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राजस्थान हाईकोर्ट ने सेवानिवृत महिला व्याख्याता को करीब साढ़े तीन साल का बकाया वेतन और छह साल की बकाया पेंशन व समस्त सेवानिवृति परिलाभ तीन माह मे देने का आदेश दिया हैं। जस्टिस सुदेश बंसल की अदालत ने यह आदेश डॉ कृष्णा जैन की याचिका पर सुनवाई करते हुए
याचिका में कहा गया था कि याचिकाकर्ता साल 1983 में हनुमानगढ़ के कॉलेज में राजनीति विज्ञान के व्याख्याता पद पर नियुक्त हुई थी। उस समय वह अनुदानित कॉलेज था और राज्य सरकार से 70 फीसदी अनुदान प्राप्त करता था लेकिन साल 2013 में कॉलेज को राज्य सरकार ने अधिगृहित कर लिया।
इस बीच जुलाई 2019 में याचिकाकर्ता सेवानिवृत हो गई। लेकिन दिसम्बर 2015 के बाद से उसे वेतन, पेंशन और अन्य परिलाभ नहीं दिए गए।
समस्त दायित्वों की जिम्मेदारी राज्य सरकार की अधिवक्ता सार्थक रस्तोगी ने बताया कि कोर्ट ने अपने आदेश में कहा, जब राज्य सरकार ने एक बार कॉलेज का अधिग्रहण कर लिया तो उस संस्था के समस्त दायित्वों की जिम्मेदारी भी राज्य सरकार की हो जाती हैं।
उन्होने बताया कि एक बार कॉलेज का अधिग्रहण होने के बाद सरकार ने उसे निरस्त करने का प्रयास किया। जिसे न्यायालय ने अवैध ठहराते हुए निरस्त कर दिया था। इस पर कोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार कॉलेज का अधिग्रहण वर्ष 2020 से भी मानती है तो भी 70 फीसदी देनदारी सरकार की ही बनती है। वहीं 30 फीसदी राशि कॉलेज की प्रबंधन समिति से वसूल की जा सकती हैं।
हाईकोर्ट ने कहा कि अगर याचिकाकर्ता को तीन माह में बकाया का भुगतान नहीं किया जाता है तो बकाया वेतन पर 6 प्रतिशत और बकाया सेवानिवृति परिलाभों पर 9 प्रतिशत ब्याज भी देना होगा।
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