☜ Click Here to Star Rating



प्रदेश में बिना किसी स्वतंत्र प्रयोगशाला में जांच के सौभाग्य योजना, पीएम सूर्यघर, कुसुम योजना और डीडीयूजीजेवाई के तहत किसानों, बीपीएल तथा आदिवासियों के घरों को रोशन करने के लिए अरबों रुपए खर्च कर हजारों मेगावाट के सोलर पैनल लगाए जा रहे हैं। स्थिति य

.

केवल कंपनियों द्वारा जारी सर्टिफिकेट के आधार पर ही डिस्कॉम कंपनियां माल को सही मान लेती हैं। सिस्टम की इस खामी का फायदा सोलर सप्लाई करने वाली कंपनियां जमकर उठाती हैं। अब कंपनियों द्वारा सोलर पैनलो में की जा रही गड़बड़ी को रोकने के लिए अजमेर के पालरा औद्योगिक क्षेत्र में भारत सरकार द्वारा संचालित एसटीडीसी लैब जो कि विशेषत: सोलर पैनल की टेस्टिंग के लिए आईसी 61215:2021 नियमों के अंतर्गत इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मिनिस्ट्री गवर्नमेंट ऑफ इंडिया के अंतर्गत संचालित और स्थापित की गई है। सोलर पैनल की टेस्टिंग प्रक्रिया पर वर्ष 2024 से काम चल रहा है।

इस लैब से अगले साल सोलर पैनल की टेस्टिंग शुरू हो जाएगी। इसके लिए पीटीवी जर्मनी से कंसल्टेंट किया गया है। डीपीआर तैयार की जा रही है। इस पर 40-50 करोड़ खर्च होंगे। कंसल्टेंट हायर करने के लिए स्टडी के साथ ही डिपार्टमेंट इकोनॉमी अफेयर से भी पत्र व्यवहार किया जा रहा है।

सौर ऊर्जा से 5 योजनाओं में बन रही 32317 मेगावाट बिजली

राजस्थान डिस्कॉम में रूफटॉप सौर ऊर्जा की स्वीकृत योजना: राज्य में 2100 मेगावाट संचयी रूफटॉप सौर क्षमता। 1 लाख 30 हजार से अधिक के कुल रूफटॉप लाभार्थी, 305 मेगावाट पीएम सूर्यघर योजना अंतर्गत जोड़ी गई क्षमता। 70 हजार से अधिक पीएम सूर्यघर योजना के अंतर्गत लाभार्थी। पीएम कुसुम योजना | 10617 मेगावाट स्वीकृत, 9500 मेगावाट का वर्कऑर्डर जारी। 5500 पावर परचेज एग्रीमेंट हो चुके। 1500 मेगावाट से अधिक स्थापित। पीएम कुसुम योजना-ए के तहत विकेंद्रीकृत सौर ऊर्जा | घटक- ए कुल स्वीकृत 5000 से अधिक मेगावाट, वर्कऑर्डर 4000 मेगावाट, निष्पादित पीपीए 1300 मेगावाट, स्थापित 450 मेगावाट। पीएम कुसुम-फीडर सोलराइजेशन घटक | सी फीडर स्तर पर सौंदर्यीकरण कुल स्वीकृत 5367 मेगावाट (4 लाख पंप), वर्कऑर्डर 5400 मेगावाट, निष्पादित पीपीए 4000 मेगावाट, स्थापित 1100 मेगावाट। अजमेर शहर में टाटा पावर के क्षेत्र में 3444 कनेक्शन हैं। 38.42 मेगावाट का उत्पादन सोलर के जरिए हो रहा है। निजी क्षेत्र में घरों से लेकर फार्म हाउस, औद्योगिक और शैक्षणिक संस्थानों में भी बड़े पैमाने पर सोलर प्लांट लगाए जिनसे बिजली बनाई जा रही है।

वोल्टेज, पावर, करंट, एफिशिएंसी व वेट सहित 20 तरह के टेस्ट होंगे

सोलर पैनल सहित टेक्निकल आइटम के लिए आईसी स्टैंडर्ड होते हैं। लैब में लेटेस्ट स्टैंडर्ड के हिसाब से मॉड्यूल की क्वालिटी और सेफ्टी टेस्ट होगा। लैब में सोलर पैनल की टेस्टिंग के लिए सन सिमुलेटर सिस्टम लगेंगे। पैनल पर लाइट पड़ती है तो यह फोटोवोल्टिक से इलेक्ट्रिक में कन्वर्ट हो जाती है। इससे वोल्टेज, पावर, करंट, एफिशिएंसी व वेट सहित 20 तरह के टेस्ट जांचे जाएंगे।

विजुअल इंस्पेक्शन में क्रैक, फंगस और बबल्स नजर आ जाते हैं। पैनल से दावे के अनुसार कितनी बिजली जनरेट हो रही है यह पता चल जाएगा। पैनल की टेस्टिंग नहीं होने से वेंडर के दावे को ही सही मानना पड़ता है। टेस्ट होने पर गड़बड़ी का पता चलेगा।

केंद्रीय लैब में सोलर पैनल टेस्टिंग होने से उपभोक्ताओं को सोलर प्लांट पर मिलने वाली सब्सिडी भी जल्द मिल सकेगी। सोलर पैनल के सैंपल को दिल्ली आदि जगहों की लैब में नहीं भेजना पड़ेगा। राज्य में 32 हजार 317 मेगावाट बिजली सोलर एनर्जी से बन रही है।

तैयार की जा रही डीपीआर: प्रभारी निदेशक

^सेंटर ऑफ एक्सीलेंस टेस्ट एसपीवी मॉड्यूल टेस्टिंग के लिए है। इसके लिए जर्मनी से कंसल्टेंट नियुक्त करने की प्रक्रिया चल रही है। डीपीआर तैयार की जा रही है। वर्ष 2026 से एसपीवी की टेस्टिंग शुरू हो जाएगी। – दुर्गेश कुमार पाठक, प्रभारी निदेशक, एसटीडीसी लैब, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मिनिस्ट्री

डिस्कॉम भी टेस्ट करवाएगा: एमडी

^अजमेर में सोलर टेस्टिंग लैब खुलने से सभी को फायदा होगा। सोलर से जुड़ी योजनाओं के पैनल की टेस्टिंग हो सकेगी। डिस्कॉम भी टेस्ट करवाएगा। -केपी वर्मा, एमडी अजमेर डिस्कॉम



Discover more from Kuchaman City Directory

Subscribe to get the latest posts sent to your email.

Comments

Leave a Reply

error: Content is protected !!

Sign In

Register

Reset Password

Please enter your username or email address, you will receive a link to create a new password via email.

Discover more from Kuchaman City Directory

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading