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पिपलोदी स्कूल में हुए हादसे के कारणों की जांच रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि स्कूल की मरम्मत के काम में तकनीकी खामियां छोड़ दी गईं। इससे बिल्डिंग की छत का भार बढ़ गया। कमजोर दीवारें पटि्टयों का वजन सहन नहीं कर पाईं। इससे इमारत अचानक भरभराकर गिर गई। जिम्
पिपलोदी स्कूल का भवन 1992 में स्वीकृत हुआ था। 1994 में इसमें कमरे, तिबारी और प्रधानाध्यापक कक्ष का निर्माण करवाया गया। इसके बाद 2023 में इसकी मरम्मत के लिए 1 लाख रुपए का बजट आया। इस 1 लाख रुपए में छत की मरम्मत करवाई गई।स्कूल छत की मरम्मत के काम में तकनीकी पहलुओं का कोई ध्यान नहीं रखा गया। छत का वजन बढ़ गया। दीवारों पर पीपल सहित झाड़-झंखाड़ उगे हुए हैं। इनकी जड़ें नींव तक पहुंचने लगी। दीवारें पोली हो गई व नींव तक पानी जाने से नींव में ईंटों व सीमेंट ने जगह छोड़ दी। इससे भवन गिर गया।
स्कूल की छत की पटि्टयां पहले 6 इंच बाहर निकली हुई थीं, उन्हें मरम्मत के समय काट दिया गया, इससे भी छत कमजोर हुई। पिपलोदी स्कूल का भवन बार बार मरम्मत मांग रहा था, लेकिन स्कूल स्टाफ से लेकर उच्च अधिकारी तक इसको बार बार नजर अंदाज करते रहे। जांच रिपोर्ट में सामने आया कि स्कूल स्टाफ और समसा के अधिकारियों ने मरम्मत कार्य के दौरान निरीक्षण में कोताही बरती, जिससे इतना बड़ा हादसा हो गया।
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