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श्रावण मास में छोटी काशी में शिवभक्ति परवान पर चढ़ी। श्रावण के आखिरी रविवार को गलता में कांवड़ यात्राओं की धूम रही।

श्रावण मास में छोटी काशी में शिवभक्ति परवान पर चढ़ी। श्रावण के आखिरी रविवार को गलता में कांवड़ यात्राओं की धूम रही। शहर के शिवालय हर-हर महादेव व बोल बम के जयकारों से गूंज उठे।

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गलता तीर्थ से अलसुबह ही भक्त कांवड़ में जल लेकर निकले। परकोटे में सुबह से ही कांवड़ यात्राएं नजर आईं। भक्त नाचते हुए, हाथों में पंचरंगिया निशान लिए कांवड़ियों के साथ आगे बढ़ते दिखे।

कांवड़िए गलता गेट, सूरजपोल बाजार, रामगंज बाजार, बड़ी चौपड़, त्रिपोलिया बाजार और छोटी चोपड़ होते हुए निकले। इससे चारदीवारी शिवमय नजर आई। जयपुर में सावन के अंतिम सोमवार से एक दिन पहले रविवार को अद्भुत आस्था, भक्ति और राष्ट्रप्रेम का संगम देखने को मिला।

महादेव का रूप धारण करके पहुंचे श्रद्धालु।

महादेव का रूप धारण करके पहुंचे श्रद्धालु।

गलता तीर्थ से लेकर शहर के प्रमुख शिवालयों तक “हर-हर महादेव” के जयघोष के साथ सैकड़ों कांवड़ यात्राएं निकलीं। गलता तीर्थ से उठती हर-हर महादेव की गूंज, डीजे पर भक्ति गीतों पर झूमते भक्त, तिरंगे के साथ नारीशक्ति का ओज और नेपाल-भारत की सांझी संस्कृति का संगम दिखा।

ऐसा लग रहा था कि जयपुर जैसे चलती-फिरती शिव बारात बन गया हो। हर मोड़ पर आस्था मुस्कुरा रही थी और हर गली से बोल बम और हर हर महादेव की गूंज सुनाई दे रही थी।

श्रावण मास के अंतिम सोमवार से एक दिन पूर्व जयपुर ने सिर्फ कांवड़ यात्रा ही नहीं देखी। यह शिवत्व का पर्व, राष्ट्रप्रेम का संदेश, नारीशक्ति की भक्ति और भारत-नेपाल की सांस्कृतिक एकता का अद्भुत संगम भी था। सावन की इस बेला में जयपुर ने एक बार फिर साबित कर दिया कि जहां शिव हैं, वहां शक्ति है, श्रद्धा है और वहीं देश की आत्मा बसती है।

गलता तीर्थ से उठती हर-हर महादेव की गूंज, डीजे पर भक्ति गीतों पर झूमते भक्त।

गलता तीर्थ से उठती हर-हर महादेव की गूंज, डीजे पर भक्ति गीतों पर झूमते भक्त।

फूलों से हुआ स्वागत

शहर भर में जगह-जगह फूलों से स्वागत किया गया। चौराहों पर सजी झांकियों में नंदी से लेकर शिव परिवार की झलक देखने को मिली। डमरू की ध्वनि के साथ जब वातावरण शिवमय हुआ तो हर भक्त भावविभोर नजर आया। भक्ति का यह मेला थमता नहीं दिखा, क्योंकि जब रगों में श्रद्धा बह रही हो, तो शरीर विश्राम नहीं मांगता।

1100 महिलाओं ने लिया भाग

इस आयोजन में प्रवासी नेपालियों की भागीदारी ने भारत-नेपाल की सांस्कृतिक मैत्री को और मजबूत किया। गलताजी से 22वीं कांवड़ यात्रा बाबा डबल शंकर महादेव मंदिर तक निकाली गई, जिसमें 1100 महिलाओं ने सिर पर कलश लेकर भाग लिया। नारीशक्ति की यह भक्ति प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान से प्रेरित थी और यह संदेश दे रही थी कि जहां नारी है, वहीं सच्ची भक्ति है।

मेहरों की नदी पहुंची कावड़

युवा मेहरा समिति की ओर से समाज के युवा और स्थानीय लोग गलता तीर्थ से कांवड़ लेकर यहां बने शिव मंदिर पहुंचे। कांवड़ यात्रा में महिलाएं भी शामिल हुई। कांवड़ यात्रा में आगे आगे युवा ध्वज लिए चल रहे थे। इनके पीछे युवा मंडली डीजे की धुन पर नाचते गाते चल रहे थे। जिसके पीछे कांवड़िये और कलश यात्रा के रूप में महिलाएं मौजूद रही।

यहां देखें फोटोज

कांवड़ से पहले श्रद्धालुओं ने गलता तीर्थ में डुबकी लगाई।

कांवड़ से पहले श्रद्धालुओं ने गलता तीर्थ में डुबकी लगाई।

अल सुबह इस तरह नजर आया गलता तीर्थ।

अल सुबह इस तरह नजर आया गलता तीर्थ।

शहर भर में जगह-जगह फूलों से स्वागत किया गया।

शहर भर में जगह-जगह फूलों से स्वागत किया गया।

डमरू की ध्वनि के साथ जब वातावरण शिवमय हुआ तो हर भक्त भावविभोर नजर आया।

डमरू की ध्वनि के साथ जब वातावरण शिवमय हुआ तो हर भक्त भावविभोर नजर आया।



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