डूंगरपुर के सारणेश्वर मंदिर में श्रावणी पूर्णिमा पर श्रावणी उपाकर्म विधि-विधान से संपन्न हुआ।
डूंगरपुर के सारणेश्वर मंदिर में श्रावणी पूर्णिमा पर श्रावणी उपाकर्म शनिवार को विधि-विधान से संपन्न हुआ। चौबीसा समाज के अध्यक्ष सुरेंद्र कुमार शर्मा ने बताया कि सारणेश्वर मंदिर घाटी में विप्रवरों द्वारा यह अनुष्ठान किया गया।
आचार्य जुगल किशोर पांडेय और सहआचार्य कपिल शर्मा ने समाजजनों व विप्रवरों को हेमाद्रि स्नान, ऋषि तर्पण, पितृ तर्पण समेत अन्य क्रियाओं के माध्यम से नवीन यज्ञोपवीत धारण कराए। आचार्यों ने हेमाद्रि स्नान व ऋषि तर्पण का महत्व बताते हुए कहा कि ब्राह्मण कुल का वरदान ही जनेऊ धारण करना और चोटी रखना होता है।
उन्होंने बताया कि पापों के निवारण हेतु की जाने वाली आराधना को ही हेमाद्रि स्नान कहते हैं। जौ और तांद्रे को ब्राह्मण कुल के पूर्वज ऋषिगणों का भोजन बताया गया। आचार्यों ने श्रावणी उपाकर्म का महत्व समझाते हुए कहा कि इस महापर्व का संबंध उस पवित्र ब्रह्मसूत्र से है, जिसके तीन धागे देवऋण, पितृऋण और ऋषिऋण के प्रतीक माने जाते हैं।

आचार्यों ने बच्चों को घर-परिवार में ही उचित संस्कार देने पर जोर दिया।
श्रावणी उपाकर्म को आत्मशुद्धि का पर्व माना जाता है। वैदिक काल से यह शरीर, मन और इंद्रियों की पवित्रता का पुण्य पर्व रहा है। आचार्यों ने बच्चों को घर-परिवार में ही उचित संस्कार देने पर जोर दिया, जिससे ब्राह्मण कुल की रक्षा हो सके।
उन्होंने सच्चे व्रत का महत्व बताते हुए कहा कि दिन में किसी की भी निंदा न करने का प्रण लेना ही व्रत की वास्तविकता है। हेमाद्रि स्नान में उपाध्याय ने ब्राह्मणों को प्राणी से लेकर पशुओं के प्रति दया भाव का संकल्प दिलवाया।
कार्यक्रम के अंत में भगवान सारणेश्वर महादेव की महाआरती उतारकर प्रसाद वितरित किया गया। इस अवसर पर सुरेंद्र शर्मा, महामंत्री आशीष चौबीसा, सूर्यनारायण चौबीसा, शैलेष चौबीसा सहित अनेक विप्रवर उपस्थित थे।
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