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हलैना के पीएम श्री राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय के परिसर में स्थित जर्जर रियासतकालीन महल की एक दीवार दरक कर विद्यालय के कमरे पर गिर गई। गनीमत रही कि महल की दीवार रात्रि को गिरी, जिससे कोई जनहानि नहीं हुई। मलबा विद्यालय की छत और कमरे के अंदर तक पहुंच

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दरअसल, हलैना में रियासतकालीन महल बना हुआ है, जो कि पूरी तरह से जर्जर हो चुका है। महल के चारों तरफ पीएम श्री और संस्कृत स्कूल संचालित है, जिनमें 30 कमरे बने हुए हैं। उन्हीं कमरों के ऊपर 40 से 50 फीट ऊंची महल की जर्जर दीवार खड़ी है। जिसके साए में दोनों स्कूल के करीब 500 बच्चे पढ़ते हैं।

प्रधानाचार्य तुरसी राम ने बताया कि जिस तरफ महल का हिस्सा ढहा, उस तरफ संस्कृत स्कूल व कक्षा 5 तक की क्लास लगतीं हैं। संस्कृत स्कूल के बच्चों को हालात देख घर भेज दिया, जबकि 5 वीं तक के बच्चों को दूसरे कमरों में बैठाया गया। सूचना पर तहसीलदार महेश चंद व नायब तहसीलदार लक्ष्मण गुप्ता ने मौके पर पहुंचकर घटना की रिपोर्ट तैयार की।

10 कमरे भी जर्जर, उनमें भी पढ़ रहे बच्चे

महल ही नहीं हलैना विद्यालय के कमरे भी जर्जर हैं। इन जर्जर कमरों में भी बच्चों को पढ़ाया जाता है। जर्जर महल व कमरों की हालत से बच्चे व अध्यापक चिंतित रहते हैं। प्रधानाचार्य ने बताया कि उनके ऑफिस, स्टाफ रूम व बच्चों के 10 – 12 कमरे जर्जर हैं। बच्चों को जर्जर कमरों में भी पढ़ाते हैं। क्योंकि दूसरी जगह नहीं है। इसकी सूचना विभाग व प्रशासन को भेज रखी है।

महल सालों से जर्जर, नहीं की गिराने की कार्रवाई

महल कई सालों से जर्जर है, जिस पर ताला लगा है। इसके चारों व संस्कृत स्कूल और पीएम श्री स्कूल के कमरे बने हैं। शिक्षा विभाग के अधिकारियों को भी पता है कि स्कूल भवन के ऊपर जर्जर महल है, जिससे कभी-भी हादसा हो सकता है। फिर भी इसे गिराने की कागजी कार्रवाई तक शुरू नहीं की। खानापूर्ति के लिए स्थानीय विधायक और पूर्व पीडब्ल्यूडी मंत्री को भी अवगत कराया था।

“महल की जर्जर स्थिति की विधायक बहादुर कोली और तत्कालीन पीडब्ल्यूडी मंत्री भजनलाल जाटव से शिकायत की। विभाग को भी पत्र लिखा है। घटना के बाद शिक्षा विभाग का कोई अधिकारी नहीं आया। तहसीलदार व नायब तहसीलदार ने जरूर घटना की जानकारी ली।” – तुरसी राम शर्मा प्रधानाचार्य, विद्यालय हलैना ।

“महल के आसपास स्कूल के कक्ष बने हुए हैं। आज तहसीलदार व जेईन मौैके पर गए थे। जर्जर महल को जमींदोज करने के आदेश हो गए हैं। इसके अलावा संस्कृत विद्यालय के बच्चों के लिए भी स्कूल के 2 कमरे दे दिए गए हैं।” -सुरेंद्र गोपालिया, डीईओ (माध्यमिक)



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