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फर्जी खेल सर्टिफिकेट और दिव्यांग सर्टिफिकेट के बाद अब सरकारी नौकरी के लिए तलाक के फर्जी मामले भी सामने आ रहे हैं। राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड (RSSB) को फर्जी तलाक लेकर नौकरी पाने वालों की दो दर्जन से अधिक शिकायतें मिल चुकी हैं।

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कई मामले तो ऐसे हैं जिनमें तलाक केवल कागजों में था। नौकरी लगते ही कपल फिर से साथ लिव इन में रह रहे हैं। बोर्ड ने इन शिकायतों की जांच के लिए SOG से संपर्क किया है।

अब सवाल उठता है कि कैंडिडेट्स ऐसा क्यों करते हैं? तलाकशुदा महिला का पूर्व पति के साथ लिव इन में रहना कैसे गलत कहा जा सकता है? क्या ये मामले साजिश करने के आरोप के दायरे में आ पाएंगे? फर्जीवाड़ा कर दूसरों का हक मारने वालों की नौकरी जा सकती है? आगे ऐसा न हो उसके लिए RSSB क्या उपाय कर रहा है?

भास्कर ने जवाब RSSB अध्यक्ष आलोक राज और कर्मचारी मामलों के लीगल एक्सपर्ट रामप्रताप सैनी से इन सवालों के जवाब लिए, पढ़िए- मंडे स्पेशल स्टोरी में…

सरकारी नौकरियों में 2% कोटा, इसलिए फर्जीवाड़ा

राजस्थान सरकार अपनी सभी नौकरियों के लिए भर्तियों में तलाकशुदा महिला को 2 फीसदी आरक्षण कोटा देती है। सरकार का मानना है कि अकेली महिला के लिए जीवनयापन का संकट खड़ा हो जाता है, ऐसे में उन्हें योग्यता के अनुसार भर्ती प्रक्रिया में कुछ सहूलियत मिल जाए।

RSSB के अध्यक्ष आलोक राज के अनुसार यदि सरकारी भर्ती में विभिन्न कैटेगरी के आरक्षण को देखें, तो तलाकशुदा कोटे में कैंडिडेट्स की संख्या ज्यादा नहीं होती, इसलिए कॉम्पिटिशन भी कम होता है। इस कोटे की कटऑफ अन्य श्रेणियां के मुकाबले काफी कम रहती है। इसी बात का फायदा उठाकर कुछ अभ्यर्थी कर रहे हैं। सिर्फ कागजों में तलाक लेकर नौकरी हासिल कर रहे हैं। हालांकि अभी तक कोई मामला खुला नहीं है, लेकिन जांच जरूरी है।

RSSB के अध्यक्ष आलोक राज से सवाल

भास्कर : सरकारी नौकरी के लिए फर्जी तलाक लेने के कैसे-कैसे मामले आपके सामने आए हैं?

आलोक राज : तलाकशुदा महिला कोटे का फायदा उठाने के लिए फर्जी तलाक के दो तरह के मामले सामने आए हैं।

1. दलालों के जरिए भर्ती निकलने से दो-तीन साल पहले कागजों में शादी की, फिर तलाक लिया।

2. विवाहिता ने सरकारी नौकरी पाने के लिए तलाक लिया, अब नौकरी लगने के बाद पति के साथ लिव इन में रह रही हैं।

हालांकि ये सब पेपर पर (कोर्ट का आदेश) ही होता है। दोनों ही मामलों में महिला आवेदक अपने कोर्ट की डिक्री (यह अदालत द्वारा दिया गया एक लिखित आदेश होता है जो मामले के अंतिम निर्णय को स्पष्ट करता है।) संलग्न करते हैं। ये लोग कागजों में तलाकशुदा होते हैं, लेकिन असल में साथ ही रह रहे होते हैं। बस 2 फीसदी कोटे का फायदा उठाने के लिए यह सब होता है।

भास्कर : कितनी शिकायतें आपके पास आई हैं, क्या सरकार की जानकारी में है?

आलोक राज : फर्जी तलाक लेने की हमारे पास 25 से अधिक शिकायतें मिल चुकी हैं। ये शिकायतें ज्यादा भी हो सकती हैं। इन सब पर जांच करवाने के प्रयास चल रहे हैं। सरकार को पूरी जानकारी दी गई है और SOG को इस बारे में जानकारी है। हम पूरी कोशिश में लगे हैं कि कैसे इस फर्जीवाड़े को रोका जाए। ऐसी शिकायतें संबंधित विभागों से भी शेयर की जाती हैं, जहां कैंडिडेट नौकरी कर रहा है।

भास्कर : कौन-कौनसी भर्तियों में ज्यादा मामले आ रहे हैं?

आलोक राज : पीटीआई भर्ती-2022, फायरमैन भर्ती-2021, सूचना सहायक जैसी कई भर्तियों में फर्जी हैंडिकैप, फर्जी स्पोर्ट्स सर्टिफिकेट के साथ-साथ तलाक के मामले में भी शिकायतें मिली हैं। हालांकि, सभी भर्तियों में कोटा है। एक-दो शिकायतें हर भर्ती में मिल रही हैं।

भास्कर : बोर्ड ऐसे मामले रोकने के लिए क्या उपाय कर रहा है?

आलोक राज : हम नवाचार करने जा रहे हैं। राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड अपनी सभी भर्तियों के रिजल्ट में अभी केवल कैंडिडेट्स के रोल नंबर, कैटेगरी और सब कैटेगरी (SC, ST या OBC, तलाकशुदा, हैंडिकैप, स्पोर्ट्मैन आदि) देता है। लेकिन अब हम SSC की तर्ज पर रिजल्ट जारी करने की तैयारी कर रहे हैं।

SSC में रोल नंबर, नाम, माता-पिता का नाम, कैटेगरी, सब कैटेगरी भी रिजल्ट के साथ पब्लिश होता है। इसी तर्ज पर बोर्ड चलेगा। यह सब ट्रांसपेरेंसी के लिए और फर्जी EWS, तलाकशुदा, स्पोर्ट्समैन, हैंडिकैप वालों को रोकने का काम करेगा। क्योंकि सिलेक्टेड कैंडिडेट का पूरा ब्योरा जनता या समाज के सामने होगा।

यदि किसी ने फर्जी तलाक, हैंडीकेप्ड या खेल सर्टिफिकेट के जरिए नौकरी पा ली, तो आस-पड़ौस या गांव के लोगों को पता चल जाएगा। आस पड़ौस या गांव के लोगों को पता होता है कि तलाक हुआ है या संबंधित कैंडिडेट खेल खेलता है या नहीं या कभी खेला भी है या नहीं। हैंडिकैप है भी या नहीं। जनता-समाज-गांव हमें सूचना दे सकेगा। बोर्ड के साथ समाज आ जाए, तो इस तरह से हम काफी हद तक फर्जीवाड़ा खत्म कर सकते हैं।

भास्कर : क्या रिजल्ट में इस तरह के बदलाव RSSB अपने स्तर पर कर सकता है या सरकार से स्वीकृति की जरूरत पड़ेगी?

आलोक राज : नहीं, RSSB ऐसे निर्णय अपने स्तर पर ही कर सकता है। लोगों का मन जानने के लिए हम लगातार इस पर सर्वे भी कर रहे हैं। अधिकांश लोगों से पॉजिटिव रेस्पॉन्स मिला है। बदलावों के साथ रिजल्ट जारी करने की व्यवस्था को हम जल्दी शुरू करने वाले हैं।

भास्कर : क्या फर्जी तलाक लेकर नौकरी लगने वालों को नौकरी से निकाला जा सकता है?

आलोक राज : देखिए, कई सारे केसेज में थोड़ा मुश्किल हो सकता है। तलाकशुदा मामलों की जांच करना इतना आसान नहीं होता। लेकिन मुझे ऐसा भी नहीं लगता कि ये असंभव है। जहां चाह वहां राह वाली बात होगी, तो तरीके भी निकल जाएंगे।

RSSB अध्यक्ष आलोक राज फर्जी सर्टिफिकेटों के जरिए नौकर पाने वालों को रोकने के उपाय के तहत रिजल्ट में बदलावों को लेकर एक पिछले कुछ दिनों से ट्विटर पर पोल भी चला रहे हैं।

RSSB अध्यक्ष आलोक राज फर्जी सर्टिफिकेटों के जरिए नौकर पाने वालों को रोकने के उपाय के तहत रिजल्ट में बदलावों को लेकर एक पिछले कुछ दिनों से ट्विटर पर पोल भी चला रहे हैं।

अब लीगल एक्सपर्ट रामप्रताप सैनी से जानते हैं कैसे इन मामलों को पकड़ा जा सकता है…

भास्कर : महिला ने सरकारी नौकरी पाने के लिए फर्जी तरीके से तलाक लिया और नौकरी के बाद उसी पति के साथ लिव-इन में रह रही है, कानून की नजर में क्या यह सही है?

राम प्रताप सैनी : हिन्दू मैरिज एक्ट के अनुसार किसी महिला ने तलाक ले लिया, तलाक के आधार पर कोटे के तहत सरकारी नौकरी ले ली और फिर भी उसी पति के साथ रह रही है, ये अनुचित है। क्योंकि उनका मोटिव गलत है। यदि सामान्य कोटे से नौकरी पाई है तो अपराध नहीं बनता, लेकिन तलाक शुदा कोटे से नौकरी पाने वालों पर मामला बनता है।

भास्कर : क्या ऐसे मामले साजिश करने के आरोप के दायरे में आएंगे?

राम प्रताप सैनी : बिल्कुल साजिश के तहत ही आएंगे। क्योंकि तलाक केवल साजिश के तहत किया गया था और इससे नौकरी पाई है। ऐसे लोगों ने षड़यंत्र रचा है, जिससे किसी सही कैंडिडेट की जगह गलत तरीके से खुद का सिलेक्शन करवा लिया। इस आधार पर राज्य सरकार उनके खिलाफ कार्रवाई कर सकती है।

भास्कर : सरकारी नौकरी पाने के बाद उसी व्यक्ति से वापस शादी करने के मामले सामने आ रहे हैं? क्या ऐसी शादी साजिश साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत है?

राम प्रताप सैनी : सरकारी नौकरी लगने के बाद यदि महिला पूर्व पति के साथ लिव-इन में रह रही है या वापस शादी करती है, तो जांच एजेंसी फर्जीवाड़ा साबित कर सकती है। संबंधित महिला का निवास स्थान का फिजिकल वेरिफिकेशन, मोबाइल ट्रेस और उनके यदि बच्चा है, तो उसके आधार कार्ड में बच्चे के जन्म व माता-पिता संबंधी डिटेल्स ले सकती है, आदि। ऐसे कई जगह हैं, जहां पति-पत्नी के दस्तावेज दिए जाते हैं। इन डिटेल्स और दस्तावेजों के आधार पर जांच एजेंसी नतीजे पर पहुंच सकती है कि षड्यंत्र रच कर और कोर्ट को धोखे में रखकर संबंधित ने गलत तरीके से नौकरी ली है।

भास्कर : क्या ऐसे नौकरी पर लगी महिलाओं को सरकारी नौकरी से निकाला जा सकता है?

राम प्रताप सैनी : बिल्कुल, निकाला जा सकता है। नियमानुसार जांच होगी और यदि साजिश पाई जाती है, तो निश्चित रूप से सेवाएं समाप्त की जा सकती हैं। दोषी पाए जाने पर कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है।

SOG के एडीजी बोले- शिकायतें मिली हैं, मामलों की पड़ताल कर रहे

फर्जी तलाक लेकर नौकरी पाने की शिकायतें मिली हैं या नहीं? इस सवाल के जवाब में एसओजी के एडीजी वीके सिंह ने बताया-

‘फर्जी तलाक के जरिए सरकारी नौकरी पाने को लेकर आए परिवादों को RSSB ने हमसे भी शेयर किया है। फिलहाल उनका अध्ययन किया जा रहा है। तलाक के फर्जी मामलों को साबित करने में कुछ चुनौतियां हैं, लेकिन ऐसा कतई नहीं है कि साबित नहीं हो सकते। जांच कभी भी शुरू की जा सकती है।’



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