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राजस्थान हाईकोर्ट ने आरपीएस राजीव दत्ता के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए हैं। जस्टिस समीर जैन की अदालत ने शेखर मेवाड़ा व अन्य की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिए।
याचिका में कहा गया था कि याचिकाकर्ताओं ने राजीव दत्ता और उनके अन्य सहयोगियों के खिलाफ अजमेर कोर्ट में बच्चों की तस्करी और यौन शोषण का परिवाद दायर किया था। जिसे वापस लेने का दवाब बनाने के लिए याचिकाकर्ताओं पर कोटा, बूंदी और पाली में अलग-अलग एफआईआर दर्ज करवाई गई।
अदालत ने इन सभी एफआईआर में याचिकाकर्ताओं के खिलाफ किसी भी तरह की दण्डात्मक कार्रवाई पर भी रोक लगा दी हैं। वहीं पुलिस को निर्देश दिए है कि बिना न्यायालय की जानकारी के किसी भी तरह की अग्रिम कार्रवाई नहीं की जाएगी।
याचिकाकर्ता पर हमले का आरोप याचिकाकर्ताओं की ओर से हाईकोर्ट बार के अध्यक्ष महेन्द्र शांडिल्य ने बहस करते हुए कहा कि मई में जब याचिकाकर्ता शेखर मेवाड़ा कोटा से जयपुर लौट रहे थे। उस समय राजीव दत्ता के कहने पर उन पर जानलेवा हमला किया गया था।
इसकी एफआईआर भी पुलिस ने दर्ज नहीं की। लेकिन बाद में एसीएस होम को शिकायत करने पर विधायकपुरी थाने में जीरो एफआईआर दर्ज की गई। इस पर अदालत ने कोटा में राजीव दत्ता के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए।
एडीजी क्राइम को सभी मामलों की जांच के निर्देश सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट में एडीजी क्राइम दिनेश एमएन मौजूद रहे। अदालत ने उन्हें पूरे प्रकरण की जांच के निर्देश दिए हैं। अदालत ने कहा कि एडीजी क्राइम दोनों पक्षों की ओर से दर्ज मामलों और अजमेर न्यायिक मजिस्ट्रेट क्रम-3 में दायर परिवाद की जांच अपने सुपरविजन में करवाएंगे।
वहीं आठ सप्ताह के अंदर जांच का परिणाम हाई कोर्ट में समक्ष पेश करेंगे। कोर्ट ने राजीव दत्ता और अन्य शिकायकर्ताओं को मामले में पक्षकार बनाने के भी निर्देश दिए।
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