आज बात खरी है में पढ़िए- विधानसभा के अंदर और बाहर क्यों हो रहा है CCTV को लेकर हंगामा। जग्गा जासूस की टोपियां पहनकर क्यों आए विपक्ष के नेता। कौन नेता भारत में चाहता है नेपाल वाली क्रांति। राजस्थान की राजनीति और ब्यूरोक्रेसी की खरी-खरी सुनिए…
1. माननीयों को कैमरों से डर लगता है
विधानसभा में दो दिन खूब हंगामा मचा। नेता प्रतिपक्ष ने कहा- सारे कैमरे विपक्ष की तरफ ही घुमा रखे हैं। दिन-रात हमारी मॉनिटरिंग चल रही है। निजता भी कोई चीज है कि नहीं। इस पर माननीय मुख्य सचेतक ने पिन चुभोई। कहा- यहां कोई बेडरूम-बाथरूम नहीं है, जो निजता का हनन हो रहा है। इस पर खूब हो-हल्ला मचा।
विपक्ष के सीनियर नेता ने आवाज उठाई- वो तो ठीक है। लेकिन मान लो हम लोग आपस में किसी भी तरह की बात करें। घर की बात करें। भेद की बात करें। कर ही नहीं सकते। हमारे ऊपर कैमरे चमकते रहते हैं। इस पर सिविल लाइंस वाले विधायकजी ने जमकर चुटकी ले ली। आलाप लेकर कहा- निजता का हनन तो बहाना है। सदन में पैर दबवाए जाते हैं। इसी को छुपाना है। फिर क्या था। विपक्ष बाहर निकला और लगा ली जग्गा जासूस वाली टोपी।

विधानसभा के बाहर विपक्ष के नेताओं ने जग्गा जासूस की टोपी लगाई और जमकर नारेबाजी की।
2. नेताजी नेपाल के बहाने क्या कहना चाहते हो?
नेताजी ताजा-ताजा लाइम लाइट में आए हैं। एक अधिकारी को चांटा मारकर चौड़े हो गए। फिर सरकार के खिलाफ अपने इलाके से बाहर जाकर धरना-प्रदर्शन की कोशिश की तो धर लिए गए। अभी जेल से छूटे ही हैं कि फिर वही तीखे तेवर दिख रहे हैं। झुंझुनूं में नेताजी एक कार्यक्रम में पहुंचे। अपने समर्थन में युवाओं की लहर देख फूले नहीं समाए।
बस, यहीं बैठकर पत्रकारों के सामने देश के हालात पर चिंता जताने लगे। बोले- देखो नेपाल में क्या हो रहा है। वहां की जनता जाग गई है। क्रांति कर तख्ते पलटे जा रहे हैं। भारत और राजस्थान में सरकार नाम की चीज नहीं। जनता गुस्से में है। राजस्थान में हम जैसे कुछ लड़ाके नेता लड़ रहे हैं। नेताजी के दिन-मान ठीक नहीं चल रहे। मुकदमों पर मुकदमे हो रहे हैं। कौन समझाए, राजनीति में मारपीट के अलावा भी बहुत कुछ होता है।

टोंक के नेता नरेश मीणा को हाल ही में जमानत मिली है। झुंझुनूं में एक प्रोग्राम में पहुंचे तो नेपाल क्रांति की बात कर दी।
3. बंदर ने देह त्याग दी तो लोगों ने कराया मुंडन
इंसान के पुरखे बंदर थे। ऐसा साइंस का दावा है। बंदर भी भांति-भांति के होते हैं। सीकर में बंदरों का आतंक है। खूब उत्पात मचा रहे हैं। कहीं चढ़ गए। कुछ बिखेर दिया। चीजें उठा ले गए। छतों पर ऊधम मचा दी। एक माताजी को तो हाथ पर लबूर (नोच) लिया। सीकर वाले हाय-तौबा मचाए हुए हैं। इन बंदरों का क्या इलाज करें। बंदर और क्या करेगा? यही आतंक फैलाएगा। कुत्तों के समर्थन में आए फैसले के बाद पशुओं के खिलाफ आवाज उठाने वालों के हौसले वैसे ही पस्त हैं।
अब चित्तौड़गढ़ के बंदर की बात सुनाता हूं। बंदर महाराज भदेसर के धीरजी का खेड़ा गांव के मंदिर में डेरा डाले हुए थे। संत की तरह रहते। बच्चों की तरफ कभी उचक कर लपके नहीं। कोई ऊधम-अपराध नहीं। जो मिला खा लिया। नहीं तो डाल पर सो रहे। दो साल तक बंदरजी की संत-वृत्ति देख लोगों में श्रद्धा पैदा हो गई। उन्हें कुछ भी अर्पित कर लोग समझते कि भगवान को भोग लगा दिया। अब श्राद्ध पक्ष के पहले दिन बंदर महाराज सिधार गए। फिर क्या। हर कोई रोया। 11 लोगों ने मुंडन करा लिया। डोल निकला। गाजे-बाजे के साथ अंतिम सफर निकला। धन्य हो। सीकर के वानरों को इनकी जीवनी से कुछ सीखना चाहिए।

चित्तौड़गढ़ में बंदर की मौत के बाद पूरे गांव ने मिलकर विधि-विधान से अंतिम संस्कार किया। बंदर को संत की तरह विदाई दी गई।
4. चलते-चलते
अजमेर के आदर्शनगर थाना इलाके में चोरों ने धावा बोल दिया। लगता है चोर रोजगार की तलाश में निकले थे। जिस बाइक पर आए थे उसे छोड़ ई-रिक्शा ले भागे। दिन के उजाले में बाइक की नंबर प्लेट पर लोगों की नजर गई तो उस पर पुलिस लिखा था। चोरों को भनक लग गई होगी कि गलत दुपहिया उठा लाए।
एक मंदिर का गेट तोड़कर साथ ले गए। लगता है कि जनता को मैसेज देना चाहते हैं- सुनो बांगड़ुओं पुलिस तो चोरी-चकारी रोक नहीं पाएगी। तुम निर्बाध रूप से भगवान की शरण में जाकर चोरियां रुकने की अरदास करते रहो। बड़ा चैलेंज दे रहे हैं। अब पुलिस अपने मिशन पर लगे तो मजा आए।

अजमेर में चोर इसी बाइक पर आए थे। यह बाइक छोड़कर वे ई-रिक्शा और मंदिर का गेट चुरा ले गए।
वीडियो देखने के लिए ऊपर फोटो पर क्लिक करें। अब कल मुलाकात होगी…
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