राजस्थान में सुरक्षा एजेंसियों को एक बड़ा डर सताने लगा है। एजेंसियों को डर है कि पाकिस्तान बॉर्डर पर जिस तरह ड्रोन से नशे की अवैध तस्करी कर रहा है। उसी तरह हथियार की तस्करी होने लगी तो देश की सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा हो सकता है।
दरअसल, पाकिस्तान- राजस्थान का बॉर्डर करीब 1 हजार किलोमीटर का है। यहां पिछले कुछ साल में एंजेसियों ने 60 से ज्यादा ड्रोन पकड़े हैं या ड्रोन से गिराया गया नशे का सामान रिकवर किया गया है। दिनों-दिन ड्रोन की क्वालिटी और पावर में भी बदलाव आ रहा है।
पहले जो ड्रोन 2 किलो तक का सामान लाने में सक्षम थे। वे अब 15 किलो तक का लोड उठाकर ला रहे हैं। इन ड्रोन की टेक्नोलॉजी, पे लोड, स्पीड और बैटरी लाइफ में भी लगातार बदलाव किया जा रहा हैं। ऐसे में सुरक्षा एजेंसियों के सामने सीमा पर सुरक्षा का एक बड़ा चैलेंज खड़ा हो गया है।
आईजी एटीएस विकास कुमार ने बताया- राजस्थान और पंजाब सूखे नशे की खपत का क्षेत्र रहा है। ईरान,अफगानिस्तान और पाकिस्तान के क्षेत्र में सबसे ज्यादा अफीम पैदा होती है। अफीम को हेरोइन में बदलकर भारत भेजा जाता है। पिछले कुछ सालों में पाकिस्तान ने कश्मीर और पंजाब के बाद राजस्थान को टारगेट करते हुए ड्रोन से हेरोइन तस्करी को बढ़ाया है। पिछले तीन साल में राजस्थान इसका एक बड़ा क्षेत्र बन गया है। पिछले तीन साल में श्रीगंगानगर और बीकानेर में 60 ड्रोन से हेरोइन आने के मामले दर्ज हुए हैं। जानकारी में आया है कि राजस्थान में जो हेरोइन ड्रोन से गिर रही है। उसे तस्कर अलग-अलग माध्यम से पंजाब और अन्य राज्यों में भेज रहे हैं।

बीकानेर के खाजूवाला में अगस्त में ही 1 किलो 665 ग्राम अवैध हेरोइन बरामद की गई थी।
एंटी ड्रोन टेक्नॉलॉजी पर काम कर रही राजस्थान एटीएस
विकास कुमार ने बताया- राजस्थान का पाकिस्तान से जुड़ा बॉर्डर एरिया करीब 1050 किलोमीटर का है। इस इलाके में कई जगह आबादी है। कई जगह रेगिस्तान है। कुछ जगहों पर खेती होती है। ऐसे में ड्रोन के गिरने की एक निश्चित जगह का पता करना एक बड़ी चुनौती है।
एंटी ड्रोन टेक्नॉलॉजी और काउंटर ड्रोन टेक्नॉलॉजी पर काम करना बड़ी चुनौती है। इस पर केंद्रीय एजेंसियों के साथ-साथ राजस्थान एटीएस भी काम कर रही है। मादक पदार्थों के साथ-साथ अगर ड्रोन से हथियार और विस्फोटक भी गिराए जाने लगे तो यह देश की सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा हो सकता है। हमारी सभी एजेंसियां निरंतर इस पर काम कर रही है। यही कारण है कि इस साल ड्रोन से आने वाले मादक पदार्थों की घटनाओं में कमी आई है।
ड्रोन को डिटेक्ट करना मुश्किल, दिखाई नहीं देता
आईजी एटीएस विकास कुमार ने बताया- हर दिन ड्रोन की टेक्नोलॉजी, पे लोड, स्पीड और बैटरी लाइफ बढ़ रही है। ड्रोन ज्यादा से ज्यादा दूरी तय कर पा रहा है। ड्रोन पहले 2 से 3 किलो तक का ही सामान ला सकते थे। पे-लोड केपिसिटी बढ़ने से अब 10 से 15 किलो तक का सामान लाने में सक्षम है। खास बात है कि ऐसे ड्रोन भी डिटेक्ट हुए हैं जो सामान्य रूप से दिखाई नहीं देते है। उनकी आवाज और स्पीड भी डिटेक्ट नहीं हो पाती है।

राजस्थान में 2024 में सबसे ज्यादा ड्रोन से हेरोइन तस्करी
पाकिस्तान से श्रीगंगानगर बॉर्डर पर साल 2024 में ड्रोन से तस्करी के सबसे ज्यादा मामले आए थे। साल 2022 पहला केस के सामने आते ही सुरक्षा एजेंसियां एक्टिव हो गई थी। इसके बाद BSF को चौकसी बढ़ाने के लिए कहा गया था। सितंबर 2025 में ड्रोन से 150 किलो से ज्यादा हेरोइन सीमावर्ती इलाकों में गिरी थी, जिसे पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों ने जब्त किया था।

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