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कोर्ट में दो बच्चों के माता पिता ने एक दूसरे को माला पहनाकर पहनाई, फिर दोनों राजीखुशी अपने घर गए। मामला बाड़मेर लोक अदालत कोर्ट शनिवार का है। पति-पत्नी बीते दो सालों से अलग रहे थे। कोर्ट में तलाक के लिए अप्लाई कर रखा था। वकील गणेश राम का कहना है लोक
वकील गणेश कुमार मेघवाल ने बताया- बाड़मेर तिलक नगर निवासी धनवंती और चंपालाल दोनों पति-पत्नी है। दोनों का साल 2013 में शादी हुई थी। इसके बाद उनका पारिवारिक जीवन अच्छा चला। इसके दो बच्चे भी है। इसके बीच में एक-दूसरे पर छोटी-मोटी बातों को लेकर दूसरे पर आरोप लगाकर कहासुनी शुरू हुई। विवाद इतना बढ़ा कि दोनों अलग हो गए। आपस में विवाद इतना बढ़ा कि दोनों अलग हो गए। दो साल पहले चंपालाल आए थे। उसने मेरे को बताया कि मेरा पति-पत्नी का रिश्ता बिगड़ गया है। हम साथ नहीं रहना चाहते है। मुझे तलाक का दावा कोर्ट में पेश करना है। तब मैंने इनको समझाया था कि परिवार टूटे नहीं और आपस में आप दोनों अलग नहीं हो। लेकिन यह उस समय मानने को तैयार नहीं थे।
एडवोकेट का कहना है कि साल 2024 में चंपालाल की तरफ से तलाकनामा पेश किया गया। जो विचाराधीन है। कुछ दिन पहले चंपालाल मेरे पास आए। तब मैंने उनकी पत्नी को भी बुलाया। दोनों को बुलाकर आपस में समझाइश की। समाज के मौजिज लोगों ने समझाने पर दोनों मान गए।
राष्ट्रीय लोक अदालत में दोनों एक-दूसरे को वरमाला पहनाकर साथ रहने का फैसला किया
वकील ने कहा कि राष्ट्रीय लोक अदालत से प्रेरित होकर इन दोनों ने आपस में समझोता कर लिया। लोक अदालत में तुंरत न्याय सुलभ तरीके से सस्ता मिलता है। आज दोनों के बीच समझौता हो गया। दोनों को राजी करके यहां से रवाना किए है जो हम साथ में रहेगे।
दो बच्चे है दोनों के
वकील ने बताया कि दोनों के दो बच्चे है। साल 2024 में कोर्ट में तलाकनामा पेश किया था। लेकिन आज उनका राजीनामा हो गया। परिवार में छोटी-मोटी बातों को लेकर विवाद हो जाता है लेकिन वापस राजनीमा होना बड़ी बात है।
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