस की ई फाइलिंग निशुल्क की जा सकती है। वहीं ई सुविधा केंद्र हाईकोर्ट में हैं। यहां पर निर्धारित व नॉमिनल शुल्क पर फाइलिंग, डॉक्यूमेंट अपलोड़, स्कैनिंग आदि सुविधाएं उपलब्ध करवाई हैं।
6. लाइव कॉज लिस्ट से सुविधा हुई
कॉज लिस्ट लाइव कर दी हैं। वेबसाइट और एप द्वारा रियल टाइम में इसे देखा जा सकता है। इससे संबंधित पक्षकार एवं वकील को अपने केस का संभावित समय भी पता चल जाता है।
7. निर्णय हिंदी में भी उपलब्ध :
केस से संबंधित पक्षकार उसे आसानी और विस्तार से जान सकें इसलिए इन्हें हिंदी में भी अनुवादित किया गया है। पूर्व में दिए हाईकोर्ट के निर्णयों को हिंदी में ट्रांसलेट कर वेबसाइट एवं एप पर उपलब्ध करवाया गया है।
8. हाईकोर्ट का मोबाइल एप और यू-ट्यूब चैनल भी
हाईकोर्ट और केस से संबंधी सुविधाओं के लिए मार्च 2025 में राजस्थान हाईकोर्ट मोबाइल एप का अपडेटेड वर्शन आया। इसमें आम आदमी भी एप से आसानी से हाईकोर्ट की सुविधाओं का लाभ ले सकता है। यू-ट्यूब चैनल पर न्यायाधीशों का शपथ ग्रहण आदि कार्यक्रम लाइव टेलीकास्ट होते हैं।
9. पेंडिंग केस निपटान मैकेनिज्म
केसेज की पेंडेंसी मिटाने इन्हें 0 से 5 साल, 5-10, 10-20 और 20 से 30 साल की श्रेणी में विभाजित कर शीघ्र निस्तारण पर फोकस करते हैं। क्रिटिकल केस जैसे- पॉक्सो, महिलाओं संबंधी, बुजुर्गों से संबंधी, बच्चों के केस, गंभीरतम अपराध केसेज पर प्राथमिकता रहती है।
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