राजस्थान कांग्रेस ने पार्टी से निकाले गए 6 नेताओं की वापसी करवाई है। इनमें पूर्व विधायक मेवाराम जैन जैसे कई नेता हैं, जो रेप के आरोप में फंसे थे। किसी ने बागी तेवर दिखाकर पार्टी को चुनाव हरवाया तो किसी को पार्टी आदेश नहीं मानने के चलते कांग्रेस ने पा
अब इनकी वापसी ने सियासी सरगर्मियां बढ़ा दी है। कुछ नेताओं का वापसी पर विरोध हो रहा है। कई नेता और समर्थक नए सियासी संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं।
कौन से नेता के पार्टी जॉइन कराने के क्या सियासी मायने हैं? कौन से खेमों के नेताओं की वापसी संभव हो पाई है? कहां-कहां गुटबाजी खुलकर सामने आ रही है? मंडे स्पेशल स्टोरी में पढ़िए…
6 साल के लिए निष्कासित, कुछ महीने में ही घर वापसी AICC के राजस्थान प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा ने PCC चीफ गोविंदसिंह डोटासरा को पत्र भेजकर मेवाराम जैन, बालेंदू सिंह शेखावत, संदीप शर्मा, बलराम यादव, अरविंद डामोर और तेजपाल मिर्धा का पूर्व में किया गया निष्कासन रद्द करने का आदेश दिया था। इसके बाद प्रदेश मुख्यालय ने भी इन सभी की घर वापसी का आदेश जारी कर दिया था।
जिन नेताओं की वापसी हुई, उनमें गहलोत के करीबी मेवारााम जैन जैसे नेता भी शामिल हैं। सचिन पायलट खेमे के माने जाने वाले तेजपाल मिर्धा का भी नाम है। सियासी जानकारों का कहना है कि इससे पार्टी ने दोनों नेताओं को साधने का काम किया है।

1. मेवाराम जैन : रेप केस में फंसे, टिकट मिला तो चुनाव हारे, अब डेढ साल बाद वापसी करीब 2 साल पहले बाड़मेर के पूर्व विधायक मेवाराम जैन के खिलाफ जोधपुर के राजीव नगर थाने में एक विवाहित ने रेप की रिपोर्ट दर्ज करवाई थी। इसके बाद उनके अश्लील वीडियो वायरल होने पर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने 5-6 जनवरी 2024 की रात 12 बजे पार्टी से निलंबित कर दिया था। इसमें उन्होंने लिखा था- मेवाराम के अनैतिक कार्य से स्पष्ट होता है कि उन्होंने कांग्रेस के संविधान के खिलाफ आचरण किया है।
मेवाराम जैन साल 2008 में विधानसभा का पहला चुनाव लड़े और लगातार तीन चुनाव जीते। इससे पहले वो नगर पालिका बाड़मेर में 1998 से 2003 तक अध्यक्ष भी रहे थे। 2 साल पहले हुए विधानसभा चुनाव में वो कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़े, मगर 13,337 वोट से हार गए थे।

मेवाराम जैन ने पोस्टरों को खुद के खिलाफ साजिश बताया था।
वापसी क्यों और कौन कर रहे विरोध? मेवाराम जैन पूर्व सीएम गहलोत के करीबी नेता माने जाते हैं। अब उनकी कांग्रेस में वापसी के पीछे भी सबसे बड़ा रोल भी उन्हीं का माना जा रहा हैं। पार्टी में वापसी के बाद 27 सितंबर को मेवाराम जैन के बाड़मेर पहुंचने से पहले पोस्टर विवाद शुरू हो गया। बाड़मेर, बायतु और बालोतरा में जगह-जगह मेवाराम जैन के कथित अश्लील फोटो के होर्डिंग-पोस्टर जिला कांग्रेस कमेटी बाड़मेर, जैसलमेर और बालोतरा के नाम से लगा कर उनकी वापसी का विरोध जताया गया था।
इसके बाद बालोतरा जिला कांग्रेस कमेटी के पदाधिकारियों ने लिखित में बयान जारी कर कहा कि इन पोस्टरों से जिला कांग्रेस कमेटी का कोई संबंध नहीं है। जिला कांग्रेस कमेटी बाड़मेर, जैसलमेर और बालोतरा से जोड़कर इसे न देखा जाए। यह बाहरी और अज्ञात व्यक्तियों की करतूत है, जिसका उद्देश्य केवल कांग्रेस पार्टी और संगठन को बदनाम करना है। जिला कांग्रेस के नाम का दुरुपयोग कर संगठन को बदनाम करने वाले अज्ञात व्यक्तियों के विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

इसके बाद जैन ने 27 सितंबर को बताया कि जिस कारण से मुझे पार्टी से निकाला, इसको लेकर मेरे से पूछा नहीं गया। न ही मुझे नोटिस दिया गया। मेरे ऊपर जो आरोप लगे, उसमें पुलिस ने एफआर दे दी, कोर्ट ने स्वीकृत कर ली हैं।
अब निष्कासन रद्द हुआ तो कुछ नेता और उनके समर्थक मुझे टॉर्चर कर विचलित और कमजोर करने का प्रयास कर रहे हैं। लेकिन इससे मुझ पर कोई फर्क पड़ने वाला नहीं है। मेरे विरोधियों को डर है कि मैं कहीं फिर एमएलए न बन जाऊं, जबकि मैं तो मंत्री तक नहीं रहा, विरोधियों की पहुंच दिल्ली तक है। दबी जुबान में जैन के विरोध के पीछे पूर्व सांसद व पूर्व मंत्री हरीश चौधरी समर्थकों का हाथ बताया जा रहा है।
2. बालेंदु सिंह शेखावत : पार्टी विरोधी गतिविधियों का आरोप लगा था शेखावाटी से कांग्रेस के दिग्गज नेता और पूर्व विधानसभा स्पीकर दीपेंद्र सिंह शेखावत के बेटे और पीसीसी के पूर्व प्रदेश सचिव बालेंदु सिंह शेखावत को लोकसभा चुनाव से पहले 6 साल के लिए कांग्रेस पार्टी से निकाल दिया गया था। उन पर निलंबन की कार्रवाई जालोर लोकसभा क्षेत्र से तत्कालीन कांग्रेस प्रत्याशी और पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बेटे वैभव गहलोत की शिकायत पर हुई थी। उन्होंने बालेंदु पर पार्टी विरोधी गतिविधियों का आरोप लगाया था।

बालेंदु सिंह शेखावत सचिन पायलट खेमे के नेता माने जाते हैं।
तब बालेंदु सिंह शेखावत ने कहा था कि वो तो 24 अप्रैल को जालोर में अपने पारिवारिक कार्यक्रम में गए हुए थे। मेरा वहां पर चुनाव को लेकर कुछ भी कार्यक्रम नहीं था। वहां से लौटने के बाद उन्हें 6 साल के लिए कांग्रेस से निकाल दिया गया था। उनकी क्यों और कैसी शिकायत हुई है, इसकी उन्हें जानकारी तक नहीं दी गई जबकि, कांग्रेस पार्टी के संविधान के अनुसार उन्हें नोटिस मिलना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। पिछले 25 साल से लगातार पार्टी में पदाधिकारी हूं। एक झटके में बिना कुछ बताए ही कार्रवाई की गई।
वापसी के पीछे कौन, क्या है मैसेज? बालेंदु सिंह पूर्व विधानसभा अध्यक्ष दीपेंद्र सिंह शेखावत के बेटे हैं। पिछले महीने उन्होंने प्रदेश प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा को पत्र लिखा था। इसमें उन्होंने कहा कि उनका निष्कासन एकतरफा कार्रवाई थी। उन्होंने यह भी बताया कि उनकी तीन पीढ़ियां कांग्रेस की समर्पित कार्यकर्ता रही हैं। इसके बाद प्रभारी रंधावा ने उनका निष्कासन रद्द कर दिया और लेटर में लिखा कि राजस्थान के वरिष्ठ नेताओं से विचार-विमर्श के बाद यह फैसला लिया गया है।

एआईसीसी की ओर से जारी पार्टी में वापसी का पत्र।
पूर्व स्पीकर दीपेंद्र सिंह शेखावत सचिन पायलट समर्थक विधायक माने जाते हैं। 2020 में शेखावत ने भी पायलट के साथ गहलोत सरकार के खिलाफ बगावत की थी। ऐसे में बालेंदु सिंह की वापसी को पायलट समर्थकों की जीत के तौर पर देखा जा रहा है।
3. तेजपाल मिर्धा : हनुमान बेनीवाल की शिकायत पर हटाया, अब वापसी बीजेपी की प्रदेश उपाध्यक्ष ज्योति मिर्धा के चचेरे भाई और डेगाना के पूर्व विधायक रिछपाल मिर्धा के भतीजे तेजपाल मिर्धा कुचेरा नगरपालिका के चेयरमैन हैं। उन्होंने खींवसर विधानसभा क्षेत्र से 2023 के विधानसभा चुनाव को कांग्रेस के टिकट पर लड़ा था। वे राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (आरएलपी) के हनुमान बेनीवाल के खिलाफ मैदान में उतरे थे। हालांकि ये चुनाव वो हार गए थे।

तेजपाल मिर्धा रिछपाल मिर्धा के भतीजे हैं।
बेनीवाल ने बीजेपी के साथ गठजोड़ कर 2019 के लोकसभा चुनाव में तब की कांग्रेस प्रत्याशी ज्योति मिर्धा को हराया था, लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस-आरएलपी गठबंधन के तहत बेनीवाल को टिकट मिला। ज्योति मिर्धा ने बीजेपी जॉइन कर बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ा था।
इस चुनाव में तेजपाल ने खुद को गठबंधन प्रत्याशी बेनीवाल के प्रचार से हटा लिया था। इसके बाद बेनीवाल की शिकायत पर अप्रैल 2024 में कांग्रेस ने तेजपाल मिर्धा को 6 साल के लिए कांग्रेस पार्टी से बाहर कर दिया था। निष्कासन के ठीक बाद 12 अप्रैल 2024 को तेजपाल मिर्धा के आह्वान पर कुचेरा नगरपालिका के 21 पार्षदों, 8 पूर्व पार्षदों और 7 पंचायत समिति सदस्यों ने सामूहिक रूप से कांग्रेस की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। 400 से अधिक कार्यकर्ताओं ने त्यागपत्र सौंपे थे।

वापसी के बाद तेजपाल मिर्धा की सोशल मीडिया पर की गई पोस्ट।
वापसी के पीछे कौन, क्या है मैसेज ? तेजपाल मिर्धा लगातार कांग्रेस में वापसी के रास्ते तलाश रहे थे। इधर, हनुमान बेनीवाल ने भी खुद को कांग्रेस गठबंधन से अलग कर लिया था। बदले हालात में तेजपाल मिर्धा को कांग्रेस में वापसी करने में कोई परेशानी नहीं थी।
नागौर में फिलहाल कांग्रेस अपने सबसे कमजोर दौर से गुजर रही है। यहां कांग्रेस का झंडा उठाने वाले ज्यादातर नेता बीजेपी में चले गए हैं। जो बचे हैं, वो हनुमान बेनीवाल की पार्टी आरएलपी से मुकाबला नहीं कर पा रहे हैं। ऐसे में तेजपाल मिर्धा की एंट्री से कांग्रेस यहां फिर से मजबूत होना चाहती है।
4. संदीप शर्मा : रेप के आरोप में फंसे, क्लीनचिट के बाद वापसी चित्तौड़गढ़ नगर परिषद के पूर्व सभापति संदीप शर्मा पर 24 नवंबर 2024 को सभापति कार्यकाल खत्म होने के 4 दिन बाद एक महिला ने दुष्कर्म का मामला दर्ज कराया था। हालांकि इस केस में हाईकोर्ट से स्टे मिलने से उनकी गिरफ्तारी नहीं हो पाई। लेकिन मामला हाई प्रोफाइल होने के चलते प्रदेश कांग्रेस ने 26 मार्च 2025 को शर्मा को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से 6 साल के लिए निष्कासित कर दिया था।

संदीप शर्मा ने वापसी पर कहा है- मामला राजनीतिक दबाव में दर्ज हुआ था और इसमें दम नहीं है, तो कांग्रेस ने निष्कासन वापस ले लिया है।
पुलिस ने मामले में 3 बार जांच करने के बाद हाईकोर्ट में पेश रिपोर्ट में बताया कि यह मामला झूठा है। हाईकोर्ट के निर्देश पर सदर थाना पुलिस ने 11 सितंबर को संबंधित न्यायालय में FR पेश कर दी। इसमें स्पष्ट कहा कि शर्मा के खिलाफ सभी आरोप पुलिस जांच में झूठे पाए गए हैं। इसके बाद से ही शर्मा समर्थक उनकी कांग्रेस में वापसी का इंतजार कर रहे थे।
वापसी के पीछे कौन, क्या है मैसेज ? राजस्थान प्रदेश कांग्रेस की अनुशासन समिति के अध्यक्ष उदयलाल आंजना खुद चित्तौड़गढ़ जिले से आते हैं। ऐसे में शर्मा की वापसी के पीछे भी सबसे बड़ा रोल आंजना का ही समझा जा रहा है। उधर प्रदेश कांग्रेस की अनुशासन समिति की 13 सितंबर को हुई बैठक से दो दिन पहले ही शर्मा को मामले में एफआर मिल गई थी। इससे संदीप शर्मा की वापसी की राह आसान हो गई।

पार्टी में वापसी होने के बाद संदीप शर्मा निंबाहेड़ा पहुंचे। पूर्व सहकारिता मंत्री उदयलाल आंजना से मुलाकात की और उन्हें धन्यवाद दिया।
पार्टी में वापस शामिल होने के बाद निंबाहेड़ा पहुंचने पर संदीप शर्मा ने पूर्व सहकारिता मंत्री उदयलाल आंजना से मुलाकात की और उन्हें धन्यवाद दिया। आंजना ने शर्मा का स्वागत किया और उनके समर्थन में खड़े नजर आए।
5. बलराम यादव : बागी होकर चुनाव लड़ा, पार्टी कैंडिडेट को हरवाया, अब वापसी श्रीमाधोपुर से पीसीसी सदस्य रहे बलराम यादव ने गत विधानसभा चुनावों में सीकर जिले की श्रीमाधोपुर विधानसभा सीट से कांग्रेस के अधिकृत प्रत्याशी रहे दीपेंद्र सिंह शेखावत की खुलकर बगावत की थी। इतना ही नहीं यादव शेखावत के खिलाफ निर्दलीय चुनाव भी लड़ा था। इसी कारण यहां मुकाबला त्रिकोणीय हुआ और शेखावत ये चुनाव बीजेपी के झाबर सिंह खर्रा से हार गए। बलराम यादव इस चुनाव में करीब 41 हजार वोट लेकर तीसरे नंबर पर रहे। जबकि कांग्रेस महज 14 हजार 459 वोटों से यहां हार गई। पार्टी ने विधानसभा चुनावों के दौरान ही यादव को 6 साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया था।

बलराम यादव ने पार्टी से बागी होकर निर्दलीय चुनाव लड़ा था। उनके बढ़ते जनाधार को देखते हुए उनकी वापसी तय हो पाई है।
वापसी के पीछे कौन, क्या है मैसेज? बलराम यादव शेखावाटी के सीकर जिले से आते हैं। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा खुद इस क्षेत्र में अपना प्रभाव रखते हैं। श्रीमाधोपुर सीट पर यादव अच्छा प्रभाव रखते हैं। अपना निलंबन रद्द होने के बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए लिखा था ‘अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी द्वारा मेरी प्राथमिक सदस्यता बहाल कर दी गई है। इस निर्णय के लिए कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे एवं संगठन प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा,पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, प्रदेश अध्यक्ष गोविंदसिंह डोटासरा, सचिन पायलट और टीकाराम जूली एवं शीर्ष नेतृत्व का हृदय से आभार व्यक्त करता हूं। वहीं ये संकल्प लेता हूं कि पहले से भी अधिक ऊर्जा और समर्पण के साथ कांग्रेस पार्टी के सिद्धांतों और संगठन की सेवा करूंगा।’

वापसी के बाद बलराम यादव की सोशल मीडिया पर की गई पोस्ट।
6. अरविंद डामोर : पार्टी के आदेश दरकिनार कर चुनाव में डटे रहे गत लोकसभा चुनाव में कांग्रेस और भारतीय आदिवासी पार्टी के बीच गठबंधन को लेकर अंतिम समय तक कुछ तय नहीं हो पाया था। आखिर में कांग्रेस पार्टी ने बांसवाड़ा लोकसभा सीट पर अरविंद डामोर को तो बागीदौरा विधानसभा सीट पर उपचुनाव के लिए कपूर सिंह को कांग्रेस प्रत्याशी घोषित कर नामांकन करवा दिया था। इसके बाद बदले हालात में कांग्रेस ने बीएपी से गठबंधन के बाद अपने इन दोनों प्रत्याशियों से नाम वापस लेने के लिए दबाव बनाया। लेकिन दोनों ने ही इससे इनकार कर दिया और कांग्रेस सिंबल पर ही चुनाव लड़ने का फैसला कर लिया था।

इसके बाद कांग्रेस आलाकमान के आदेश की अवहेलना पर अरविंद डामोर व कपूर सिंह को 6 साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया गया था। तब डामोर ने कहा था कि कांग्रेस पार्टी ने उनके 17 साल की राजनीति करियर और मां के 40 साल के राजनीतिक करियर दांव पर लगा दिया। इसके बाद उन्होंने ये चुनाव लड़ा और हार गए। डामोर को कांग्रेस के पूर्व मंत्री व हाल में बीजेपी नेता महेंद्र जीत सिंह मालवीय का समर्थक माना जाता था।

तस्वीर विधानसभा चुनाव के दौरान की है, जब अरविंद डामोर ने पार्टी आदेश मानने से इनकार कर दिया था और कहा था- वे कांग्रेस के सिंबल पर ही चुनाव लड़ेंगे।
वापसी के पीछे कौन, क्या हैं मैसेज ? पार्टी से निष्कासित अरविंद डामोर की 16 महीने बाद 27 सितंबर को कांग्रेस में वापसी हुई। उन्हें बांसवाड़ा विधायक अर्जुन बामनिया, जिलाध्यक्ष रमेश पंड्या और कांग्रेस नेता दिनेश खोड़निया ने माला पहनाकर पार्टी की सदस्यता दिलाई। बांसवाड़ा जिले के पार्टी प्रवक्ता इमरान खान पठान ने कहा कि अरविंद और उनके परिवार में कांग्रेस के प्रति किए कार्य, समर्पण को देखते हुए उन्हें दोबारा लिया गया है।
कांग्रेस वागड़ में एक बार फिर अपनी मजबूती के रास्ते तलाश रही है, यही वजह है कि डामोर को फिर से पार्टी में ले लिया गया है। उन्होंने अपनी वापसी का क्रेडिट पीसीसी अध्यक्ष डोटासरा के साथ ही मुख्य रूप से पूर्व स्पीकर और दिग्गज कांग्रेस नेता सीपी जोशी को दिया है।
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