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जीएसटी डिपार्टमेंट से निजी सहायक की पोस्ट से रिटायर्ड इंद्र सिंह राजपुरोहित, अब तक 3 राज्यों के 5 हजार स्कूलों में गीता की प्रति भेंट कर चुके हैं। उन्होंने गीता के श्लोक बोलने वाली एक मशीन भी बच्चों को बांटी है। इस श्लोक को गाया है, अनुराधा पौड़वाल ने

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दैनिक भास्कर में पढ़िए राजपुरोहित के 18 सालों की कहानी…

महाराज ने कहा था गीता के ज्ञान को घर-घर पहुंचाओ

जीएसटी डिपार्टमेंट से रिटायर हुए इंद्र सिंह राजपुरोहित बताते हैं- नाथ संप्रदाय के गुरु महाराज योगी शिवनाथ कृपलानी ने ने उन्हें साल 2007 में कहा था कि गीता के ज्ञान को घर-घर पहुंचाना है। इसके बाद से उन्होंने ये काम शुरू कर दिया। तब से अब तक पांच हजार से ज्यादा स्कूलों में पहुंचकर गीता का वितरण किया है। वहीं स्कूलों को सरस्वती वंदना वाली मशीन भेंट की है। ये मशीन डोर बेल की तरह है, जिसे ऑन करते ही उसमें सरस्वती मंत्र शुरू हो जाता है। ऐसी तीस हजार मशीनें वो अब तक वितरित कर चुके हैं। मशीन की कीमत पूछने पर राजपुरोहित कहते हैं कि इसकी कीमत पर कभी ध्यान ही नहीं दिया।

तस्वीर, इंद्रा सिंह राजपुरोहित और अनुराधा पौड़वाल की है। पौड़वाल ने उनके लिए निशुल्क गीत गाया था।

तस्वीर, इंद्रा सिंह राजपुरोहित और अनुराधा पौड़वाल की है। पौड़वाल ने उनके लिए निशुल्क गीत गाया था।

8 लाख स्टूडेंट्स को गीता-सरस्वती के बारे में बता चुके

राजपुरोहित बताते हैं कि वर्ष 2007 से अब तक वो करीब 8 लाख स्टूडेंट्स तक पहुंचकर गीता और सरस्वती के बारे में बता चुके हैं। राजस्थान के हर जिले की एक अलग फाइल बना रखी है। जिस स्कूल में गीता वितरण, सरस्वती प्रार्थना मशीन का वितरण करते हैं, वहां से एक सर्टिफिकेट भी लेते हैं। इन सर्टिफिकेट की कई फाइलें वे बना चुके हैं। आठ लाख स्टूडेंट्स तक पहुंचने का खर्च भी उन्होंने अपने स्तर पर ही उठाया। न तो सरकार से रुपया लिया और न किसी स्वयंसेवी संस्थान से।

अनुराधा पौड़वाल ने गाया सरस्वती मंत्र

वर्ष 2007 में सरस्वती वंदना को सरल भाषा में स्वयं राजपुरोहित ने ही लिखा। इसके बाद इसे अनुराधा पौड़वाल की आवाज में रिकार्ड करने का मन बना। दरअसल, इसके लिए भी राजपुरोहित को उनके गुरु महाराज ने आदेश दिया था। तब तो पौड़वाल को समय नहीं मिला लेकिन साल 2016 में किसी काम से राजपुरोहित मुम्बई गए तो पौड़वाल के घर के आगे से निकले थे। उन्होंने तुरंत अपनी गाड़ी रुकवाई और पौड़वाल के घर में चले गए। किस्मत थी कि पौड़वाल मिल गई और ये सरस्वती वंदना गाने के लिए तैयार हो गई। राजपुरोहित बताते हैं कि आज वो पौड़वाल की आवाज वाली प्रार्थना ही सब स्कूलों को वितरित कर रहे हैं।

गीता को सरल भाषा में लिखा

राजपुरोहित का मानना है कि गीता की संस्कृत भाषा आज के युवा और बच्चों को समझ नहीं आती। ऐसे में उन्होंने गीता के 18 अध्याय सरल हिन्दी में लिखे। इसी को बाद में स्कूल स्कूल पहुंचकर सुनाया। इसके लिए एक म्युजिक कराओके भी तैयार करवाया। जिस पर वो खुद गीता के 18 अध्याय सुनाते हैं।

तस्वीर 2010 की है। इसमें नजर आ रहा है कि राजपुरोहित बच्चों को गीता का ज्ञान सुना रहे हैं।

तस्वीर 2010 की है। इसमें नजर आ रहा है कि राजपुरोहित बच्चों को गीता का ज्ञान सुना रहे हैं।

शिक्षा विभाग ने दी है स्वीकृति

राजपुरोहित ने राजस्थान के स्कूलों में गीता पाठ और सरस्वती मंत्र का वितरण करने के लिए बकायदा शिक्षा निदेशालय से स्वीकृति ली है। माध्यमिक शिक्षा निदेशक ने एक पत्र देकर उन्हें राजस्थान के सभी जिलों में गीता पाठ सुनाने और सरस्वती मंत्र का वितरण करने की स्वीकृति दी है। इसी कारण वो हर जिले के स्कूल में पहुंचकर वहां पर गीता पाठ करते हैं।

इंद्रसिंह राजपुरोहित अब तक राजस्थान के 60 से ज्यादा स्कूल और शिक्षा विभाग ऑफिस में सरस्वती माता की मूर्ति लगा चुके हैं।

इंद्रसिंह राजपुरोहित अब तक राजस्थान के 60 से ज्यादा स्कूल और शिक्षा विभाग ऑफिस में सरस्वती माता की मूर्ति लगा चुके हैं।

साठ जगह लगा चुके हैं सरस्वती मूर्ति

इंद्रसिंह बताते हैं कि वो अब तक राजस्थान के 60 से ज्यादा स्कूल और शिक्षा विभाग ऑफिस में सरस्वती मूर्ति लगा चुके हैं। जहां भी मूर्ति लगाते हैं, वहां के कर्मचारियों से ये शपथ पत्र लेते हैं कि वो हर रोज इसकी पूजा अर्चना करेंगे। उन्होंने शिक्षा निदेशालय और बीकानेर के जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में भी सरस्वती की मूर्ति अपने खर्च पर लगवाई है।



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