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सरकार द्वारा ग्रामीण क्षेत्र में ग्राम पंचायत स्तर पर सबको उपचार मिले, इसके लिए ग्राम पंचायत स्तर पर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र खोले गए हैं। आज भी ऐसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र है जिन पर 100 से 150 की ओपीडी होने पर भी एक ही डॉक्टर कार्यरत है, कई प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ऐसे हैं, जहां पर वर्षों से डॉक्टर नहीं है।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कुंडेरा जहां पर एक ही स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉक्टर कार्यरत है। जिले में इस सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में सबसे ज्यादा 130 महिलाओं की डिलीवरी कराई गई। वर्तमान में 150 की ओपीडी है, करीब 45 गांव के लोग उपचार के लिए आते हैं। डॉक्टर के पद रिक्त होने के कारण मरीजों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर डॉक्टर के पांच पद स्वीकृत है,चार खाली चल रहे हैं। प्रसव वाली महिला आने पर मरीजों की सार संभाल करने वाला कोई नहीं है। प्रसव कराने के बाद स्त्री रोग विशेषज्ञ द्वारा ही अन्य मरीजों की जांच कर उपचार किया जाता है। रात्रि में ड्यूटी देने के लिए डॉक्टर नहीं है।
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र चकेरी में भी डॉक्टर का पद रिक्त चल रहा है। मरीज को उपचार कराने के लिए कुंडेरा या सामान्य चिकित्सालय सवाई माधोपुर जाना पड़ता है। सीएमएचओ डॉ अनिल जेमिनी ने बताया कि वर्तमान में डॉक्टर नहीं है, पहले प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर डॉक्टरों की नियुक्ति की जाएगी उसके बाद में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर लगाए जाएंगे। नई भर्ती आने पर ही व्यवस्था हो सकती है।
^वर्तमान में एक ही डॉक्टर है, प्रसव वाली महिला आने पर मरीजों को इंतजार करना पड़ता है। वर्तमान में 150 के करीब ओपीडी है, 1 महीने में 130 महिलाओं की डिलीवरी की गई थी, डॉक्टर स्टाफ लगे तो व्यवस्था सही हो सकती है। डॉ कमलेश मीणा इंचार्ज, सीएचसी कुंडेरा एक महीने में 130 महिलाओं की डिलीवरी कराई, सीएचसी में 5 पद स्वीकृत, 4 खाली है
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