राजस्थान सरकार से अपनी मांगों पर कार्रवाई का इंतजार कर रहे शिक्षकों का सब्र मंगलवार को जवाब दे गया। जिलेभर से सैकड़ों शिक्षक झुंझुनूं कलेक्ट्रेट परिसर में एकत्र हुए और जमकर प्रदर्शन किया। शिक्षकों ने जिला कलेक्टर के माध्यम से मुख्यमंत्री के नाम 25 सू
प्रदर्शनकारी शिक्षकों ने बताया कि पिछले एक साल में शिक्षा विभाग ने कई बार बातचीत का आश्वासन दिया, लेकिन हर बार सिर्फ तारीखें दी गईं और बैठकों को रद्द कर दिया गया। इस वजह से शिक्षकों में भारी गुस्सा है और वे सरकार की मंशा पर भी सवाल उठा रहे हैं।

अब आश्वासन नहीं, समाधान चाहिए
तीन बार वादा, तीनों बार टूटा
शिक्षक संगठन ने बताया कि उन्हें पहली बार 4 सितंबर 2024 को शिक्षामंत्री के कार्यालय से बातचीत का पत्र मिला था। इसके बाद उन्होंने 12 सितंबर को होने वाली बड़ी रैली रद्द कर दी थी। फिर 21 फरवरी 2025 को बीकानेर के माध्यमिक शिक्षा निदेशक ने भी बातचीत का भरोसा दिलाया, जिसके बाद संगठन ने 24 फरवरी को विधानसभा का घेराव टाल दिया। तीसरा पत्र 26 मई 2025 को आया, जिसमें 27 मई को जयपुर में बैठक तय हुई थी, लेकिन आखिरी मौके पर वह भी स्थगित कर दी गई।

सैकड़ों शिक्षकों ने कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन
“सरकार वादा-खिलाफी कर रही है”
प्रदर्शन के दौरान जिलाध्यक्ष ने कहा, “शिक्षामंत्री से लेकर शिक्षा निदेशक तक, सबने बार-बार पत्र लिखकर बातचीत का वादा किया। हमने हर बार सरकार पर भरोसा करके अपने आंदोलन रोके, लेकिन आज तक एक भी बैठक नहीं हुई और न ही हमारी मांगों पर कोई निर्णय लिया गया। यह सरकार की वादा-खिलाफी है और अब हम चुप नहीं बैठेंगे।”
ये हैं शिक्षकों की प्रमुख मांगें
- केंद्र के समान सातवां वेतनमान लागू किया जाए।
- पारदर्शी स्थानांतरण नीति बनाई जाए और टीएसपी व प्रतिबंधित जिलों की बाध्यता खत्म की जाए।
- पुरानी पेंशन योजना बहाल कर 2004 के बाद नियुक्त शिक्षकों की एनपीएस राशि जीपीएफ में ट्रांसफर की जाए।
- सेवा के 7, 14, 21, 28 वर्ष पर चार एसीपी का लाभ दिया जाए।
- ग्रामीण क्षेत्रों में काम करने वाले शिक्षकों को 10% ग्रामीण भत्ता मिले।
- प्लेसमेंट एजेंसी के माध्यम से कार्यरत प्रशिक्षकों, मदरसा शिक्षकों और कुक-कम-हेल्पर को नियमित किया जाए।
- कंप्यूटर अनुदेशकों को ‘कंप्यूटर शिक्षक’ का पदनाम और शिक्षकों जैसा वेतनमान मिले।
- प्रबोधकों को अध्यापक का दर्जा और वेतन विसंगतियों को दूर किया जाए।
- नवनियुक्त शिक्षकों का परिवीक्षा काल एक वर्ष किया जाए और उन्हें नियमित वेतन दिया जाए।
- शिक्षकों के लिए “शिक्षक सुरक्षा अधिनियम” लागू किया जाए।
- प्रतिमाह ₹1000 का इंटरनेट और मोबाइल भत्ता दिया जाए।
- डीपीसी में पारदर्शिता लाकर समय पर पदोन्नति सुनिश्चित की जाए।
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