मेवाड़ के प्रसिद्ध कृष्णधाम श्री सांवलिया जी मंदिर में सोमवार देर रात शरद पूर्णिमा का पर्व बड़ी श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। इस खास मौके पर रात 12 बजे भगवान श्री सांवलिया सेठ की विशेष आरती की गई। आरती के बाद मंदिर में मौजूद भक्तों को खीर का प्

रात के 12 बजे ठाकुर जी की विशेष आरती की गई।
सांवरा सेठ के जयकारों से गूंज उठा मंदिर परिसर
मंदिर परिसर में सोमवार शाम से ही श्रद्धालुओं का आना शुरू हो गया था। रात होते-होते मंदिर परिसर खचाखच भर गया। करीब 11 बजे भगवान के पट बंद कर दिए गए, ताकि आधी रात को विशेष पूजा की तैयारियां की जा सकें। जैसे ही रात के 12 बजे, शरद पूर्णिमा का शुभ मुहूर्त शुरू हुआ, मंदिर में आरती की घंटियां गूंज उठीं। इस दौरान पूरा वातावरण “जय सांवरा सेठ” और “जय श्रीकृष्ण” के जयकारों से गूंज उठा। आरती के बाद भगवान को खीर का भोग लगाया गया।

भक्तों को खीर का प्रसाद बांटा गया।
प्रसाद लेने के लिए लगी लंबी लाइन
खीर का भोग चढ़ाने के बाद मंदिर प्रशासन की ओर से प्रसाद वितरण शुरू किया गया। भक्तों में प्रसाद पाने की इतनी उत्सुकता थी कि मंदिर परिसर में प्रसाद लेने के लिए लंबी कतारें लग गईं। कई श्रद्धालु अपने घरों से ही बर्तन, डिब्बे और टिफिन लेकर आए थे ताकि वे खीर का प्रसाद भरकर ले जा सकें। मंदिर के बाहर और अंदर दोनों जगह खीर के वितरण की व्यवस्था की गई थी।
इस दौरान मंदिर मंडल की ओर से सुरक्षा और व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। मंडफिया थाना पुलिस और मंदिर मंडल के सिक्योरिटी गार्ड्स लगातार भीड़ पर नजर बनाए हुए थे। उन्होंने यह सुनिश्चित किया कि किसी प्रकार की अफरा-तफरी न मचे और प्रसाद सभी को सुचारु रूप से मिल सके।

प्रसाद के लिए भक्तों की लंबी लाइन देखी गई।
शरद पूर्णिमा पर खीर का भोग लगाना होता है शुभ
मंदिर के पुजारियों ने बताया कि शरद पूर्णिमा की रात को भगवान श्रीकृष्ण को खीर का भोग लगाना बहुत शुभ माना जाता है। ऐसा कहा जाता है कि इस रात चंद्रमा की किरणों में अमृत रस बरसता है, इसलिए लोग इस रात खीर बनाकर खुले आकाश के नीचे रख देते हैं और फिर इसे प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं। श्री सांवलिया सेठ मंदिर में यह परंपरा कई वर्षों से निभाई जा रही है।
पूरी रात मंदिर परिसर में भक्ति और उल्लास का माहौल बना रहा। कई श्रद्धालु दूर-दूर से केवल इस पर्व के दर्शन और प्रसाद पाने के लिए पहुंचे थे। मंदिर में सजावट भी आकर्षक थी, रोशनी से सारा परिसर जगमगा रहा था। भोर तक भक्तों का आना-जाना जारी रहा।
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