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सुबह करीब 5 बजे का वक्त। सोडाला पुलिस थाने के सीआई सुनील प्रसाद शर्मा रोजाना की तरह सेंट्रल पार्क में मॉर्निंग वॉक कर रहे थे। इसी दौरान उनके मोबाइल पर कॉल आया।

कॉल सिविल लाइंस इलाके के एक सीएलजी मेंबर का था। उन्होंने बताया- एक व्यापारी की गुमशुदगी का मामला है। आप सूरज नगर कॉलोनी आ सकते हैं?

सीआ पार्क से सीधे सिविल लाइंस (पश्चिम) स्थित सूरज नगर कॉलोनी में व्यापारी के घर पहुंचे। वहां मौजूद लोगों ने बताया कि व्यापारी राजकुमार जैन तीन दिनों से लापता है।

बेटे आशीष सबलावत ने बताया कि उसके पिता ने 25 जून को बहन को फोन कर कहा था कि वो किसी के साथ जा रहे हैं। इसके बाद से वे लापता हैं। इस पर पुलिस ने तुरंत राजकुमार जैन की तलाश शुरू की।

व्यापारी राजकुमार जैन 25 जून 2015 को लापता हुए थे।

व्यापारी राजकुमार जैन 25 जून 2015 को लापता हुए थे।

गायब थे कीमती सामान और जरूरी दस्तावेज

आशीष मुंबई में रहता था। उसने पुलिस को बताया कि वह लगातार पिता को कॉल कर रहा था। फोन स्विच ऑफ आ रहा था। 25 जून को पिता से बात नहीं होने पर 26 जून की रात वह जयपुर आ गया था।

आशीष ने बताया- घर पर ताला लगा हुआ था। ताला तोड़ा तो घर के अंदर रखा सामान बिखरा हुआ था। संभाला तो पता चला कि घर में रखा कीमती सामान गायब है।

पिता का एक काले रंग का बैग गायब था। बैग में जरूरी दस्तावेज थे। वहीं एक बैग में ज्वैलरी, एंटीक सामान रहता था, वह भी गायब था। आशीष को पिता के बैंक के लॉकर की चाबियां भी नहीं मिली।

आशीष की सूचना पर उसके अन्य रिश्तेदार भी 27 जून की सुबह जयपुर आ गए। इसके बाद सभी परिजन राजकुमार जैन की तलाश में जुट गए। आस–पड़ोस के अलावा दोस्तों और परिचितों के यहां भी तलाश की गई।

राजकुमार के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली। राजकुमार को लापता हुए 4 दिन हो गए थे। बेटे आशीष ने 29 जून 2015 को सोडाला थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस को किसी अनहोनी की आशंका थी।

घर पर अकेले रहते थे राजकुमार

परिजनों ने पुलिस को बताया कि राजकुमार जैन (70) सिविल लाइंस के सूरज नगर में अकेले रहते थे। वे ही फाइनेंस का काम करते थे। वे 15 साल पहले वे असम में पेट्रोलियम और चाय का व्यवसाय करते थे।

उनकी पत्नी का कुछ समय पहले ही देहांत हो चुका था। उनकी चार बेटियों की शादी हो चुकी थी। बेटा आशीष मुंबई में फिल्म इंडस्ट्री में मॉडलिंग करता था।

उसका प्रोडक्शन हाउस था। एक बेटी मधुबाला का परिवार जयपुर में ही रहता है। मधुबाला ही आते–जाते पिता को संभालती रहती थी।

बेटे आशीष के साथ राजकुमार जैन। आशीष लंबे समय से मुंबई में ही रह रहा था। पिता से उसकी फोन पर बात होती रहती थी।

बेटे आशीष के साथ राजकुमार जैन। आशीष लंबे समय से मुंबई में ही रह रहा था। पिता से उसकी फोन पर बात होती रहती थी।

व्यापारी के मोबाइल पर अनजान व्यक्ति से हुई बात

आशीष ने पुलिस को बताया कि वह रोज पिता को फोन करता था। 25 जून को सुबह दस से 12 बजे के बीच में अंतिम बार पिता से बात की थी। इसी दिन शाम को 4 बजे उनकी कोलकाता में रहने वाली एकता दीदी ने भी पिता को फोन किया।

इस दौरान किसी अन्य व्यक्ति ने फोन रिसीव किया। एकता ने शाम को पांच बजे आशीष को फोन कर इसकी जानकारी दी। इसके बाद आशीष ने कॉल कर पिता से बात करने की कोशिश की।

पहले किसी ने कॉल रिसीव नहीं किया। काफी प्रयास के बाद किसी व्यक्ति ने कॉल रिसीव किया और थोड़ी देर में राजकुमार जैन से बात कराने का कहकर फोन रख दिया।

मोबाइल लोकेशन से नहीं लगा सुराग

पुलिस ने राजकुमार जैन के मोबाइल की लोकेशन निकाली। 25 जून की सुबह 10 से 11 बजे के बीच उनकी लोकेशन न्यू आतिश मार्केट व मानसरोवर के आसपास के इलाके में आई।

इसके बाद से उनका मोबाइल बंद आ रहा था। पुलिस मोबाइल की कॉल डिटेल के आधार पर करीब 40 लोगों से पूछताछ कर चुकी थी। लेकिन राजकुमार जैन का कोई सुराग नहीं मिला।

पुलिस ने कोशिश की, लेकिन मोबाइल लोकेशन से भी व्यापारी के बारे में कोई सुराग नहीं मिला। -फोटो AI जनरेटेड

पुलिस ने कोशिश की, लेकिन मोबाइल लोकेशन से भी व्यापारी के बारे में कोई सुराग नहीं मिला। -फोटो AI जनरेटेड

परिचित नीरज जैन पर अपहरण का शक

बेटे आशीष सबलावत ने पुलिस को बताया कि उसके पिता के पास उनका परिचित नीरज जैन (37) अक्सर आता था। आशीष ने नीरज पर पिता के अपहरण का शक जताया।

आशीष ने घर से गायब हुए सामान को लेकर भी नीरज पर शक जताया। आशीष ने आशंका जताई कि नीरज उसके पिता की हत्या कर सकता है।

इस पर पुलिस ने गुमशुदगी की रिपोर्ट में अपहरण की धारा जोड़कर केस दर्ज कर जांच शुरू की। पुलिस ने आशीष व नीरज जैन के बयान दर्ज किए। आशीष ने घर से गायब हुए सामान की लिस्ट और फोटोग्राफ्स पुलिस को सौंपे।

तलाश में जुटी 4 पुलिस थानों की 15 टीमें

हाईप्रोफाइल मामला होने के कारण तत्कालीन अतिरिक्त पुलिस कमिश्नर आलोक वशिष्ठ खुद मॉनिटरिंग कर रहे थे। साेडाला, श्याम नगर, महेश नगर और अशोक नगर पुलिस थानों की 15 टीमें बनाकर बुजुर्ग व्यापारी की तलाश शुरू की।

आशीष ने 29 जून को अपने पिता की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इस पर जांच अधिकारी (आईओ) सतपाल सिंह को पहले से ही संभावित ठिकानों पर तलाश के लिए भेज रखा था।

सतपाल सिंह भरतपुर होते हुए यूपी व दिल्ली में राजकुमार की तलाश में जुटे थे। इसी बीच थाना प्रभारी सुनील प्रसाद शर्मा ने उन्हें अपहरण के संबंध में जानकारी दी।

पुलिस ने केस के सिलसिले में कई लोगों से पूछताछ की, लेकिन कहीं कोई सुराग हाथ नहीं लगा। -फोटो AI जनरेटेड

पुलिस ने केस के सिलसिले में कई लोगों से पूछताछ की, लेकिन कहीं कोई सुराग हाथ नहीं लगा। -फोटो AI जनरेटेड

फिरौती के लिए कॉल नहीं आने से बढ़ी चिंता

इंचार्ज सुनील प्रसाद ने संदिग्ध नीरज जैन की तलाश के निर्देश दिए। पुलिस नीरज के मोबाइल लोकेशन के आधार पर तलाश में जुट गई। इधर, पुलिस के लिए राजकुमार जैन का लापता होना एक अबूझ पहेली बन गया था।

राजकुमार जैन बड़े व्यापारी थे। काफी मशक्कत के बावजूद जयपुर पुलिस राजकुमार के बारे में कोई जानकारी नहीं जुटा पाई। पुलिस को भी किसी अनहोनी का अंदेशा होने लगा था। क्योंकि परिजनों के पास भी फिरौती के लिए कोई कॉल नहीं आया।

  • क्या ये केवल अपहरण का मामला था या ये घटना किसी बड़ी वारदात की ओर इशारा कर रही थी?
  • क्या राजकुमार जैन की हत्या हो चुकी थी?
  • अगर हां तो उनकी लाश कहां थी ?

कल राजस्थान क्राइम फाइल पार्ट-2 में पढ़िए इन सभी सवालों के जवाब…



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