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प्रदेश में इस बार मानसून की मेहरबानी से खेती भी उम्मीद से बेहतर लहालहाने लगी है। जुलाई महीने में 285 एमएम बरसात हुई। यह औसत से 77 प्रतिशत ज्यादा है। समय से पहले मानसून आने के चलते खरीफ फसलों की उम्मीद से बढ़कर बुवाई की गई है। कृषि विभाग द्वारा मानसून
हालांकि ओवरऑल बुवाई में अभी सौ फीसदी का लक्ष्य हासिल करने में आठ प्रतिशत बुवाई बाकी रह गई है। सबसे ज्यादा बुवाई धान और अरहर की हुई है। धान की बुवाई का लक्ष्य 225 हजार हेक्टेयर निर्धारित किया गया था। इसकी 144 प्रतिशत बुवाई हो चुकी है। जुलाई के आखिरी सप्ताह तक लक्ष्य मुकाबले में 324.782 हजार हेक्टेयर में खेती की जा चुकी है। यह सौ फीसदी के लक्ष्य से 44 प्रतिशत अधिक है।
लक्ष्य से सौ फीसदी से ज्यादा बुवाई वाली फसलों में धान के अलावा ज्वार, मक्का, अरहर, मूंगफली शामिल हैं। ज्वार की बुवाई 620 हजार हेक्टेयर लक्ष्य के मुकाबले में 652.702 हजार हेक्टेयर में की गई है। जबकि मक्का की बुवाई भी 970 हजार हेक्टेयर के मुकाबले में 970.770 हजार हेक्टेयर में हाे चुकी है। अनाज में बाजरा की 98 प्रतिशत बुवाई कर ली गई है। इसका लक्ष्य 4300 हजार हेक्टयेर का निर्धारित किया गया था। अन्य मोटा अनाज पांच हजार हेक्टेयर की तुलना में अब तक 3.133 हजार हेक्टेयर में बोया गया है। अनाज में सबसे कम 63% इसी की बुवाई हो पाई है।
दूसरी तरफ दलहन में अरहर के बाद सर्वाधिक बुवाई 97% चवला की हुई है। यह 60 हजार हेक्टेयर में बोया जाना है। जिसमें से अब तक 57.998 हजार हेक्टेयर में खेती हो चुकी है। अन्य दलहनी फसलों में मूंग की बुवाई 2312.890 हजार हेक्टेयर, मोठ की 897.292 हजार हेक्टेयर बुवाई हो पाई है। दलहन की कुल बुवाई 10166.750 हजार हेक्टेयर में होनी है। इसमें से 96 प्रतिशत बुवाई हो चुकी है। यह गत वर्ष के लक्ष्य से 5 हजार हेक्टेयर ज्यादा है।
तिलहनी फसलों में सबसे ज्यादा मूंगफली की बुवाई
तेलीय फसलों में सबसे ज्यादा मूंगफली की बुवाई हुई है। 950 हजार हेक्टेयर के लक्ष्य के मुकाबले में 967.394 हेक्टेयर में बुवाई हो चुकी है। तिलहनी फसलों में सिर्फ मूंगफली की ही बुवाई 102 प्रतिशत तक पहुंची है। जबकि तिल 280 हजार हेक्टेयर में से 184.814 हजार हेक्टेयर में बुवाई हो पाई है। इसी तरह सोयाबीन की 86 प्रतिशत बुवाई हो चुकी है। जबकि सबसे कम अरंडी की सिर्फ 19 प्रतिशत ही बुवाई हुई है।
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