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स्टेनोग्राफर्स की प्रमुख मांग है कि वर्ष 2000 में जारी रेलवे बोर्ड की गाइडलाइन (RBE 165/2000) का पालन किया जाए।
भारतीय रेलवे में कार्यरत स्टेनोग्राफर कैडर के कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि उनके साथ लंबे समय से अन्याय हो रहा है। वर्षों पुरानी समस्याएं आज भी बनी हुई हैं। इससे कर्मचारियों का मनोबल गिरता जा रहा है।
स्टेनोग्राफर्स की प्रमुख मांग है कि वर्ष 2000 में जारी रेलवे बोर्ड की गाइडलाइन (RBE 165/2000) का पालन किया जाए। इसमें अधिकारियों के अनुपात में स्टेनो सहायता की यार्डस्टिक निर्धारित की गई थी। लगभग 25 वर्ष बीतने के बाद भी अधिकांश जोनल रेलवे और प्रोडक्शन इकाइयों ने इसका अनुपालन नहीं किया है। केवल मॉडर्न कोच फैक्ट्री, रायबरेली में 2015 से इस नीति को लागू किया गया है। अन्य स्थानों पर स्टेनोग्राफर्स प्रमोशन जैसे अधिकारों से वंचित हैं।
साल 2022 में रेलवे बोर्ड के निर्देश (RBE 155/2022) द्वारा अन्य कई कैडरों के 50% पदों का वेतनमान लेवल-7 से लेवल-8 में उन्नयन किया गया। इसमें ग्रेड पे ₹4600 से ₹4800 तक बढ़ाया गया। लेकिन स्टेनोग्राफर कैडर को इस लाभ से बाहर रखा गया। इससे इस कैडर में गहरा असंतोष है।
स्टेनोग्राफर कैडर की पुनर्संरचना की प्रक्रिया भी 1999 के बाद एक भी बार नहीं हुई
गैर-सचिवालय कार्यालयों में स्टेनोग्राफर कैडर की पुनर्संरचना की प्रक्रिया भी 1999 के बाद एक भी बार नहीं हुई है। जबकि अन्य कई कैडरों को समय-समय पर इस तरह के लाभ मिलते रहे हैं।
रेलवे के इस महत्वपूर्ण वर्ग ने बार-बार मांग की है कि उनके साथ हो रही उपेक्षा खत्म हो। यार्डस्टिक का पूरी तरह अनुपालन कराया जाए। वेतनमान में समानता और उन्नयन दिया जाए। पुनर्संरचना की प्रक्रिया तत्काल शुरू की जाए। इससे स्टेनोग्राफर्स का मनोबल बढ़ेगा और भारतीय रेलवे की प्रशासनिक कार्यक्षमता में सुधार आएगा।
एक स्टेनोग्राफर ने कहा, “अनेक वर्षों से हम अपने अधिकार और न्याय की उम्मीद लिए बैठे हैं। नीति के बावजूद अन्याय होना हमारे साथ भेदभाव है।”
स्टेनोग्राफर कैडर ने रेलवे प्रशासन और सरकार से अपील की है कि उनकी समस्याओं का न्यायोचित और त्वरित समाधान निकाला जाए। इससे कार्यस्थल पर विश्वास और उत्साह बना रहेगा।
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