जोधपुर एम्स में ब्रेन डेड हुए ट्यूशन टीचर सेवाराम ने दो लोगों को नई जिंदगी दी। उनकी दोनों किडनी से दो लोगों की जान बचाई जा सकेगी। वहीं लिवर फैटी होने से काम नहीं आ सका। सेवाराम को 29 जुलाई को हुए सड़क हादसे में सिर पर गंभीर चोट लगी थी।
सेवाराम का परिवार जोधपुर के ही झालामंड बाइपास कुम्हारों की बगीची का रहने वाला है। सेवाराम (47) अपने घर पर बच्चों को ट्यूशन पढ़ाते थे।
पिता शंकरलाल ने बताया- सेवाराम अपने बेटे के लिए 29 जुलाई को दोपहर 3 बजे मेडिकल स्टोर से दवा लेकर घर आ रहे थे। तभी मोती मार्केट रोड पर उनकी स्कूटी को बाइक सवार ने टक्कर मार दी। हादसे में सिर पर चोट लगी। पैर भी टूट गया। इस पर साढ़े 3 बजे एम्स हॉस्पिटल लेकर आए। यहां इमरजेंसी में इलाज शुरू किया गया।
दो घंटे बाद डॉक्टरों ने बताया- उनका ब्रेन डेड हो चुका है। इस पर हमने चार-पांच दिन इंतजार किया कि वो ठीक हो जाए। ठीक नहीं हुए तो अंगदान करने का निर्णय लिया। इस पर परिजनों ने 2 अगस्त को एम्स प्रशासन को जानकारी दी।

परिवार के साथ मौजूद एम्स जोधपुर के डॉक्टरों की टीम।
परिवार को नहीं पता था ब्रेन डेड क्या होता है सेवाराम के भाई मनोज ने बताया- हमें पता नहीं था कि ब्रेन डेड क्या होता है। बाद में पता चला ब्रेन डेड में व्यक्ति का दिमाग मर जाता है। सिर्फ शरीर के कुछ अंग ही काम करते हैं। इस पर हमने अपने परिवार के लोगों से सलाह ली। तय किया कि भले ही सेवाराम इस दुनिया में नहीं है, लेकिन उनके अंगों से अन्य लोगों की जिंदगी रोशन हो सकेगी।

जोधपुर से ग्रीन कॉरिडोर बनाकर एक किडनी सड़क मार्ग से जयपुर भेजी गई।
जयपुर और जोधपुर के मरीजों को लगेगी किडनी एम्स में ऑर्गन ट्रांसप्लांट के नोडल अधिकारी डॉक्टर शिव कुमार नावरिया ने बताया- सेवाराम की एक किडनी जयपुर के मरीज और दूसरी किडनी जोधपुर एम्स में एडमिट मरीज को लगाई जाएगी।
एम्स जोधपुर में अब तक 75 किडनी ट्रांसप्लांट, 25 लीवर ट्रांसप्लांट हो चुके हैं। इसके अलावा 2 बॉर्न मेरो ट्रांसप्लांट हो चुके हैं।
एम्स के अस्पताल के न्यूरोसर्जन डॉक्टर दीपक झा ने बताया- आज विश्व अंगदान दिवस है। इस मौके पर अंगदान करना गौरव का पल है।

एम्स के गार्डों ने सेवाराम की बॉडी को ऑनर दिया। समाज के लोगों ने भी श्रद्धांजलि दी।
लिवर नहीं आया काम डॉक्टरों ने सेवाराम का लिवर भी निकलने का प्रयास किया, लेकिन फैटी होने की वजह से काम नहीं आ सका। डॉक्टर ने बताया- करीब 70% तक लिवर फैटी हो चुका था। इसकी वजह से वह काम आने की योग्य नहीं था। ऐसे में किडनी ट्रांसप्लांट करने को लेकर प्लानिंग की गई।
सेवाराम के परिवार में मां पाकुड़ी देवी, पिता शंकरलाल, भाई संतोष (43), पत्नी धर्मी (45), बेटी चंद्रिका (21) और बेटा स्वरूप (13) है। बेटा अभी 9 वीं कक्षा में पढ़ता है। वहीं, बेटी चंद्रिका की शादी हो गई है।

एक किडनी जयपुर के एसएमएस अस्पताल में भर्ती और एक किडनी एम्स में भर्ती मरीज को ट्रांसप्लांट होगी।

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जयपुर के सवाई मानसिंह (SMS) हॉस्पिटल में मरीज की ब्रेनडेड होने के बाद उसके अंगों को दान किया गया। हार्ट का जयपुर के ही एसएमएस हॉस्पिटल में ट्रांसप्लांट हो गया और दोनों किडनी का ट्रांसप्लांट चल रहा है। लिवर को जोधपुर एम्स फ्लाइट के जरिए भिजवाया गया। (पूरी खबर पढ़ें)
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