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रेगिस्तान की धरा पर शुक्रवार को बड़ा जनसमूह उमड़ेगा। गड़ीसर से कलेक्ट्रेट तक हजारों की संख्या में लोग एकत्र होकर जनाक्रोश रैली निकालेंगे। इस रैली का केंद्र बिंदु है, ओरण और गोचर की भूमि की सुरक्षा, जिसे ग्रामीण समाज अपनी धरोहर और पीढ़ियों से जीवनरेखा

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जनाक्रोश रैली का आयोजन शुक्रवार सुबह 11 बजे से गड़ीसर तालाब से शुरू होगा और कलेक्ट्रेट तक पहुंचेगा। इसमें शिव विधायक व जनप्रतिनिधि रविंद्र सिंह भाटी, अनेक साधु-संत, सामाजिक कार्यकर्ता, किसान और हजारों की संख्या में ग्रामीण-नागरिक शामिल होंगे। रैली को लेकर पुलिस प्रशासन ने पहले ही ट्रैफिक डायवर्ट कर दिया है, ताकि शहर में जाम जैसी स्थिति न बने।

पुलिस-प्रशासन अलर्ट

बड़ी भीड़ को देखते हुए पुलिस-प्रशासन भी पूरी तरह सतर्क है। जैसलमेर शहर के प्रमुख मार्गों पर ट्रैफिक डायवर्ट किया गया है। गड़ीसर से कलेक्ट्रेट तक सुरक्षा बंदोबस्त कड़े किए गए हैं। अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है ताकि किसी तरह की अप्रिय स्थिति न बने।

पुलिस ने रैली को देखते हुए ट्रेफिक डायवर्ट किया।

पुलिस ने रैली को देखते हुए ट्रेफिक डायवर्ट किया।

यातायात डायवर्जन प्लान

जनाक्रोश रैली को देखते हुए पुलिस ने शहर में विशेष यातायात व्यवस्था लागू की है।

सम व रामगढ़ क्षेत्र से आने वाले वाहन

  • पार्किंग की व्यवस्था जोधपुर रोड रोडवेज डिपो के पास और बाड़मेर रोड वन विभाग के पास की गई है।
  • इन वाहनों को अमरसागर बाईपास, ट्रांसपोर्ट नगर व चूंगी नाका जोधपुर रोड बाईपास से होकर पार्किंग स्थल पर लाना होगा।
  • वहां से लोग पैदल रैली स्थल तक पहुंचेंगे।

खुहड़ी, झिनझिनियाली, म्याजलार, फतेहगढ़, देवीकोट मार्ग से आने वाले वाहन

  • इनकी पार्किंग व्यवस्था भी बाड़मेर रोड वन विभाग के पास रहेगी।
  • यहां वाहन खड़े करने के बाद प्रतिभागी पैदल रैली में शामिल होंगे।

नाचना, पोकरण, लाठी, चांधन व मोहनगढ़ मार्ग से आने वाले वाहन

  • इन वाहनों की पार्किंग व्यवस्था जोधपुर रोड पर गिरधर पेट्रोल और रोडवेज बस डिपो के बीच में की गई है।
  • वाहन वहीं खड़े किए जाएंगे और लोग पैदल रैली स्थल पर आएंगे।

भारी वाहन व बसें

  • रैली के दौरान शहर में भारी वाहनों और बसों का प्रवेश पूरी तरह बंद रहेगा।

शहर के प्रमुख मार्ग बंद

  • विजय स्तंभ सर्किल से गीता आश्रम सर्किल तक, ऑफिसर सर्किल से हनुमान सर्किल तक वाहनों का आवागमन पूरी तरह बंद रहेगा।

साधु-संत भी होंगे शामिल

इस आंदोलन में धार्मिक आस्था भी गहराई से जुड़ी है। संत समाज ने भी खुलकर समर्थन दिया है। जैसलमेर जिले के विभिन्न आश्रमों व मठों के साधु-संतों ने गुरुवार को ही स्पष्ट कर दिया कि वे इस रैली में भाग लेकर अपनी उपस्थिति दर्ज कराएंगे। उनका कहना है कि “ओरण केवल भूमि का टुकड़ा नहीं है, यह हमारी संस्कृति और श्रद्धा का प्रतीक है। इसे बचाना हम सबकी जिम्मेदारी है।”

जनाक्रोश रैली में शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी भी शामिल होंगे।

जनाक्रोश रैली में शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी भी शामिल होंगे।

शिव विधायक भाटी लेंगे हिस्सा

जनाक्रोश रैली में शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी भी शामिल होंगे। भाटी लंबे समय से ओरण-गोचर बचाने की मांग उठा रहे हैं। उन्होंने विधानसभा में भी कई बार यह मुद्दा रखा है। भाटी ने रैली से पहले समर्थकों से अपील की- “ओरण और गोचर हमारी पीढ़ियों की धरोहर है।

यदि इन्हें सुरक्षित नहीं किया गया, तो आने वाले समय में हमारी गाय-भैंसें और भेड़-बकरियां चरने को जगह नहीं पाएंगी। यह सिर्फ जमीन का सवाल नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति और अस्तित्व का सवाल है।”

हजारों लोग उमड़ने की संभावना

आयोजकों का कहना है कि इस रैली में जिलेभर से हजारों की संख्या में लोग आएंगे। ग्रामीण क्षेत्रों से पहले ही बसों, जीपों और ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में लोग जैसलमेर शहर की ओर रवाना हो चुके हैं। महिलाओं और युवाओं की भी बड़ी संख्या में भागीदारी रहने की संभावना है। रैली में कई किसान संगठनों, सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी समर्थन देने की घोषणा की है।

कलेक्ट्रेट के सामने धरने पर बैठे पर्यावरण प्रेमी और ग्रामीण।

कलेक्ट्रेट के सामने धरने पर बैठे पर्यावरण प्रेमी और ग्रामीण।

क्यों उठ रही है आवाज़?

जैसलमेर सहित पश्चिमी राजस्थान के ग्रामीण अंचलों में ओरण और गोचर भूमि पशुओं और पर्यावरण के लिए जीवनदायिनी मानी जाती है। ओरण वे पवित्र स्थान हैं जिन्हें धार्मिक व सांस्कृतिक मान्यता प्राप्त है। यहाँ पशुओं को चरने की खुली छूट होती है।

गोचर गांव की सार्वजनिक चरागाह भूमि है, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था और पशुपालन की नींव मानी जाती है।लोगों का आरोप है कि समय के साथ-साथ इन जमीनों पर अतिक्रमण, गलत रिकॉर्डिंग और राजस्व दस्तावेजों में ग़लत प्रविष्टियां होने लगी हैं।

कई जगह पर निजी लाभ के लिए भू-स्वामित्व दर्ज कराए जाने की कोशिशें हो रही हैं। जनाक्रोश रैली का मुख्य उद्देश्य यही है कि ओरण और गोचर की भूमि को राजस्व रिकॉर्ड में स्पष्ट रूप से दर्ज किया जाए और उन्हें सुरक्षित किया जाए।



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