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11 सितंबर 2025; आभार जताने आए मुकेश को विष्णु ने सीने से लगा लिया।
यह तस्वीर जयपुर के एसएमएस हॉस्पिटल के मुर्दाघर की है। दो शख्स गले मिल रहे हैं। आंखों में आंसू, दिल में प्यार और होठों पर पवित्र मुस्कुराहट। यहां मौजूद लोग समझ रहे हैं कि शायद किसी परिजन की डेडबॉडी लेने आए हैं… लेकिन ऐसा नहीं है। आलिंगन का यह दृश्य
मुकेश बताते हैं-फरवरी 2020 की वो घटना है। रोडवेज बस में दोपहर करीब डेढ़ बजे वह डरावना हादसा गुजरा। करौली से सवाईमाधोपुर जा रहे थे। सीट पर बैठे मुकेश को अचानक सीने में तेज दर्द हुआ और वहीं गश खाकर गिर पड़े। बस में हो-हल्ला मचा। कोई बोला- हार्टअटैक आया है। फिर मुझे कुछ पता नहीं। विष्णु ने बात पूरी की, बताया- मैं पीछे की सीट पर बैठा था। धड़कने मंद थीं। मैंने इन्हें सीपीआर देना शुरू किया। ड्राइवर को तेजी से बस नजदीकी अस्पताल ले जाने को बोला। चलती बस में करीब आधे घंटे की मेरी कोशिश रंग लाई।
सीपीआर से धड़कन लौट आईं, मगर बेहोशी थी। बाद में उन्हें ऑटो से लेकर निजी हॉस्पिटल पहुंचा। मुकेश बोले- हां, मुझे डॉक्टरों ने बताया- कुछ देरी होती तो मैं शायद नहीं बचता। बाद में एसएमएस में भी मेरा इलाज चला। आज मैं ठीक हूं तो विष्णु की बदौलत। ये न होते तो मेरे बच्चे अनाथ हो जाते। विष्णु ने कहा- मारने वाले से बड़ा बचाने वाला होता है, मैंने अपना फर्ज निभाया और हम अपनी-अपनी जिंदगी में व्यस्त हो गए
कोरोना में 3 हजार शवों की अंत्येष्टि की थी विष्णु ने
विष्णु कोरोना वारियर रहे हैं। कोरोना में लाशों का अंबार लगा था। अपने भी संक्रमण के डर से डेडबॉडी छूने से डर रहे थे। तब उसने 3 हजार शवों का अंतिम संस्कार किया था। एम्बुलेंस में शव लाने ले जाने वाले विष्णु का ऐसा भी समय निकला जब एक माह दिन-रात मुर्दाघर में ही बिताया।
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