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भाद्रपद शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी के पावन अवसर पर जसोलधाम में शुक्रवार को आस्था, श्रद्धा और भक्ति का अद्वितीय संगम देखने को मिला। देशभर से आए हजारों श्रद्धालुओं का सैलाब जसोलधाम में उमड़ पड़ा। अल सुबह प्रातः 5 बजे मंदिर के कपाट खुलते ही भक्तों की लंबी

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पूरा मंदिर परिसर आकर्षक फूलों की सजावट से भव्य रूप में सजा, जिससे जसोलधाम भक्ति के रंग में रंग उठा। राजस्थान के अलावा गुजरात, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, बिहार, छत्तीसगढ़, पंजाब और मध्यप्रदेश सहित विभिन्न राज्यों से भक्तों ने दर्शन का लाभ लिया।

भक्तों की सम्पूर्ण मनोकामना पूर्ति के लिए विशेष पूजा की गई।

भक्तों की सम्पूर्ण मनोकामना पूर्ति के लिए विशेष पूजा की गई।

मंदिर संस्थान अध्यक्ष रावल किशन सिंह जसोल ने कहा कि भादवे की तेरस पर जसोलधाम में श्री राणीसा भटियाणीसा का ऐतिहासिक मेला विगत तकरीबन 300 वर्षों से आयोजित होता आ रहा है। उन्होंने कहा कि “जसोलधाम आज लाखों श्रद्धालुओं की श्रद्धा, आस्था और अटूट विश्वास का प्रमुख धार्मिक केंद्र बन चुका है। प्रति वर्ष भक्तों की संख्या में वृद्धि उनकी आस्था की गहराई को दर्शाती है।”

राज्य सरकार एवं प्रशासन को धन्यवाद संस्थान अध्यक्ष ने राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन के उत्कृष्ट प्रबंधों की प्रशंसा करते हुए कहा: कि “हमारे ट्रस्ट मण्डल की ओर से राज्य सरकार, पुलिस प्रशासन और स्थानीय निकायों को हार्दिक धन्यवाद। उनकी प्रभावी और सराहनीय व्यवस्थाओं के कारण ही श्रद्धालुओं की सेवा सुचारु रूप से हो पा रही है।”

संस्थान अध्यक्ष ने कर्मचारियों की भूमिका की विशेष सराहना की। उन्होंने कहा कि “हमारे सफाई कर्मचारियों से लेकर प्रबंधक तक सभी का समर्पण ही इस मेले की सफलता का कारण है। हमारा मुख्य उद्देश्य मां जसोल के असंख्य भक्तों की सेवा करना है और हमारे कर्मचारी पूरे कर्मठता व निष्ठा के साथ सेवा में तत्पर हैं।” तथा जसोलधाम आने वाले समस्त श्रद्धालु इन सेवाओं से पूर्ण रूप से सन्तुष्ट है।

कतार में लगे भक्त दर्शन करते हुए।

कतार में लगे भक्त दर्शन करते हुए।

विशेष हवन एवं पूजन मंदिर परिसर स्थित हवन कुण्ड में मां जसोल के असंख्य भक्तों की सम्पूर्ण मनोकामना पूर्ति हेतु संकल्प के साथ विशेष हवन-पूजन का आयोजन किया गया। इस अवसर पर संस्थान अध्यक्ष रावल किशन सिंह जसोल ने विद्वान पंडितों के साथ विधि-विधान से विशेष आहुतियां अर्पित की।

श्रद्धालुओं के लिए विशेष व्यवस्थाएं श्रद्धालुओं की सुविधा हेतु संस्थान ने विशेष प्रबंध किए, जिनमें शामिल हैं संपूर्ण मंदिर परिसर में छायादार टेंट एवं टीन शेड युक्त छायादार सुविधा, शुद्ध पेयजल की व्यवस्था, सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम, वृद्धजन भक्तों के लिए विशेष प्रवेश मार्ग, गोल्फ कार्ट और व्हीलचेयर सुविधा

ट्रस्ट मंडल की ओर से भक्तों के ऊपर फूलों की वर्षा की गई।

ट्रस्ट मंडल की ओर से भक्तों के ऊपर फूलों की वर्षा की गई।

निःशुल्क पार्किंग और भोजन प्रसादी श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए अस्थायी पार्किंग की व्यवस्था की गई। संस्थान समिति सदस्य कुंवर हरिश्चंद्र सिंह जसोल ने स्थानीय प्रशासन के साथ समन्वय बनाकर पार्किंग का विस्तार करवाया। इसी क्षेत्र में संस्थान की ओर से निःशुल्क भोजन प्रसादी की व्यवस्था भी की गई, जिसमें हजारों भक्तों ने बैठकर महाप्रसादी ग्रहण की।

राजस्थान के अलावा पड़ोसी राज्यों से भी भक्त दर्शन करने पहुंचे।

राजस्थान के अलावा पड़ोसी राज्यों से भी भक्त दर्शन करने पहुंचे।

कन्या पूजन और अन्नपूर्णा प्रसादम् धार्मिक कार्यक्रमों की श्रृंखला में कन्या पूजन और अन्नपूर्णा प्रसादम् का आयोजन हुआ, जिसमें जसोल नगर पालिका क्षेत्र की कन्याओं का विधिवत पूजन कर उन्हें फल-प्रसाद और दक्षिणा भेंट की गई। इस अवसर पर भोजन प्रसादी (अन्न पूर्णा प्रसादम) लाभ सिवाना निवासी मां के लाडले राजपुरोहित परिवार ने लिया। वहीं, छप्पन भोग का लाभ रुक्मण बाईसा धर्मपत्नी विक्रमसिंह जागीरदार राव, चामुंडेरी एवं उनके परिवार ने लिया।

लाइव आरती और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां फेसबुक, इंस्टाग्राम और यूट्यूब के माध्यम से लाइव आरती का सीधा प्रसारण किया गया। इस दौरान गैर नृत्य और अश्व नृत्य की विशेष प्रस्तुतियां मां जसोल को अर्पित की गईं। पुष्कर से आए नगारची कलाकारों, स्थानीय दमामियों और शिव बाड़मेर से आए मांगणियार कलाकारों ने अपनी मनमोहक प्रस्तुतियों से भक्तों को भक्ति में सराबोर कर दिया।



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