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लोकसभा चुनाव से ठीक पहले राज्य सरकार ने सात बड़ी राजनीतिक नियुक्तियां की थी। करीब सवा साल बाद शुक्रवार को यकायक पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अरूण चतुर्वेदी को एक बड़ा राजनीतिक पद दे दिया गया। उन्हें राज्य वित्त आयोग का अध्यक्ष बना दिया गया। इससे प्रदेश में एक
पूर्व मंत्री राजेंद्र राठौड़, हरियाणा के प्रभारी एवं पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनियां, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अशोक परनामी, पूर्व केंद्रीय मंत्री लालचंद कटारिया, ज्योति मिर्धा, महेंद्रजीत सिंह मालवीया और मानवेंद्र सिंह जसोल जैसे कई बड़े चेहरे हैं जिन्हें राजनीतिक नियुक्तियों का इंतजार है।
बीस सूत्री कार्यक्रम क्रियान्वयन समिति के उपाध्यक्ष, आरटीडीसी के अध्यक्ष, आवासन मंडल, बीज निगम अध्यक्ष जैसे कई बड़े राजनीतिक पद हैं, जिन पर कई बड़े नेताओं की नजर है। उधर, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा इस सप्ताह में दूसरी बार दिल्ली गए हैं। ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि आने वाले दिनों में और भी राजनीतिक नियुक्तियां हो सकती है। अब तक नियुक्तियां किसान आयोग अध्यक्ष : पूर्व केंद्रीय मंत्री सीआर चौधरी। जीव जंतु कल्याण बोर्ड अध्यक्ष : पूर्व सांसद जसवंत विश्नोई। देवनारायण बोर्ड अध्यक्ष : ओम प्रकाश भडाणा। सैनिक कल्याण बोर्ड अध्यक्ष : पूर्व विधायक प्रेम सिंह बाजौर। श्रीयादे माटी कला बोर्ड : प्रहलाद राय टांक। विश्वकर्मा कौशल विकास बोर्ड : रामगोपाल सुथार। राजस्थान राज्य अनुसूचित जाति वित्त और विकास आयोग के अध्यक्ष : पूर्व आईएएस राजेंद्र नायक।
दूसरी पार्टियों से आए नेता भी कतार में साल 2023 के विधानसभा चुनाव और फिर 2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के कई दिग्गज नेताओं ने पाला बदल लिया. इन दिग्गजों के पाला बदलते ही कांग्रेस से बीजेपी में आने वाले नेताओं की लाइन लग गई थी। अब सत्ताधारी दल के सामने इन्हें एडजस्ट करना चुनौती है। इनमें कई नेताओं को चुनाव में टिकट भी दिया गया, लेकिन हार हुई. अब निगाहें आयोग या बोर्ड में पदों पर है। इसे लेकर नेताओं को राजनीतिक नियुक्ति का इंतजार है।
बीजेपी संगठन में जयपुर से लेकर दिल्ली तक सुगबुगाहट भी है। दरअसल, भजनलाल सरकार बनने के 17 महीनों के बाद भी ये नेता सक्रिय भागीदारी नहीं निभा रहे हैं। ना संगठन में जिम्मा और ना ही पार्टी के अभियानों में इनकी सहभागिता देखी गई है। अंदरखाने कहा तो यह भी जा रहा है कि इनमें से कई नेता अभी भाजपा प्रदेश मुख्यालय तक लगातार आते हैं, लेकिन कुछ ऐसे भी हैं, जो सदस्यता ग्रहण करने के बाद एक दिन भी पार्टी कार्यालय नहीं आए।
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