पाली में शनिवार को रक्षा बंधन पर ओम बन्ना धाम पर ओम बन्ना की प्रतिमा पर राखी बांधती युवतियां।
पाली-जोधपुर हाइवे पर स्थित ओम बन्ना धाम वर्तमान में किसी पहचान का मोहताज नहीं है। देश का इकलौता ऐसा मंदिर है। जहां ओम बन्ना के साथ उनकी बुलेट की पूजा करने के लिए रोजाना सैकड़ों लोग पहुंचते है। लेकिन रक्षा बंधन ओम बन्ना धाम का माहौल कुछ अलग ही रहता है।

ओम बन्ना की बुलेट के आगे राखी बांधते हुए दिल्ली से आई आकांक्षा चौहान।
दिल्ली से आई हूं ओम बन्ना की प्रतिमा को राखी बांधने दिल्ली से आई 30 वर्षीय आकांक्षा चौहान बताती है कि वह अपने भाई और दोसत के साथ ओम बन्ना को रक्षाबंधन पर राखी बांधने आई। दो साल से वह हर रक्षा बंधन पर दिल्ली से ओम बन्ना धाम आती है। उनका मानना है कि ओम बन्ना उनके भाई है और प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से उनकी सुरक्षा करते है इसी आस्था के चलते वह रक्षा बंधन पर यहां आती है और जब तक जिंदा रहेगी कोशिश करेगी की हर रक्षा बंधन पर ओम बन्ना की प्रतिमा और उनकी बुलेट को राखी बांधने आती रहे।

विदेशी मेहमान के साथ फोटो क्लिक करवाते श्रद्धालु।
ओम बन्ना ही मेरे भाई, 5 साल से आ रही हूं पाली के रहने वाल 24 साल की खुशी सिंह बताती है कि उनके कोई भाई नहीं है। इसलिए ओम बन्ना को ही अपना भाई मानती है। आस्था ऐसी है कि पिछले 5 साल से लगातार हर रक्षा बंधन पर ओम बन्ना की प्रतिमा और उनकी बुलेट को राखी बांधने आती है और ओम बन्ना के दर्शन कर अपनी सुरक्षा की कामना करती है। उनकी ऐसी आस्था है कि ओम बन्ना भाई की तरह उनकी प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से रक्षा करते है।

रक्षा बंधन पर ओम बन्ना को रखी बांधने बड़ी संख्या में महिलाएं-युवतियां पहुंची।
ओम बन्ना की कहानी सुनकर इटली की मोनिका भी हुई प्रभावित इटली की रहने वाले 28 साल की मोनिका इन दिनों राजस्थान घूमने और यहां कल्चर देखने के अपने ग्रुप के साथ आई हुई है। ओम बन्ना मंदिर के बारे में सूना तो वहां खुद को आने से नहीं रोक की। भास्कर से बातचीत में उन्होंने कहा कि सच में यह अलग तरह का मंदिर है। लोकल लोगों में इस मंदिर को लेकर बहुत आस्था है। यहां बुलेट की भी पूजा होती है। महिलाएं ओम बन्ना को अपना भाई मानते हुए उनकी प्रतिमा पर राखी बांधने रक्षा बंधन पर आती है। यह सच में बहुत अलग तरह का नजारा था। यहां आकर बहुत खुश हूं लोकल कल्चर को जानने और इस मंदिर के बारे में जानने का मौका मिला।

ओम बन्ना की बुलेट के आगे राखी बांधते हुए महिला।
जानिए कौन थे ओम बन्ना, कैसे होने लगी यहां बुलेट की भी पूजा बात दिसम्बर 1988 की है। पाली जिले के छोटे से गांव चोटिला के ठाकुर जोग सिंह राठौड़ के 25-26 साल के बेटे ओम सिंह राठौड़ अपनी 350 सीसी रॉयल एनफील्ड बुलेट (नंबर 7773) से ससुराल से चोटिला गांव की तरफ आ रहे थे। तभी बीच रास्ते (पाली-रोहट) हादसे में उनकी बाइक बैलेंस बिगड़ने पर पेड़ से टकरा गई और मौके पर ही ओम सिंह राठौड़ की मौत हो गई। हादसे के बाद पुलिस ओम बन्ना की बाइक का थाने लेकर आ गई। बताया जाता है कि, अगले दिन सुबह पुलिसकर्मियों को बाइक थाने में नहीं मिली। पुलिस ने तलाश की तो बाइक घटना स्थल पर मिली। बाइक कैसे थाने से घटना स्थल पर पहुंची, इससे पुलिस भी हैरान थी। पहले ये माना गया कि, किसी ने जान- बुझकर ऐसा किया होगा। पुलिस बुलेट को वापस थाने लेकर आ गई। बाइक को जंजीरों से बांधकर रखा गया। इसके बाद दूसरे दिन भी पुलिस को बाइक वापस घटना वाली जगह पर मिली। हैरान कर देने वाली यह बात पूरे गांव में फैल गई।

ओम बन्ना की तस्वीर पर राखी बांधते हुए महिला।
बार-बार बाइक के हादसे वाली जगह मिलने को लोगों ने चमत्कार माना। ओम बन्ना के पिता ठाकुर जोग सिंह राठौड़ ने भी जन भावना को देखते उस जगह चबूतरा बनवाकर बाइक को रख दिया। इसके बाद बाइक की पूजा करना शुरू कर दिया। धीरे-धीरे यह जगह ओम बन्ना (बुलेट वाले बाबा) के नाम से देश भर में पहचाना जाने लगा। फिलहाल इसकी देखरेख ओम बन्ना के बेटे पराक्रम सिंह राठौड़ के नेतृत्व में बनाई गई समिति करती है। रोजाना यहां हजारों श्रद्धालु देश भर से ओम बन्ना की प्रतिमा उनकी बुलेट के दर्शन करने आते है।

ओम बन्ना धाम।
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वह स्थान जहां शुरुआत में चबूतरा बनाकर ओम बन्ना की बाइक को रखा गया था।

ओम बन्ना की तस्वीर पर राखी बांधती एक महिला।

ओम बन्ना की तस्वीर पर लगी माला बांधी गई राखियां।

पाली जिले के पाली-जोधपुर हाइवे पर स्थित ओम बन्ना धाम पर रक्षा बंधन पर आए विदेशी मेहमान के साथ सेल्फी लेते हुए युवतियां।

पाली जिले के पाली-जोधपुर हाइवे पर स्थित ओम बन्ना धाम पर रखी ओम बन्ना की बुलेट।
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