पूर्व मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास ने शुक्रवार को जयपुर में इसे जनता की जीत बताया।
राजस्थान में स्मार्ट मीटर लगाने की अनिवार्यता को हटा दिया है। पूर्व मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास ने शुक्रवार को जयपुर में इसे जनता की जीत बताया।
उन्होंने कहा कि स्मार्ट मीटर बड़ा घोटाला और जनता की जेब काटने वाला था। राज्य के विभिन्न हिस्सों में लोगों ने इसका विरोध किया। सरकार ने पुलिस और निजी कंपनी के कर्मचारियों की मदद से स्मार्ट मीटर लगाने का प्रयास किया। लेकिन जनता के विरोध के कारण यह काम नहीं हो सका।
खाचरियावास ने सरकार को सलाह दी कि वह भविष्य में ऐसे मनमाने फैसले न ले। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर सरकार छिपकर स्मार्ट मीटर लगाने की कोशिश करेगी, तो उसका भी विरोध किया जाएगा।

2 महीने के भीतर मीटर नहीं बदला जाता है, तो उपभोक्ता को बिल पर 5% की छूट मिलेगी। (फाइल फोटो)
बता दें कि राजस्थान सरकार ने फिलहाल नए बिजली कनेक्शनों में स्मार्ट मीटर लगाने की अनिवार्यता को हटा दिया है। इसके साथ ही खराब और जले हुए मीटरों की जगह भी अब पुराने मीटर लगाए जा सकेंगे। बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम्स) ने स्मार्ट मीटर लगाने की गाइडलाइन में बदलाव करने के आदेश जारी कर दिए हैं।
अब नए कनेक्शन और खराब या जले हुए मीटर को बदलने के लिए अलग-अलग नियम लागू होंगे। 20 अगस्त को जारी नई गाइडलाइन के अनुसार, जिन इलाकों में स्मार्ट मीटर लगाने का काम चल रहा है या पूरा हो चुका है, वहां नए कनेक्शन पर स्मार्ट मीटर लगाए जाएंगे। खराब मीटर भी केवल स्मार्ट मीटर से ही बदले जाएंगे। लेकिन, बाकी जगहों पर फिलहाल सामान्य (नॉन-स्मार्ट) मीटर से ही काम चलाया जाएगा।
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