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बारिश की बूंदों और सुरों की तान के बीच शुक्रवार शाम राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर एक अद्भुत समां का गवाह बना।

बारिश की बूंदों और सुरों की तान के बीच शुक्रवार शाम राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर एक अद्भुत समां का गवाह बना। एक ओर मंच पर पद्मभूषण बेगम परवीन सुल्ताना राग मल्हार गाकर वातावरण को सुरमयी बना रही थीं, तो दूसरी ओर बाहर झमाझम बारिश में भीगते हुए श्रोता भी उसी

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सुरों और वर्षा की इस अनूठी जुगलबंदी ने शाम को अविस्मरणीय बना दिया।

सुरों और वर्षा की इस अनूठी जुगलबंदी ने शाम को अविस्मरणीय बना दिया।

स्पिक मैके और राजस्थान पर्यटन विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम ने म्यूजिक इन द पार्क की परंपरा को नए रूप में आगे बढ़ाया।

बारिश के बाद की ठंडी हवाओं और नम वातावरण में जब स्वर साम्राज्ञी परवीन सुल्ताना ने कहा कि बारिश का समां है, इसलिए कार्यक्रम की शुरुआत वर्षा कालीन राग मेघ मल्हार से करती हूं तो पूरा परिसर सुरों से सराबोर हो उठा। उनके आलाप और तानों ने श्रोताओं को रस की गहराई में डुबो दिया।

कार्यक्रम की विशेषता यह रही कि श्रोताओं के बीच ग्रैमी विजेता और पद्मभूषण पं. विश्व मोहन भट्ट भी मौजूद थे।

कार्यक्रम की विशेषता यह रही कि श्रोताओं के बीच ग्रैमी विजेता और पद्मभूषण पं. विश्व मोहन भट्ट भी मौजूद थे।

कार्यक्रम की विशेषता यह रही कि श्रोताओं के बीच ग्रैमी विजेता और पद्मभूषण पं. विश्व मोहन भट्ट भी मौजूद थे। मंच पर जहां स्वर की साधिका अपनी साधना में लीन थीं, वहीं सामने वाद्य-साधना के शिल्पी बैठकर इस अद्भुत क्षण को आत्मीयता से देख रहे थे।

तबले पर मिथिलेश झा और हारमोनियम पर विनय मिश्रा की संगत ने गायकी को और भी ऊंचाई दी। झा की थाप और मिश्रा की मधुर धुनों ने सुर, लय और भाव का ऐसा संगम रचा कि पूरा माहौल संगीत की त्रिवेणी में डूब गया।

स्पिक मैके और राजस्थान पर्यटन विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम ने म्यूजिक इन द पार्क की परंपरा को नए रूप में आगे बढ़ाया।

स्पिक मैके और राजस्थान पर्यटन विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम ने म्यूजिक इन द पार्क की परंपरा को नए रूप में आगे बढ़ाया।

स्पिक मैके की प्रवक्ता अनु चंडोक और हिमानी खींची ने बताया कि अनहद श्रृंखला अब हर महीने के दूसरे शनिवार को आयोजित होगी। अगली प्रस्तुति अक्टूबर में होगी, जिसमें विख्यात सितार वादक उस्ताद शुजात हुसैन खां अपनी कला का प्रदर्शन करेंगे।

बेगम परवीन सुल्ताना ने कार्यक्रम के अंत में जयपुर के दर्शकों की सराहना करते हुए कहा कि यहां के सुधि श्रोता शास्त्रीय संगीत को जीवंत रखते हैं। ऐसे वातावरण में प्रस्तुति देना कलाकार के लिए भी ऊर्जा से भर देने वाला अनुभव होता है।



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